Fadnavis False Case Conspiracy: महाराष्ट्र CM देवेंद्र फडणवीस को झूठे केस में फंसाने की साजिश, पूर्व DGP पर केस की सिफारिश

Fadnavis False Case Conspiracy: झूठे ULC केस में फंसाने की कोशिश! CM फडणवीस के खिलाफ साजिश, SIT रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Fadnavis False Case Conspiracy: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा खुलासा हुआ है। वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पुराने समय में झूठे केस में फंसाने की कथित साजिश का बड़ा खुलासा हुआ। पूर्व पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट में पूर्व DGP संजय पांडे समेत तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। ये मामला 2016 के ठाणे ULC (Urban Land Ceiling) घोटाले से जुड़ा है, जिसमें फडणवीस और शिंदे को फंसाने की कोशिश की गई थी।

साजिश कैसे शुरू हुई?/Fadnavis False Case Conspiracy

ये पूरा मामला उस समय का है जब महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार सत्ता में थी। देवेंद्र फडणवीस उस वक्त विपक्ष के नेता थे, जबकि एकनाथ शिंदे शहरी विकास मंत्री थे। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व DGP संजय पांडे ने ठाणे के तत्कालीन DCP लक्ष्मीकांत पाटिल और ACP सरदार पाटिल को निर्देश दिए थे कि फडणवीस और शिंदे को आरोपी बनाया जाए। उन्हें दिखाया जाए कि उन्होंने बिल्डरों से पैसे मांगे थे।

संजय पांडे ने कथित तौर पर कहा था – “केस बनाओ और अरेस्ट करो!” ये निर्देश इसलिए दिए गए ताकि दोनों नेताओं को राजनीतिक रूप से कमजोर किया जा सके। ये साजिश 2021 से चल रहे ULC घोटाले की जांच के दौरान सामने आई।

SIT रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?

पूर्व पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला ने अपनी सेवानिवृत्ति से ठीक 5 दिन पहले इसकी विस्तृत रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को सौंपी। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि ये एक सुनियोजित साजिश थी। तीनों अधिकारियों – संजय पांडे, लक्ष्मीकांत पाटिल और सरदार पाटिल – के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट कहती है कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी राजनीतिक दबाव में आकर झूठे केस दर्ज करने की कोशिश कर रहे थे। ये सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक बदले की कार्रवाई लगती है।

सबूत और ऑडियो-वीडियो क्लिप्स

इस मामले में कई सबूत सामने आए हैं। भाजपा विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर ने विधानमंडल में पेन ड्राइव दिखाई थी, जिसमें स्टिंग ऑपरेशन की वीडियो और ऑडियो क्लिप्स थीं। एक क्लिप में ACP सरदार पाटिल किसी से बात करते सुनाई देते हैं कि पुराना केस दोबारा खोलने का मकसद फडणवीस और शिंदे को फंसाना है।

एक अन्य वीडियो में डिप्टी कमिश्नर किसी नागरिक पर दबाव डालते दिखते हैं कि झूठा बयान दें ताकि फडणवीस को फंसाया जा सके। ये क्लिप्स मीडिया में भी वायरल हुईं और काफी हंगामा मचा।

सरकार ने क्या किया?

महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही इस साजिश की जांच के लिए SIT (विशेष जांच दल) बनाया था। SIT ने जांच पूरी की और रिपोर्ट सौंपी। अब इस रिपोर्ट के आधार पर तीनों पूर्व अधिकारियों पर केस दर्ज करने की तैयारी है। महायुति सरकार (BJP-शिवसेना-NCP) इसे बहुत गंभीरता से ले रही है।

फडणवीस ने पहले भी कई बार कहा था कि MVA सरकार में उन्हें और अन्य BJP नेताओं को झूठे केस में फंसाने की कई कोशिशें हुईं। उन्होंने दावा किया था कि कुछ अधिकारियों को “सुपारी” दी गई थी, लेकिन कई ईमानदार अफसरों ने साथ नहीं दिया।

राजनीतिक असर क्या होगा?

ये खुलासा महाराष्ट्र की राजनीति में तूफान ला सकता है। विपक्ष (MVA) इसे राजनीतिक बदला कह सकता है, जबकि सत्ताधारी दल इसे “सच्चाई का खुलासा” बता रहा है। पूर्व DGP संजय पांडे पहले से ही कुछ मामलों में जांच के घेरे में हैं। अगर केस दर्ज हुआ तो ये बड़े स्तर पर पुलिस और राजनीति के रिश्तों पर सवाल उठाएगा।

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