भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देशभर के करोड़ों कर्जधारकों, निवेशकों और बैंकिंग सेक्टर की नजरें जिस फैसले पर टिकी थीं, उसका ऐलान कर दिया है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखने का फैसला किया है। यानी फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
आरबीआई का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। इन परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया। इस फैसले के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि इसका असर आम लोगों, बैंक ग्राहकों और विभिन्न प्रकार के लोन पर क्या पड़ेगा।

क्या है रेपो रेट और क्यों होती है इसकी इतनी चर्चा?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक देश के बैंकों को कर्ज देता है। जब बैंकों को पैसों की जरूरत होती है तो वे आरबीआई से उधार लेते हैं। इसके बदले उन्हें एक निश्चित ब्याज देना पड़ता है। इसी ब्याज दर को रेपो रेट कहा जाता है।
अगर आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है। ऐसे में बैंक भी ग्राहकों को महंगे ब्याज पर लोन देना शुरू कर सकते हैं।
वहीं अगर रेपो रेट घटता है तो बैंकों को सस्ता पैसा मिलता है और वे ग्राहकों को भी कम ब्याज दर पर कर्ज दे सकते हैं। इसी कारण रेपो रेट में होने वाला हर बदलाव सीधे आम लोगों की जेब पर असर डालता है।
MPC की बैठक में क्या फैसला लिया गया?
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने कई अहम आर्थिक पहलुओं पर चर्चा करने के बाद रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया।
समिति ने घरेलू आर्थिक स्थिति, महंगाई की दर, वैश्विक बाजारों की स्थिति और आने वाले समय की संभावनाओं की समीक्षा की।
लंबी चर्चा के बाद यह तय किया गया कि फिलहाल ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव करना उचित नहीं होगा। इसलिए रेपो रेट को यथावत रखने का निर्णय लिया गया।
EMI भरने वालों को क्या राहत मिलेगी?
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनके होम लोन, कार लोन या अन्य फ्लोटिंग रेट वाले लोन चल रहे हैं।
अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी की जाती, तो बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋणों की ब्याज दरें भी बढ़ सकती थीं, जिससे ग्राहकों की EMI पर अतिरिक्त बोझ पड़ता।
लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल लोन धारकों की मासिक किस्तों में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। यानी जो लोग पहले जितनी EMI भर रहे हैं, उन्हें अभी उसी के आसपास भुगतान करना पड़ सकता है।
होम लोन लेने वालों के लिए क्या मतलब है यह फैसला?
घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेपो रेट स्थिर रहने से होम लोन की ब्याज दरों में तत्काल किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।बैंक अपनी नीतियों के अनुसार दरों में कुछ छोटे बदलाव कर सकते हैं, लेकिन आरबीआई के फैसले के बाद फिलहाल कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिलेगा। इससे नए और पुराने दोनों तरह के होम लोन ग्राहकों को स्थिरता का संकेत मिला है।
कार लोन और पर्सनल लोन पर भी नजर
केवल होम लोन ही नहीं, बल्कि कार लोन, एजुकेशन लोन और पर्सनल लोन पर भी रेपो रेट का प्रभाव पड़ता है।जब केंद्रीय बैंक दरों में बदलाव करता है तो उसका असर धीरे-धीरे बैंकिंग सेक्टर के अन्य उत्पादों पर भी दिखाई देता है। लेकिन इस बार रेपो रेट स्थिर रहने के कारण इन क्षेत्रों में भी तत्काल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं मानी जा रही।
महंगाई पर क्यों बनी हुई है RBI की नजर?
आरबीआई का सबसे बड़ा उद्देश्य कीमतों को नियंत्रण में रखना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना होता है। अगर महंगाई बहुत तेजी से बढ़ती है तो लोगों की क्रय शक्ति प्रभावित होती है। वहीं अगर आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ती हैं तो विकास दर पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से केंद्रीय बैंक लगातार इन दोनों पहलुओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। रेपो रेट पर लिया गया हर फैसला इसी रणनीति का हिस्सा माना जाता है।
वैश्विक हालात भी बने फैसले का आधार
आरबीआई केवल घरेलू परिस्थितियों को देखकर ही निर्णय नहीं लेता। दुनिया के कई देशों की आर्थिक स्थिति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल की कीमतें और वैश्विक बाजारों में चल रहे उतार-चढ़ाव भी फैसलों को प्रभावित करते हैं। हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई आर्थिक चुनौतियां देखने को मिली हैं। ऐसे में आरबीआई ने सतर्क रुख अपनाते हुए दरों में कोई बदलाव नहीं किया।
इस फैसले पर शेयर बाजार और बैंकिंग सेक्टर की खास नजर बनी हुई थी
आरबीआई की हर मौद्रिक नीति बैठक पर शेयर बाजार और बैंकिंग सेक्टर की खास नजर रहती है।निवेशक यह जानना चाहते हैं कि केंद्रीय बैंक भविष्य में किस दिशा में कदम बढ़ा सकता है।इसी कारण रेपो रेट से जुड़ी घोषणाएं केवल बैंकिंग क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे वित्तीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
आरबीआई गवर्नर ने की फैसले की घोषणा
मौद्रिक नीति समिति की बैठक पूरी होने के बाद आरबीआई गवर्नर ने फैसले की जानकारी सार्वजनिक की।घोषणा के साथ यह स्पष्ट कर दिया गया कि फिलहाल रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर ही बनी रहेगी।इसके साथ ही बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को यह संकेत मिला कि केंद्रीय बैंक मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
फिलहाल नहीं बदलेगी ब्याज दरों की तस्वीर
आरबीआई के ताजा फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल ब्याज दरों के मोर्चे पर कोई बड़ा बदलाव नहीं होने जा रहा है।
रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने के फैसले का मतलब है कि बैंकिंग सेक्टर और कर्ज लेने वाले लोगों के लिए मौजूदा स्थिति बनी रहेगी। इसी वजह से इस बार की मौद्रिक नीति बैठक का सबसे बड़ा संदेश स्थिरता को माना जा रहा है।










