Magh Mela 2026 Prayagraj: दुनिया की सबसे बड़ी आस्था का संगम एक बार फिर साकार हो रहा है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के तट पर माघ मेला 2026 की शुरुआत हो चुकी है। 3 जनवरी से शुरू हुआ यह आस्था का महापर्व 15 फरवरी को महाशिवरात्रि तक चलेगा। इस बार का मेला इसलिए भी खास है क्योंकि 75 साल बाद एक दुर्लभ और शुभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जिसे ‘महामाघ’ कहा जा रहा है। मान्यता है कि इस संयोग में स्नान-दान करने से महाकुंभ जैसा पुण्य मिलता है।
75 साल बाद बना दुर्लभ ‘महामाघ’ संयोग /Magh Mela 2026 Prayagraj
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार सूर्य मकर राशि में अपने ही दिन यानी रविवार को प्रवेश कर रहे हैं। ऐसा संयोग 75 साल बाद बना है। इसी वजह से इस माघ मेले को ‘महामाघ’ का दर्जा मिला है। शास्त्रों में कहा गया है कि माघ महीने में संगम स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दुर्लभ योग में स्नान करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। पहले दिन पौष पूर्णिमा पर ही लाखों श्रद्धालु संगम पहुंचे और कड़ाके की ठंड व कोहरे के बावजूद आस्था की डुबकी लगाई। मेला प्रशासन के अनुसार, पहले दिन ही 25-30 लाख से ज्यादा लोगों ने स्नान किया।

माघ मेले की शुरुआत और प्रमुख स्नान तिथियां: छह बड़े पर्व
माघ मेला हर साल प्रयागराज में लगता है, जो कुंभ का छोटा रूप माना जाता है। इस बार यह 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा से शुरू हुआ और 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर समाप्त होगा। कुल 44 दिनों तक चलने वाले इस मेले में छह प्रमुख स्नान पर्व हैं:
- पौष पूर्णिमा: 3 जनवरी 2026 (मेले की शुरुआत)
- मकर संक्रांति: 14 जनवरी 2026 (इस बार सबसे खास, क्योंकि दुर्लभ योग)
- मौनी अमावस्या: 18 जनवरी 2026 ( इस दिन सबसे बड़ा स्नान पर्व)
- बसंत पंचमी: 23 जनवरी 2026
- माघी पूर्णिमा: 1 फरवरी 2026
- महाशिवरात्रि: 15 फरवरी 2026 (मेले का समापन)
इन दिनों पर करोड़ों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाने पहुंचते हैं। कल्पवासी भी हजारों की संख्या में आते हैं, जो पूरे महीने तट पर टेंट लगाकर कठोर व्रत करते हैं।
संगम का स्वर्ग जैसा नजारा, रात में LED लाइट्स और फव्वारे का जादू
प्रयागराज का संगम तट इन दिनों स्वर्ग जैसा लग रहा है। मेला क्षेत्र को महाकुंभ की तर्ज पर सजाया गया है। रात में नावों पर LED लाइट्स, पानी में सात रंग के फव्वारे और घाटों पर रंग-बिरंगे चेंजिंग रूम श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मेले को दिव्य और भव्य बनाया गया है। मेला क्षेत्र को सात सेक्टरों में बांटा गया है, जहां 800 हेक्टेयर में टेंट सिटी बसी है। 126 किलोमीटर चेकर्ड पाथ बिछाए गए हैं।
कल्पवास की परंपरा,महीने भर की कठोर साधना
माघ मेले की सबसे बड़ी विशेषता है कल्पवास। लाखों कल्पवासी संगम तट पर टेंट लगाकर पूरे माघ महीने रहते हैं। वे जमीन पर सोते हैं, सादा भोजन करते हैं और रोज स्नान, पूजा, ध्यान करते हैं। मान्यता है कि कल्पवास से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध होती है। इस बार 20-25 लाख कल्पवासी आने की उम्मीद है। कुल मेले में 12-15 करोड़ श्रद्धालु स्नान करेंगे।
मेले की भव्य व्यवस्थाएं, सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक सब चाक-चौबंद
योगी सरकार ने मेले को मिनी कुंभ की तरह आयोजित किया है। सुरक्षा के लिए 10 हजार पुलिसकर्मी, ड्रोन, AI कैमरे और CCTV लगाए गए हैं। 17 थाने, 42 चौकियां, 20 फायर टेंडर और जल पुलिस की व्यवस्था है। स्वास्थ्य के लिए दो 20-20 बेड वाले अस्पताल, 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 50 एम्बुलेंस तैनात हैं। आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक अस्पताल भी हैं। पेयजल, बिजली, साफ-सफाई सबकी बेहतरीन व्यवस्था है। रेलवे ने स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं।
माघ मेले का इतिहास और महत्व,तीर्थराज प्रयागराज की महिमा
प्रयागराज को तीर्थराज कहा जाता है। यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम है। शास्त्रों में कहा गया है कि माघ में यहां स्नान करने से हजारों तीर्थों का पुण्य मिलता है। मेले की जड़ें समुद्र मंथन से जुड़ी हैं, जहां अमृत की बूंदें गिरी थीं। सदियों से यहां साधु-संत, अखाड़े और श्रद्धालु आते हैं। यह मेला सिर्फ स्नान नहीं, बल्कि सत्संग, कीर्तन, योग और संस्कृति का महासंगम है।
देश-विदेश से आ रहे श्रद्धालु,आस्था की जीत
कड़ाके की ठंड और कोहरे के बावजूद श्रद्धालु सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ही संगम पहुंच रहे हैं। हर-हर गंगे के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज रहा है। विदेशी साधु भी मेले में शामिल हो रहे हैं। यह नजारा देखकर लगता है कि आस्था के आगे प्रकृति भी झुक जाती है।
माघ मेला 2026 सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था की जीवंत तस्वीर है। यहां आने वाला हर व्यक्ति खुद को शुद्ध और दिव्य महसूस करता है। देशवासी इस महापर्व की शुभकामनाएं दे रहे हैं और जल्द ही प्रमुख स्नान पर्वों का इंतजार कर रहे हैं।










