रायबरेली जिले में जीएसटी (GST) विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होती जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी लग्जरी बस संचालकों से नियमित रिश्वत (हफ्ता-महीना) वसूलते हैं और बदले में दिल्ली-रायबरेली रूट पर चलने वाली बसों से अवैध रूप से लाए जा रहे लाखों रुपये के मोबाइल फोन व अन्य महंगे सामान पर कोई कार्रवाई नहीं करते, जो बस संचालक रिश्वत देने में कोताही बरतते हैं, उसी पर जीएसटी टीम छापेमारी कर कार्रवाई कर देती है। यह भ्रष्टाचार का ऐसा सिलसिला है जो न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि ईमानदार व्यापारियों और बस संचालकों के लिए भी मुसीबत बन गया है।
जानकारों का कहना है कि रायबरेली से दिल्ली जाने वाली लग्जरी बसें हर महीने नियमित रूप से हजारों मोबाइल फोन, टैबलेट, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान लेकर आती हैं। इनमें ध्रुव बस, आईटीसी और अन्य प्रमुख लग्जरी बस संचालक शामिल हैं। ये सामान बिना किसी जीएसटी चालान या वैध दस्तावेज के अवैध रूप से लाया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि एक बस में औसतन 10-15 लाख रुपये तक का सामान आता है। पूरे महीने में यह आंकड़ा कई करोड़ तक पहुंच जाता है।

विभाग के अंदरूनी सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “बस संचालक हर महीने निश्चित रकम विभाग के कुछ अधिकारियों को ‘हफ्ता’ देते हैं। इस रिश्वत के बदले बसों की चेकिंग नहीं होती। मोबाइल और अन्य सामान बिना किसी रुकावट के उतर जाता है। लेकिन अगर कोई बस संचालक हफ्ता देने में चूक जाता है तो उसी दिन या अगले दिन जीएसटी टीम बस स्टैंड पर पहुंच जाती है और पूरे सामान को जब्त कर लिया जाता है।”
इस पूरे प्रकरण में सबसे चिंताजनक बात यह है कि जीएसटी विभाग का काम अवैध वसूली और चोरी-छिपे सामान पर नजर रखना है, लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। रिश्वतखोर अधिकारी उन बसों को छोड़ देते हैं जिनसे उन्हें मासिक कमाई हो रही है, जबकि ईमानदार संचालकों पर सख्ती की जा रही है। इससे न केवल राज्य और केंद्र सरकार को जीएसटी राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि छोटे व्यापारी भी बाजार में सस्ता अवैध सामान आने के कारण परेशान हैं।
स्थानीय व्यापारियों ने भी इस भ्रष्टाचार पर आक्रोश जताया है। एक मोबाइल व्यापारी ने बताया, “हम वैध चालान पर माल खरीदते हैं और पूरा टैक्स देते हैं। लेकिन ये बसें बिना टैक्स के सस्ता माल लाकर बाजार बिगाड़ रही हैं। विभाग जानबूझकर आंखें बंद किए हुए है क्योंकि उन्हें हफ्ता मिल रहा है।”
जिला प्रशासन और जीएसटी कमिश्नरेट को इस मामले की जानकारी दी गई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। सूत्रों का कहना है कि अगर उच्च स्तर से जांच नहीं हुई तो यह भ्रष्टाचार और बढ़ेगा।
रायबरेली के आम नागरिक अब सवाल कर रहे हैं — क्या जीएसटी विभाग का काम रिश्वत वसूलना है या टैक्स चोरी रोकना? क्या बस संचालकों से हफ्ता लेने वाले अधिकारी ही इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड हैं?
यह खबर रायबरेली सहित पूरे अवध क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। अगर उच्च अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान नहीं लिया तो यह भ्रष्टाचार का बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।










