धनबाद स्थित सीआईएसएफ (CISF) यूनिट में कथित वित्तीय अनियमितता के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की धनबाद इकाई ने सीआईएसएफ के दो पूर्व अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। एफआईआर में तत्कालीन उप समादेष्टा ओम कुमार तंवर और तत्कालीन लेडी इंस्पेक्टर राज लक्ष्मी वर्मा को आरोपी बनाया गया है।
आधिकारिक जिम्मेदारी के दौरान अनियमितता का आरोप

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि धनबाद में पदस्थापना के दौरान दोनों अधिकारियों ने अपने सरकारी दायित्वों से जुड़े मामलों में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की। सीबीआई ने प्रथम दृष्टया इसे सरकारी पद का इस्तेमाल करते हुए अनुचित लाभ हासिल करने की कोशिश से जोड़कर देखा है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायत के साथ पेन ड्राइव भी सौंपी गई
मामले में शिकायतकर्ता की ओर से सीबीआई को आरोपों से संबंधित एक पेन ड्राइव उपलब्ध कराई गई थी। बताया गया है कि इस पेन ड्राइव में तीन ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद थीं। जांच के दौरान इन रिकॉर्डिंग को भी साक्ष्य के तौर पर देखा गया। सीबीआई की प्राथमिकी में दावा किया गया है कि रिकॉर्डिंग में अधिकारियों की आवाज होने की बात सामने आई है।
रिश्वत और अनुचित लाभ लेने की कोशिश का आरोप
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, प्रारंभिक जांच में दोनों अधिकारियों पर अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के बदले रिश्वत या अनुचित लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप है। इसके साथ ही मामले में आपराधिक साजिश में शामिल होने की आशंका भी दर्ज की गई है। एजेंसी अब उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्डिंग और अन्य तथ्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाएगी।
वर्तमान में अलग-अलग स्थानों पर तैनाती
मामले में नामजद दोनों अधिकारियों की वर्तमान पदस्थापना धनबाद से अलग स्थानों पर बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ओम कुमार तंवर वर्तमान में आठवीं रिजर्व बटालियन, जयपुर में पदस्थापित हैं। वहीं राज लक्ष्मी वर्मा की तैनाती तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन (TTPS), ललपनियां में बताई गई है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
सीबीआई की ओर से प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद अब जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कथित वित्तीय अनियमितता किस स्तर पर हुई, इसमें किन लोगों की भूमिका थी और ऑडियो रिकॉर्डिंग समेत उपलब्ध साक्ष्यों का मामले से क्या संबंध है। फिलहाल प्राथमिकी में लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।










