Raebareli: लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरते हुए बुधवार को पीपलेश्वर चुरुवा हनुमान मंदिर में उस समय श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई, जब प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी और स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ मंदिर पहुंचे। तीनों नेताओं ने मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन किया और पवन पुत्र हनुमान की आरती कर आशीर्वाद लिया।
शिव महापुराण कथा में शामिल होने निकले थे मंत्री

बताया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोज पांडेय की ओर से आयोजित पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा में शामिल होने के लिए उपमुख्यमंत्री समेत तीनों मंत्री लखनऊ से ऊंचाहार की ओर रवाना हुए थे। कथा स्थल चड़रई टोल प्लाजा के पास निर्धारित था। इसी दौरान रास्ते में प्रसिद्ध चुरुवा हनुमान मंदिर पहुंचकर उन्होंने पूजा-अर्चना की।
मंदिर में कुछ देर रुके, की आरती
मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद मंत्रियों ने हनुमान जी के समक्ष शीश नवाया। पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने आरती में भी हिस्सा लिया। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भी उत्साह देखने को मिला। मंत्रियों ने मंदिर की धार्मिक महत्ता के बारे में जानकारी भी ली और कुछ समय परिसर में रुकने के बाद कथा स्थल के लिए रवाना हुए।
स्थानीय लोगों ने किया सम्मान
मंदिर में मौजूद आलोक अवस्थी, प्रदीप सिंह और अंकुर त्रिपाठी ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी और राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ का स्वागत किया। इस अवसर पर अतिथियों को प्रतीक चिह्न और अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। स्थानीय लोगों ने मंदिर पहुंचने पर मंत्रियों का आभार जताया।
धार्मिक आयोजन में जुटे हैं श्रद्धालु
ऊंचाहार क्षेत्र में आयोजित शिव महापुराण कथा को लेकर पहले से ही श्रद्धालुओं में उत्साह है। पंडित प्रदीप मिश्रा के प्रवचन सुनने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से लोग पहुंच रहे हैं। इसी धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए प्रदेश सरकार के कई प्रमुख मंत्री भी कार्यक्रम स्थल की ओर रवाना हुए थे।
चुरुवा हनुमान मंदिर की बनी अलग पहचान
लखनऊ-प्रयागराज मार्ग पर स्थित पीपलेश्वर चुरुवा हनुमान मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। राजमार्ग से गुजरने वाले लोग भी यहां रुककर हनुमान जी के दर्शन करते हैं। मंत्रियों का मंदिर पहुंचना भी इसी धार्मिक यात्रा का हिस्सा रहा, जहां उन्होंने विधिवत पूजा कर पवन पुत्र का आशीर्वाद लिया।










