4th Chandrakala Nritya Mahotsav Odisha Kolkata: कोलकाता में हुआ चौथा चंद्रकला नृत्य महोत्सव, ओडिशी नृत्य की जादुई शाम

4th Chandrakala Nritya Mahotsav Odisha Kolkata: गुरु गिरिधारी नायक की याद में भव्य आयोजन किया गया

4th Chandrakala Nritya Mahotsav Odisha Kolkata: कोलकाता में ओडिशी नृत्य की दुनिया में एक खास कार्यक्रम हुआ। प्रसिद्ध ओडिशी नर्तक गुरु गिरिधारी नायक की स्मृति में ओडिशी आश्रम ने चौथा चंद्रकला नृत्य महोत्सव आयोजित किया। यह कार्यक्रम रविवार को आईसीसीआर के सत्यजीत राय ऑडिटोरियम में हुआ। गुरु गिरिधारी नायक ओडिशी नृत्य के बड़े नाम थे। उन्होंने इस नृत्य शैली में कई नए प्रयोग किए, खासकर मृदंगम वादन के साथ। उनकी याद में हर साल यह महोत्सव होता है, जो ओडिशी कला को जीवित रखने का एक बड़ा प्रयास है।

उद्घाटन और मुख्य अतिथियों के विचार/4th Chandrakala Nritya Mahotsav Odissi Kolkata

महोत्सव का उद्घाटन प्रसिद्ध ओडिशी गुरु और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता आलोक कानूनगो ने किया। उन्होंने कहा कि ओडिशी नृत्य भारत के आठ शास्त्रीय नृत्यों में से एक है और बहुत खूबसूरत है। गुरु गिरिधारी नायक ने इसमें मृदंगम के साथ कई अद्भुत नवाचार किए। उनके पदचिन्हों पर चलते हुए उनकी बेटी सुजाता नायक आज एक बहुत प्रतिभाशाली नृत्य कलाकार बन चुकी हैं। आलोक जी ने गुरु गिरिधारी की तारीफ करते हुए कहा कि उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

मुख्य अतिथि रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के नृत्य विभाग के प्रमुख प्रोफेसर राहुल देव मंडल थे। उन्होंने कहा कि ओडिशी आश्रम का यह प्रयास बहुत सराहनीय है। इस संस्था ने ओडिशी नृत्य की विविधता को बनाए रखा है और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाया है। प्रोफेसर मंडल ने बताया कि ऐसे आयोजन से युवा कलाकारों को प्रेरणा मिलती है और ओडिशी की परंपरा मजबूत होती है।

सम्मान और पुरस्कार वितरण

इस कार्यक्रम में कई कलाकारों को सम्मानित किया गया। गुरु आलोक कानूनगो और गुरु संदीप मलिक को गुरु गिरिधारी नायक स्मृति अवॉर्ड दिया गया। यह अवॉर्ड उनके ओडिशी नृत्य में योगदान के लिए था। वहीं, उभरते हुए गेस्ट डांसर प्रोफेसर राहुल देव मंडल को चंद्रकला फेस्टिवल की डायरेक्टर तमालिका नायक ने चंद्रकला अवॉर्ड से सम्मानित किया। ये पुरस्कार कलाकारों को और मेहनत करने की प्रेरणा देते हैं। सुजाता नायक ने कार्यक्रम के अंत में सभी का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पिता की स्मृति में यह आयोजन करना उनके लिए बहुत भावुक पल है।

ओडिशी आश्रम के छात्रों ने बांधा समां

महोत्सव की सबसे खास बात थी ओडिशी आश्रम के छात्रों का नृत्य प्रदर्शन। इन युवा कलाकारों ने उत्कल कला संस्कृति ओडिसी का शानदार प्रदर्शन किया। ओडिशी नृत्य की मुद्राएं, भाव, ताल और लय सब कुछ इतना परफेक्ट था कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। छात्रों ने पारंपरिक ओडिशी के साथ कुछ नए प्रयोग भी दिखाए, जो गुरु गिरिधारी नायक की शैली से प्रेरित थे। ऑडिटोरियम में बैठे लोग तालियां बजाते नहीं थक रहे थे। कई दर्शकों ने कहा कि ऐसे प्रदर्शन देखकर लगता है कि ओडिशी नृत्य की परंपरा सुरक्षित हाथों में है।

ओडिशी नृत्य ओडिशा की प्राचीन मंदिर परंपरा से जुड़ा है। इसमें भगवान जगन्नाथ की भक्ति और प्रकृति की सुंदरता झलकती है। गुरु गिरिधारी नायक ने कोलकाता में ओडिशी आश्रम स्थापित करके इस कला को बंगाल में भी लोकप्रिय बनाया। उनकी बेटी सुजाता और अन्य शिष्य आज इसे आगे बढ़ा रहे हैं।

ऐसे आयोजन क्यों जरूरी हैं

आज के समय में शास्त्रीय नृत्य को बचाए रखना बड़ा चुनौतीपूर्ण है। बॉलीवुड और पॉप कल्चर के बीच ओडिशी जैसे नृत्य को जगह बनाना मुश्किल है। लेकिन ओडिशी आश्रम जैसे संस्थान और चंद्रकला जैसे महोत्सव इसी काम को कर रहे हैं। ये न सिर्फ पुराने कलाकारों को सम्मान देते हैं, बल्कि नए छात्रों को मंच देते हैं। कोलकाता जैसे शहर में जहां कई संस्कृतियां मिलती हैं, यहां ओडिशी का यह उत्सव बंगाल और ओडिशा की संस्कृति को जोड़ता है। दर्शकों में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सब थे, जो दिखाता है कि यह कला सभी उम्र के लोगों को छूती है।

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