Masoom Sharma Political Debut: ‘खटोला’ फेम मासूम शर्मा की राजनीति में एंट्री? बयान से मची हलचल

Masoom Sharma Political Debut: हरियाणवी गायक मासूम शर्मा ने राजनीति पर तोड़ी चुप्पी, योगी मॉडल से प्रभावित! कह दी यह बात

Masoom Sharma Political Debut: हरियाणा (Haryana) की संगीत दुनिया से निकलकर राजनीति तक पहुंचने की चर्चाएं इन दिनों तेज हैं। मशहूर ‘खटोला’ गाने से पहचान बनाने वाले हरियाणवी गायक मासूम शर्मा (Masoom Sharma) के हालिया बयान ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। एक सार्वजनिक सभा के दौरान मासूम शर्मा ने न सिर्फ राजनीति पर खुलकर राय रखी, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी पार्टी विशेष से बंधे नहीं हैं। राष्ट्रवाद, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कलाकारों की भूमिका जैसे मुद्दों पर उनकी बेबाक टिप्पणी ने लोगों का ध्यान खींचा है। क्या मासूम शर्मा आने वाले समय में राजनीति में कदम रखेंगे, या यह सिर्फ वैचारिक अभिव्यक्ति है? उनके बयान के पीछे के मायने क्या हैं और भविष्य के संकेत क्या कहते हैं, चलिए जानते हैं विस्तार से…

राजनीति और कला के बीच संतुलन जरूरी/Masoom Sharma Political Debut

हरियाणवी संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके मासूम शर्मा (Masoom Sharma) लंबे समय से सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। हाल के दिनों में कलाकारों और प्रशासन के बीच बढ़ती बहस, अभिव्यक्ति की सीमाएं और राजनीतिक टिप्पणियों के संदर्भ में उनका बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी (DGP) अपना कर्तव्य निभा रहे हैं और कलाकार अपना, क्योंकि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी अलग होती है। मासूम शर्मा के अनुसार, टकराव की राजनीति लोकतंत्र को कमजोर करती है, जबकि अपने-अपने दायरे में ईमानदारी से काम करना व्यवस्था को मजबूत बनाता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कलाकारों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उनकी सोच यह दर्शाती है कि वे राजनीति को संघर्ष का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा और जिम्मेदारी के नजरिए से देखते हैं।

मासूम शर्मा के पॉलिटिकल डेब्यू पर खुलासा

राजनीति जॉइन करने के सवाल पर मासूम शर्मा (Masoom Sharma) ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका किसी भी राजनीतिक दल से न तो विरोध है और न ही कोई परहेज। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य में क्या होगा, यह परमात्मा की इच्छा पर निर्भर है। हालांकि, उन्होंने यह साफ कर दिया कि उनकी विचारधारा राष्ट्रवाद से जुड़ी है, न कि किसी पार्टी के झंडे से। यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि अक्सर लोकप्रिय कलाकार किसी न किसी दल से जुड़ जाते हैं। मासूम शर्मा का कहना है कि कलाकार का असली काम समाज से जुड़कर रहना है, न कि खुद को राजनीतिक खांचों में सीमित करना। उन्होंने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) को अपना राजनीतिक आइडल बताया, जिससे उनके वैचारिक झुकाव के संकेत जरूर मिलते हैं।

ऐसे शुरू हुआ विवाद

सफीदों (Safidon) से विधायक राम कुमार गौतम (Ram Kumar Gautam) की विवादित टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए मासूम शर्मा ने बेहद संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उम्र के इस पड़ाव में कभी-कभी बुजुर्गों से ऐसी बातें निकल जाती हैं, जिसे बहुत गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। उनके अनुसार, लोग इसे कई बार हास्य के रूप में भी लेते हैं और सम्मान बना रहता है। अपनी गायकी और गीतों पर होने वाली आलोचना को लेकर उन्होंने कहा कि संगीत एक लंबी यात्रा है, जिसमें समय के साथ बदलाव जरूरी है। कलाकार को समाज और दौर के अनुसार खुद को ढालना चाहिए। यह प्रतिक्रिया उनकी परिपक्व सोच को दर्शाती है, जहां वे विवाद को टकराव नहीं, बल्कि संवाद का माध्यम मानते हैं।

मासूम शर्मा ने सरकार को दी सलाह

मासूम शर्मा (Masoom Sharma) ने साफ कहा कि कार्यक्रम चलते रहने चाहिए और कलाकारों पर अनावश्यक रोक-टोक नहीं होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार को ज्यादा गंभीर और जरूरी मुद्दों पर सख्ती दिखानी चाहिए। आलोचना को लेकर उनका नजरिया साफ है—उनका मानना है कि आलोचक उतने ही जरूरी हैं जितने प्रशंसक। उन्होंने यहां तक कहा कि जिस दिन आलोचना खत्म हो जाएगी, उस दिन उनका अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। फिलहाल, मासूम शर्मा राजनीति में औपचारिक एंट्री से इनकार कर रहे हैं, लेकिन उनके बयान यह जरूर संकेत देते हैं कि वे सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी आवाज मजबूती से उठाते रहेंगे। आने वाले समय में उनका यह रुख किस दिशा में जाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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