Sanjay Rajak Ultimatum Mining Pollution : धनबाद सांसद संजय रजक का सख्त रुख; खनन कंपनियों की मनमानी पर 15 दिनों का अल्टीमेटम

Sanjay Rajak Ultimatum Mining Pollution : बोकारो के गांवों में धूल-प्रदूषण और तेज रफ्तार वाहनों से जनजीवन परेशान

Sanjay Rajak Ultimatum Mining Pollution : झारखंड के बोकारो जिले में खनन गतिविधियों से जुड़ी समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। यहां धनबाद लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री संजय रजक ने इन मुद्दों को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद की है। उन्होंने कहा कि वे क्षेत्र के लोगों की परेशानियों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। खासकर जेआरएल माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड की गतिविधियां ग्रामीणों के लिए बहुत मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। कंपनी के भारी वाहनों से फैलने वाली धूल, ओवरलोडिंग, तेज रफ्तार, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और 24 घंटे बिना रुके चलने वाली मशीनरी से गांव वाले बेहाल हैं।

प्रभावित गांव, बांधडीह, डाबर, कोचबा, अलकुशा और धंदाबार

सांसद संजय रजक ने बताया कि बांधडीह, डाबर, कोचबा, अलकुशा और धंदाबार जैसे गांवों के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन गांवों में खनन के ट्रकों और डंपर्स की आवाजाही से धूल का ऐसा गुबार उठता है कि दिन में भी अंधेरा सा छा जाता है। लोग सांस लेने में तकलीफ महसूस करते हैं, खासकर बच्चे और बुजुर्ग। सड़कें टूट-फूट गई हैं, क्योंकि ओवरलोडेड वाहन रोजाना इन पर दौड़ते हैं। तेज रफ्तार से कई बार हादसे भी हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी फसलें धूल से खराब हो रही हैं, घरों में धूल भर जाती है, और पानी के स्रोत भी प्रदूषित हो रहे हैं।

यह सब खनन नियमों, सड़क सुरक्षा कानूनों और कंपनी के सामाजिक दायित्वों की साफ तौर पर अनदेखी है। सांसद ने कहा कि ऐसी स्थिति लंबे समय से चल रही है, लेकिन अब लोग चुप नहीं बैठेंगे।

सांसद का कंपनी अधिकारियों को दिया लिखित पत्र

आज सांसद संजय रजक कंपनी के स्थल पर पहुंचे, लेकिन महाप्रबंधक मौके पर मौजूद नहीं थे। ऐसे में उन्होंने कंपनी के बांधडीह साइट इंचार्ज श्री दुर्गा सिंह को एक लिखित पत्र सौंपा। इस पत्र में उन्होंने ग्रामीणों की सारी समस्याओं का जिक्र किया और कंपनी से तुरंत ध्यान देने की मांग की। सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि यह स्थिति खनन नियमों की खुली अवहेलना है। कंपनी को चाहिए कि वह प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम लगाए, वाहनों की ओवरलोडिंग रोके, स्पीड लिमिट लगाए और सुरक्षा मानकों का पालन करे।

15 दिनों के अंदर समाधान नहीं तो आंदोलन की चेतावनी

सांसद ने कंपनी प्रबंधन को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अगले 15 दिनों के अंदर कंपनी ग्रामीणों के साथ बैठक नहीं करती और ठोस समाधान नहीं निकालती, तो वे खुद ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी। सांसद ने जोर देकर कहा, “यह लड़ाई किसी व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ नहीं है। यह ग्रामीणों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और उनके बुनियादी अधिकारों की लड़ाई है। जनहित के मुद्दों पर अब सिर्फ आश्वासन नहीं चलेगा। हमें जमीनी स्तर पर असली कार्रवाई चाहिए। जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। समाधान होकर रहेगा।”

खनन क्षेत्र में सामाजिक दायित्व की जरूरत

झारखंड जैसे राज्य में खनन बहुत बड़ी इंडस्ट्री है, लेकिन इससे होने वाले फायदे सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। सांसद का कहना है कि कंपनी को अपने आसपास के गांवों के विकास में योगदान देना चाहिए। स्कूल, अस्पताल, सड़कें, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। लेकिन यहां तो उल्टा हो रहा है – खनन से प्रदूषण बढ़ रहा है, स्वास्थ्य बिगड़ रहा है और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है।

सांसद संजय रजक ने इस मुद्दे को कई बार उठाया है। वे कहते हैं कि वे क्षेत्र के लोगों के साथ खड़े हैं और जब तक समस्या का स्थायी हल नहीं निकलता, वे पीछे नहीं हटेंगे। ग्रामीणों ने भी सांसद का समर्थन किया है और कहा है कि अगर कंपनी नहीं मानी तो वे सड़कों पर उतर आएंगे।

निष्कर्ष

अब सबकी नजरें कंपनी प्रबंधन पर टिकी हैं। क्या वे 15 दिनों में ग्रामीणों से बात करेंगे और समस्याओं का समाधान निकालेंगे? या फिर स्थिति और बिगड़ेगी? सांसद की चेतावनी से साफ है कि अब सिर्फ बातें नहीं, बल्कि काम दिखाना होगा। यह मामला न सिर्फ बोकारो के इन गांवों का है, बल्कि पूरे खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक उदाहरण बन सकता है। जहां कंपनियां नियम तोड़ती हैं, वहां जनप्रतिनिधि और आम लोग मिलकर आवाज उठा रहे हैं। उम्मीद है कि कंपनी समय रहते जिम्मेदारी समझेगी और ग्रामीणों की परेशानियां दूर करेगी।

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