Varanasi : वाराणसी में रविवार को अंतरराष्ट्रीय मुद्दे को लेकर नागरिक समाज की आवाज सुनाई दी। शहर के अंबेडकर पार्क, कचहरी परिसर में सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने एक दिवसीय मौन उपवास और धरना आयोजित किया। यह कार्यक्रम साझा संस्कृति मंच के आह्वान पर आयोजित हुआ, जिसमें लोगों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई का विरोध करते हुए विश्व शांति की अपील की। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने मौन रहकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया और युद्ध की बजाय संवाद के रास्ते पर जोर दिया।
शांति वार्ता के बीच हमले पर जताई नाराजगी

धरने के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ओमान की मध्यस्थता में शांति वार्ता चल रही थी, ऐसे समय में बिना औपचारिक युद्ध घोषणा के ईरान पर सैन्य कार्रवाई चिंताजनक है। मंच से यह भी कहा गया कि ईरान के राष्ट्रीय और धार्मिक नेतृत्व को निशाना बनाने और स्कूल-अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थलों पर हमलों की खबरें मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की ओर संकेत करती हैं।
वक्ताओं के अनुसार, ऐसे कदम न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी खतरा बन सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी उठे सवाल
कार्यक्रम के दौरान कई वक्ताओं ने वैश्विक राजनीति में बढ़ती सैन्य और आर्थिक दखलअंदाजी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ देशों पर सैन्य दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और राजनीतिक हस्तक्षेप की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि वेनेजुएला जैसे देशों के खिलाफ दबाव की नीति और अन्य क्षेत्रों में रणनीतिक नियंत्रण की कोशिशें अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ मानी जा रही हैं। वक्ताओं ने इसे वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन के लिए चुनौती बताया।
भारत की विदेश नीति पर भी हुई चर्चा
धरना स्थल पर वक्ताओं ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को मजबूत बनाए रखने की जरूरत पर भी बल दिया। उनका कहना था कि किसी भी तरह के बाहरी दबाव से देश की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक हितों और आर्थिक स्वायत्तता पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत को अपनी कूटनीतिक परंपरा के अनुरूप संतुलित और स्वतंत्र रुख बनाए रखना चाहिए, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की भूमिका मजबूत बनी रहे।
स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों की याद दिलाई
साझा संस्कृति मंच के वक्ताओं ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष और विविधता में एकता का प्रतीक रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू की उस सोच को याद किया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और मानवता को सर्वोपरि माना गया था। वक्ताओं ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह विश्व शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रमज़ान के महीने में शांति की प्रार्थना
आयोजकों ने कहा कि रमज़ान जैसे पवित्र महीने में दुनिया के किसी हिस्से में हिंसा होना मानवता के लिए पीड़ादायक है। इसी भावना के साथ वाराणसी के नागरिक शांति, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देने के लिए एकत्र हुए। कार्यक्रम में लोगों ने मौन रखकर वैश्विक शांति और युद्धविराम की कामना की।
धरना-प्रदर्शन में शहर के कई सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक शामिल हुए। प्रमुख रूप से उपस्थित लोगों में शामिल रहे: फादर आनंद, जागृति राही, डॉ. आनंद प्रकाश तिवारी, रामजी प्रसाद गुप्ता, विशाल तिवारी, गीता देवी, ममता, जितेंद्र यादव, रवि शेखर, एकता सिंह, अनामिका, एडवोकेट अबु हाशमी, एडवोकेट लोकेश कुमार सिंह, एडवोकेट अब्दुला खालिद, जुबेर खान बागी, राजकुमार गुप्ता, सुरेंद्र चरन सहित कई अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए।










