Trump Gaza Peace Board Pakistan: ट्रंप ने गाजा शांति बोर्ड में पाकिस्तान को बुलाकर इजराइल को किया नाराज, नेतन्याहू की बढ़ी टेंशन

Trump Gaza Peace Board Pakistan: ट्रंप का नया बड़ा कदम,गाजा के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस

Trump Gaza Peace Board Pakistan: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने और वहां शांति कायम करने के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय बोर्ड बनाया है, जिसका नाम है ‘बोर्ड ऑफ पीस फॉर गाजा’। ट्रंप खुद इस बोर्ड के चेयरमैन हैं। यह बोर्ड गाजा में युद्ध के बाद की स्थिति संभालने, पुनर्निर्माण करने, सहायता बांटने और वहां स्थायी शांति लाने का काम देखेगा। ट्रंप की यह योजना उनकी 20-पॉइंट गाजा शांति योजना का दूसरा चरण है, जिसे इजराइल और हमास ने मंजूरी दी थी।

इस बोर्ड में कई देशों को शामिल करने के लिए न्योते भेजे गए हैं। इसमें तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, कनाडा, भारत, हंगरी, ग्रीस, साइप्रस जैसे देश शामिल हैं। हाल ही में पाकिस्तान को भी इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता मिला है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को ट्रंप का यह न्योता मिला है। पाकिस्तान ने कहा है कि वह गाजा में शांति और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कोशिशों में पूरा सहयोग करेगा।

पाकिस्तान को न्योता क्यों दिया? ट्रंप की रणनीति क्या है?/Trump Gaza Peace Board Pakistan

ट्रंप ने इस बोर्ड को ऐसा बनाया है कि इसमें मुस्लिम देशों और उन देशों को भी जगह दी जाए जो फिलिस्तीन के मुद्दे पर सक्रिय हैं। पाकिस्तान को शामिल करने से ट्रंप शायद मध्य पूर्व में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं। पाकिस्तान इजराइल का दुश्मन माना जाता है क्योंकि दोनों देशों के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं। पाकिस्तान हमेशा फिलिस्तीन का समर्थन करता रहा है।

ट्रंप ने पहले तुर्की और मिस्र जैसे देशों को बुलाया था, जो इजराइल के साथ तनाव में रहते हैं। अब पाकिस्तान को बुलाने से यह साफ हो गया है कि ट्रंप बोर्ड को ज्यादा व्यापक और संतुलित बनाना चाहते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि स्थायी सदस्य बनने के लिए 1 बिलियन डॉलर (करीब 9000 करोड़ रुपये) का योगदान देना पड़ सकता है, जो गाजा के पुनर्निर्माण में जाएगा। लेकिन यह अभी पुष्टि नहीं हुई है।

इजराइल क्यों नाराज? नेतन्याहू की टेंशन बढ़ी

इस न्योते से सबसे ज्यादा नाराज इजराइल हुआ है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की टेंशन बढ़ गई है। इजराइल हमेशा से पाकिस्तान को अपना दुश्मन मानता है। पाकिस्तान ने कभी इजराइल को मान्यता नहीं दी और फिलिस्तीनी मुद्दे पर मजबूत रुख अपनाया है।

इजराइल को डर है कि बोर्ड में पाकिस्तान जैसे देश शामिल होने से गाजा में हमास के खिलाफ उनकी सख्त नीति कमजोर पड़ सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि नेतन्याहू ने ट्रंप के इस फैसले पर नाराजगी जताई है। इजराइल चाहता है कि बोर्ड में सिर्फ उसके सहयोगी देश हों, लेकिन ट्रंप ने ऐसे देशों को भी बुलाया है जो इजराइल विरोधी माने जाते हैं, जैसे तुर्की और अब पाकिस्तान।

इजराइल के लिए यह बड़ा झटका है क्योंकि ट्रंप उनके करीबी मित्र माने जाते हैं, लेकिन इस बार ट्रंप ने अपनी अलग रणनीति अपनाई है। इजराइल को लगता है कि बोर्ड में पाकिस्तान आने से फिलिस्तीनी मुद्दे पर उनकी पोजीशन कमजोर हो सकती है और गाजा में हमास को फायदा मिल सकता है।

भारत को भी न्योता, क्या होगा असर?

ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया है। भारत ने अभी इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन भारत हमेशा से गाजा में शांति की बात करता रहा है। भारत और पाकिस्तान दोनों को बुलाने से ट्रंप शायद दक्षिण एशिया में भी संतुलन बनाना चाहते हैं।

क्या है बोर्ड का भविष्य?

यह बोर्ड गाजा में अंतरिम प्रशासन देखेगा, जहां फिलिस्तीनी तकनीकी टीम काम करेगी। लेकिन बोर्ड में इतने विरोधी देशों को शामिल करने से फैसले लेना मुश्किल हो सकता है। कुछ लोग इसे ट्रंप का नया ‘मिनी-यूएन’ कह रहे हैं।

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