Youth Congress AI Summit Protest: दिल्ली के भारत मंडपम में 20 फरवरी 2026 को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा मचाया। भारत-अमेरिका के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े सहयोग और व्यापार पर केंद्रित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विरोध प्रदर्शन ने सबको चौंका दिया। कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को “समझौता” बताते हुए टी-शर्ट उतारकर अर्धनग्न अवस्था में नारे लगाए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तुरंत हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की “देश विरोधी हरकत” करार देते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा, जबकि यूथ कांग्रेस ने इसे देश की अस्मिता की रक्षा का कदम बताया।
समिट का माहौल और अचानक हंगामा/Youth Congress AI Summit Protest
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 एक प्रतिष्ठित वैश्विक मंच था, जहां भारत और अमेरिका के बीच AI तकनीक, व्यापार और सहयोग पर चर्चा हो रही थी। समिट में सरकारी अधिकारी, उद्योगपति और अंतरराष्ट्रीय मेहमान शामिल थे, जो भारत को AI हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे थे। लेकिन इसी बीच यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता अचानक स्थल पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि यह कॉरपोरेट दबाव में झुक रही है।

घटना की शुरुआत तब हुई जब कार्यकर्ता समिट हॉल में घुस आए। उन्होंने “पीएम मोदी COMPROMISED हैं” जैसे नारे लगाए, जिसका मतलब है कि मोदी सरकार विदेश नीति में समझौते कर रही है। प्रदर्शन को और प्रभावी बनाने के लिए कुछ कार्यकर्ताओं ने अपनी टी-शर्ट उतार दीं और ऊपरी शरीर उजागर कर “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे गूंजाए। यह दृश्य काफी चौंकाने वाला था, क्योंकि समिट जैसे गरिमापूर्ण मंच पर इस तरह का विरोध पहले कभी नहीं देखा गया। वीडियो में कार्यकर्ताओं को जोर-शोर से नारेबाजी करते और हंगामा मचाते दिखाया गया है, जो मिनटों में सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। ABP न्यूज समेत कई मीडिया चैनलों ने इस वीडियो को #WATCH के साथ शेयर किया, जिसमें @romanaisarkhan और @vishalpandeyk जैसे यूथ कांग्रेस के प्रमुख चेहरे नजर आ रहे हैं।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। उनसे पूछताछ में यह सामने आया कि विरोध भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ था, जिसे यूथ कांग्रेस “देश की अस्मिता से समझौता” मानती है। समिट के आयोजकों ने घटना पर अफसोस जताया और कहा कि यह कार्यक्रम की गरिमा को प्रभावित करने वाला कदम है।
यूथ कांग्रेस का रुख: “देश की अस्मिता से कोई समझौता नहीं”
यूथ कांग्रेस ने इस प्रदर्शन को पूरी तरह जायज ठहराया। अपनी आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, “जब विदेश नीति में झुकाव, कॉरपोरेट दबाव और चुप्पी हावी हो तो साफ है कि पीएम मोदी COMPROMISED हैं। इसी सच्चाई को बेनकाब करने के लिए भारतीय युवा कांग्रेस के जाबांज कार्यकर्ता AI समिट पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। देश की अस्मिता से कोई समझौता नहीं होगा। इंकलाब जिंदाबाद!” यह बयान साफ दर्शाता है कि यूथ कांग्रेस का फोकस मोदी सरकार की विदेश नीति पर था, जिसे वे कॉरपोरेट हितों के आगे झुकने वाला मानते हैं।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे सम्मेलनों में सरकार बड़े कॉरपोरेट्स के दबाव में आकर देशहित को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बताया और कहा कि युवा पीढ़ी अब चुप नहीं बैठेगी। राहुल गांधी, जो कांग्रेस के प्रमुख नेता हैं, ने अभी तक इस पर सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन बीजेपी ने इसे उनके नेतृत्व से जोड़ दिया है।
बीजेपी का बयान क्या है इस पर?
बीजेपी ने इस घटना को कांग्रेस की “नीच राजनीति” करार दिया। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “जब भारत एक प्रतिष्ठित वैश्विक AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, तब कांग्रेस पार्टी ने गरिमा की जगह इसमें अड़ंगा डालने का रास्ता चुना। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिखर सम्मेलन वाली जगह पर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया, जो स्पष्ट रूप से भारत को वैश्विक मंच पर शर्मिंदा करने के उद्देश्य से किया गया कृत्य था। राजनीतिक विरोध करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन भारत की वैश्विक छवि को धूमिल करना नहीं।
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने और तीखे शब्दों में हमला किया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने दुनिया के सामने देश का अपमान किया। ये लोग अर्बन नक्सल की तरह व्यवहार कर रहे हैं। भारत के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। कांग्रेस राहुल गांधी ने साबित किया कि वे देश के विरोध में खड़े हैं। ये देश विरोधी हरकत है। कांग्रेस को देश के विकास से नफरत है।” भंडारी ने इसे भारत के विकास के खिलाफ साजिश बताया और कहा कि ऐसे कृत्य से वैश्विक निवेशकों का विश्वास टूट सकता है।
बीजेपी ने इस घटना को कांग्रेस की हताशा से जोड़ा, जो हाल के चुनावों में हार के बाद ऐसे हथकंडे अपना रही है। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस इस पर माफी मांगे और राहुल गांधी इसकी जिम्मेदारी लें।
वायरल वीडियो और राजनीतिक प्रभाव
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैला। इसमें कार्यकर्ताओं की नारेबाजी, टी-शर्ट उतारने की हरकत और पुलिस की कार्रवाई सब कुछ कैद है। कई यूजर्स ने इसे “शर्मनाक” बताया, जबकि कुछ ने लोकतंत्र का हिस्सा माना। यह वीडियो X पर लाखों व्यूज पा चुका है और #AISummitProtest ट्रेंड कर रहा है।
राजनीतिक रूप से यह घटना मोदी सरकार की वैश्विक उपलब्धियों पर सवाल उठा सकती है। समिट जैसे मंच पर हंगामा भारत की छवि को प्रभावित कर सकता है, खासकर जब देश AI और टेक हब बनने की दिशा में कदम उठा रहा है। विपक्ष इसे सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का मौका मान रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे देशद्रोह से जोड़ रहा है।
निष्कर्ष
यह घटना लोकतंत्र में विरोध के अधिकार और उसकी सीमाओं पर बहस छेड़ रही है। जहां यूथ कांग्रेस इसे साहसी कदम बता रही है, वहीं बीजेपी इसे राष्ट्रीय हितों के खिलाफ मान रही है। पुलिस जांच के बाद प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल, यह वीडियो और बयानबाजी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राजनीतिक विरोध वैश्विक मंचों पर इस तरह किया जाना चाहिए?










