IRGC: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। अमेरिका और इजरायल के लगातार हमलों से ईरान की सेना और लीडरशिप को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन ईरान न झुका है और न ही टूटा। बल्कि अब वह पहले से ज्यादा आक्रामक हो गया है। खासकर इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बसिज फोर्स को “रक्तबीज” की तरह देखा जा रहा है – मतलब जहां एक लड़ाका मरता है, वहां तुरंत नया और ज्यादा घातक लड़ाका तैयार हो जाता है। अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे जा चुके हैं, लेकिन ईरान का सिस्टम व्यक्ति पर नहीं, बल्कि संस्था पर टिका है। इसलिए हर मौत के बाद नई कमान और नए फाइटर उभर आते हैं।
बड़े-बड़े नेताओं की मौत, लेकिन सिस्टम नहीं रुका
इस जंग में ईरान को भारी झटका लगा है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो चुकी है, उनकी जगह उनके बेटे मोज्तबा खामेनेई ने ले ली है, जो कथित तौर पर पिता से भी ज्यादा सख्त और हमलावर हैं। आर्म्ड फोर्स चीफ अब्दुल रहीम मौसवी, रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह, IRGC के कई कमांडर जैसे मोहम्मद पकपुर और बसिज के कमांडर घोलामरेज़ा सोलेमानी भी मारे गए। नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के मुखिया अली लारिजानी और अली शामखानी की भी मौत हुई। इन हमलों में IRGC की एलीट यूनिट्स, इंटेलिजेंस अधिकारी और पुलिस के बड़े अफसर भी नहीं बचे।

लेकिन इन मौतों से ईरान का सिस्टम डगमगाया नहीं। नई लीडरशिप तुरंत सामने आ गई। IRGC ने अपनी रैंकिंग्स में नए कमांडर भर लिए, जो बदले की भावना से भरे हैं और सीधे हमलों पर यकीन रखते हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा, “ईरान में कोई भी मरेगा तो दूसरा उसकी जगह ले लेगा। अगर मैं भी मारा जाता हूं तो कोई नया विदेश मंत्री बन जाएगा, लेकिन ईरान कभी नहीं झुकेगा। एक आदमी के जाने से सिस्टम नहीं टूटता।”
IRGC और बसिज: क्या ये ईरान की रीढ़ की हड्डी हैं
IRGC ईरान की सबसे ताकतवर और कट्टर सेना है। यह सिर्फ बाहर के दुश्मनों से नहीं लड़ती, बल्कि अंदरूनी सुरक्षा भी संभालती है। बसिज इसका पैरामिलिट्री विंग है, जो आम लोगों से भर्ती होता है और विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में माहिर है। ये दोनों फोर्सेस अब जंग के मैदान में “ब्लडबाथ” का शिकार बन रही हैं। इजरायल और अमेरिका के हमलों में हजारों IRGC और बसिज के सदस्य मारे जा चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जंग शुरू होने से अब तक 6,000 से ज्यादा IRGC सदस्य मारे गए और 15,000 घायल हुए हैं।
फिर भी ईरान की खासियत यह है कि मौतें रुकवाती नहीं, बल्कि भर्ती बढ़ाती हैं। हर मारे गए कमांडर की जगह नया आता है, जो ज्यादा आक्रामक होता है। पिछले 20 सालों में ईरान ने अपना सिस्टम इतना मजबूत बनाया कि कोई भी मरे, दूसरा तैयार है। बसिज जैसे लाखों सदस्यों का रिजर्व है, जो जरूरत पड़ने पर सामने आ जाते हैं।
जंग का भविष्य: लंबी लड़ाई या सरेंडर?
अब सवाल यह है कि यह जंग कब तक चलेगी? दो रास्ते दिख रहे हैं:
- अमेरिका-इजरायल लगातार ईरानी जनरल्स को मारते रहें, जब तक ईरान सरेंडर न कर दे।
- या फिर ग्राउंड फोर्स भेजी जाए, जो वियतनाम, इराक या अफगानिस्तान जैसी फंस सकती है।
लंबी जंग से तेल-गैस का संकट बढ़ेगा, कीमतें आसमान छू लेंगी और तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडराएगा। ईरान अब ज्यादा हमलावर हो गया है। उसके ड्रोन और मिसाइल पड़ोसी देशों तक पहुंच रहे हैं। IRGC की नई लीडरशिप बदला लेने पर तुली है।
ट्रंप प्रशासन ने IRGC सदस्यों से हथियार डालने की अपील की है, इम्यूनिटी देने का वादा किया, लेकिन ईरान के लोग और फोर्सेस इसे नहीं मान रहे। बसिज और IRGC सड़कों पर तैनात हैं, विरोध को कुचल रहे हैं और जंग जारी रखने का ऐलान कर रहे हैं।
ईरान बोला हम कभी नहीं झुकेंगे
ईरान का पूरा सिस्टम अब IRGC के कंट्रोल में ज्यादा दिख रहा है। मोज्तबा खामेनेई की कमान में नई पॉलिसी और सख्त होगी। अंदरूनी विरोध को भी कुचला जा रहा है। लेकिन ईरान की जनता और फोर्सेस में एक बात साफ है – मौतें उन्हें कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बना रही हैं। हर रक्त की बूंद से नया लड़ाका पैदा हो रहा है।










