Delhi Jal Board Tender Scam: दिल्ली जल बोर्ड टेंडर घोटाले में सत्येंद्र जैन समेत 6 गिरफ्तार, जानें क्या है पूरा मामला

Delhi Jal Board Tender Scam में सत्येंद्र जैन समेत 6 गिरफ्तार। जानिए STP टेंडर की शर्तों, कथित रिश्वत, मनी ट्रेल और AAP-BJP विवाद की पूरी मामला।

Delhi Jal Board Tender Scam: दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े कथित टेंडर घोटाले में एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की कार्रवाई ने दिल्ली की राजनीति को गरमा दिया है। पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपों का केंद्र सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के अपग्रेडेशन से जुड़े टेंडर हैं, जिनमें जांच एजेंसी ने नियमों को कथित तौर पर एक खास कंपनी के पक्ष में मोड़ने का आरोप लगाया है।

11 मई 2024 को दर्ज हुई थी FIR

ACB के मुताबिक, दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर 11 मई 2024 को FIR दर्ज की गई थी। मामला दिल्ली जल बोर्ड के STP की क्षमता बढ़ाने और उन्हें अपग्रेड करने के लिए जारी टेंडरों से जुड़ा है। जांच एजेंसी अब इसी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, आपराधिक साजिश और पैसों के लेनदेन की कड़ियां जोड़ रही है।

टेंडर की शर्तों पर क्यों उठे सवाल?

ACB की जांच के मुताबिक, टेंडर की तकनीकी और पात्रता शर्तें ऐसी रखी गईं, जिनसे कथित तौर पर M/s Eurotech Environmental Private Limited को फायदा पहुंच सकता था। जांच में तकनीक और मीडिया से जुड़ी प्रतिबंधात्मक शर्तों, प्रस्तावित पायलट स्टडी नहीं कराए जाने और ट्रीटेड पानी की गुणवत्ता से संबंधित कुछ पैरामीटर हटाने जैसे बिंदुओं की पड़ताल की गई है।

यानी विवाद सिर्फ टेंडर मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि टेंडर की शर्तें किसने तैयार कीं, उनमें बदलाव कैसे हुए और किन अधिकारियों ने उन्हें मंजूरी दी।

6 आरोपियों में कौन-कौन शामिल?

सत्येंद्र जैन के अलावा पूर्व IAS अधिकारी और दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO उदित प्रकाश राय को भी गिरफ्तार किया गया है। इनके साथ पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव तथा निजी क्षेत्र से जुड़े नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा को भी हिरासत में लिया गया है।

जांच एजेंसी के सामने अब बड़ा सवाल यह है कि टेंडर तैयार होने से लेकर उसे मंजूरी मिलने तक किसकी क्या भूमिका रही।

1.52 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन की जांच

ACB कथित रिश्वत और कमीशन के पैसों के रास्ते की भी जांच कर रही है। एजेंसी के अनुसार, अलग-अलग कंपनियों और फर्मों के माध्यम से रकम को आगे बढ़ाने के संकेत मिले हैं। जांच में करीब 1.52 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत के लेनदेन का भी जिक्र सामने आया है।

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय पहले ही DJB STP टेंडर मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर चुका है। ED ने दिसंबर 2025 में अपनी अभियोजन शिकायत में आरोप लगाया था कि टेंडर की शर्तों को कथित तौर पर इस तरह बदला गया कि Euroteck को तकनीकी फायदा मिले और करीब 6.73 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमीशन/रिश्वत का भुगतान हुआ।

1,943 करोड़ रुपये के टेंडर भी जांच के घेरे में

ED के मुताबिक, 2022 में दिल्ली जल बोर्ड के STP से जुड़े चार पैकेजों के टेंडर करीब 1,943 करोड़ रुपये के थे। इन परियोजनाओं में पप्पनकलां, निलोठी, नजफगढ़, केशवपुर, कोरोनेशन पिलर, नरेला, रोहिणी और कोंडली समेत कई STP शामिल थे।

यही वजह है कि जांच में सिर्फ व्यक्तिगत लेनदेन ही नहीं, बल्कि पूरे टेंडर सिस्टम और सरकारी खजाने पर पड़े संभावित असर को भी देखा जा रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से खुलेंगे कई राज

ACB ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया है। एजेंसी कथित तौर पर टेंडर की शर्तों, करिजेंडम और उससे संबंधित बातचीत के डिजिटल रिकॉर्ड को वित्तीय लेनदेन से जोड़कर देख रही है। दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों के मिलान से यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि कथित तौर पर पूरी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी।

18 अगस्त को पूछताछ के बाद गिरफ्तारी

ACB ने 18 अगस्त 2026 को पूछताछ के बाद छह आरोपियों की गिरफ्तारी की। अब जांच एजेंसी कथित मनी ट्रेल, संपत्तियों और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

गिरफ्तारी पर AAP ने उठाए सवाल

सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद AAP ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया है। अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए गिरफ्तारी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। पार्टी नेता संजय सिंह ने भी कार्रवाई को पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।

दूसरी ओर, बीजेपी ने AAP के आरोपों को खारिज किया है और जांच में सामने आए कथित मनी ट्रेल को कार्रवाई का आधार बताया है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। ACB की जांच में टेंडर की शर्तों, कथित रिश्वत, बैंक खातों, डिजिटल साक्ष्यों और संपत्तियों की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। आने वाले दिनों में पूछताछ और दस्तावेजी जांच से मामले में और नाम सामने आने की संभावना है।

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