Raebareli : योगी सरकार के दिशा निर्देशों की धज्जियां उड़ाने का एक मामला सामने आया है। यहां ग्राम विकास अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों ने जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचकर उनके खिलाफ मनमानी, अभद्र व्यवहार और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
बताते चलें कि सदर तहसील क्षेत्र के ब्लॉक अमावां के अंतर्गत मैनुपुर ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ वर्तमान प्रधान और ग्रामीणों ने डीएम को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया गया है कि जुलाई 2025 से फरवरी 2026 तक ग्राम पंचायत का प्रभार संभालने के दौरान ग्राम सचिव साधना सिंह ने न तो पंचायत में नियमित उपस्थिति दी और न ही जनहित के कार्यों में रुचि दिखाई।

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत सहायकों से अभद्र व्यवहार किया गया। प्रधानों के साथ गलत तरीके से बातचीत की गई। पंचायत कार्यालय में अधिकतर समय अनुपस्थित रहीं। परिवार रजिस्टर, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक कार्य बाधित रहे। ग्राम प्रधानों ने यह भी दावा किया है कि इस संबंध में पूर्व में खंड विकास अधिकारी संदीप सिंह को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मामला तब और गरमा गया जब ग्राम प्रधानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि साधना सिंह को दोबारा ग्राम पंचायत में तैनात किया गया, तो वे अपने पद से इस्तीफा देने को मजबूर होंगे। ग्राम पंचायत बूढनपुर, चकदादर, मैनपुर ग्राम के प्रधान ने तो सार्वजनिक रूप से पद छोड़ने तक की बात कह दी है।
सूत्रों के मुताबिक, जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा डीएम को भेजे गए पत्र के आधार पर खंड विकास अधिकारी को निर्देश जारी किए गए हैं, कि संबंधित ग्राम विकास अधिकारी को पंचायत सचिव के रूप में तैनात कर समस्त अभिलेखों का चार्ज लेकर विकास कार्य सुनिश्चित कराए जाएं। यानी एक तरफ ग्रामीण और प्रधान विरोध में खड़े हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक आदेश उनकी तैनाती की ओर इशारा कर रहे हैं। यही वजह है कि गांव में रोजाना तनाव का माहौल बना हुआ है।
फिलहाल, मामला तूल पकड़ चुका है, और प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है।










