Petrol-Diesel Price Hike: देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर बड़ा असर डाला है। बीते कुछ दिनों में कई बार ईंधन के दाम बढ़ चुके हैं, जिससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है। इसी बीच चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने केंद्र सरकार से बड़ी मांग की है। संगठन ने कहा है कि पेट्रोल और डीजल के दाम 10 से 15 रुपये प्रति लीटर कम से कम तक घटाए जाने चाहिए, जिससे कि आम जनता को राहत मिल सके।
CTI ने पेट्रोलियम मंत्री को लिखा पत्र
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri को पत्र लिखकर कहा है कि देशभर में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और इसका असर सीधे आम लोगों और व्यापार पर पड़ रहा है।

उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों की आपात बैठक बुलाए और अगले तीन महीनों तक पेट्रोल और डीजल पर फ्लैट 5 प्रतिशत VAT लागू किया जाए। उनका कहना है कि ऐसा करने से लोगों को प्रति लीटर 10 से 15 रुपये तक राहत मिल सकती है।
चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
रिपोर्ट के मुताबिक देश में लगातार चौथी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। इसी कारण सरकारी तेल कंपनियां दाम बढ़ा रही हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में अब तक पेट्रोल करीब 7 से 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल लगभग 8 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है। दिल्ली में पेट्रोल का दाम 102 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है, जबकि डीजल भी 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है।
महंगाई बढ़ने का खतरा
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि ईंधन की कीमतें बढ़ने का असर केवल वाहन चलाने वालों पर नहीं पड़ता, बल्कि हर चीज महंगी हो जाती है। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजों, सब्जियों, दवाइयों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी असर पड़ता है।
CTI का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं दी गई तो छोटे व्यापारी, ट्रांसपोर्टर और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। संगठन ने कहा कि पहले ही बाजार में मांग कमजोर है और अब बढ़ती महंगाई से कारोबार पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव है। खासतौर पर ईरान से जुड़े हालात और समुद्री मार्गों पर असर पड़ने से तेल सप्लाई प्रभावित हुई है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है तो उसका असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई देता है।
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि वे लंबे समय से नुकसान झेल रही थीं और अब धीरे-धीरे कीमतों में बढ़ोतरी करके उस नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की जा रही है।
पहले भी सरकार घटा चुकी है एक्साइज ड्यूटी
इससे पहले मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि उस समय इसका सीधा फायदा ग्राहकों को नहीं मिला, क्योंकि सरकार ने उस राहत का इस्तेमाल तेल कंपनियों के नुकसान को कम करने के लिए किया था।
अब व्यापारिक संगठनों का कहना है कि इस बार सीधे उपभोक्ताओं को राहत दी जानी चाहिए, ताकि महंगाई पर कुछ नियंत्रण हो सके।
विपक्ष ने भी सरकार को घेरा
ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती कीमतों से आम जनता परेशान है और सरकार तेल कंपनियों के फायदे को प्राथमिकता दे रही है।
विपक्ष का कहना है कि दुनिया के कई देश अपने नागरिकों को राहत देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि भारत में लगातार कीमतें बढ़ रही हैं।
आम जनता की चिंता बढ़ी
पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने से आम लोगों का मासिक बजट बिगड़ने लगा है। खासकर रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोग और छोटे व्यापारी ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में ईंधन की कीमतें पहले ही काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि सरकार जल्द कोई राहत भरा फैसला ले सकती है।
अब सरकार के फैसले पर नजर
फिलहाल सभी की नजर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के अगले कदम पर टिकी है। यदि VAT में कटौती या टैक्स राहत दी जाती है तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम कम हो सकते हैं।










