Shiva Sharma Murder Case: राजधानी लखनऊ के चर्चित शिवा शर्मा हत्याकांड की जांच में नए दावे सामने आ रहे हैं। मामले में नामजद श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और चालक की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। वहीं, अलीगंज निवासी 25 हजार रुपये के इनामी बताए जा रहे ऋषभ राय का नाम भी इस मामले से जोड़कर चर्चा में है। सूत्रों के हवाले से श्रद्धा दुबे और ऋषभ राय के बीच करीबी संबंध होने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
शिवा को धमकी मिलने का दावा

मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ऋषभ राय ने पूर्व में जेल में रहने के दौरान शिवा शर्मा को कथित तौर पर धमकी दी थी। दावा है कि शिवा ने इस संबंध में पुलिस को प्रार्थना पत्र भी दिया था। यदि इस शिकायत की पुष्टि होती है तो यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन सकता है। पुलिस को कथित शिकायत, धमकी की परिस्थितियों और संबंधित व्यक्तियों के बीच संपर्क की जांच करनी होगी। फिलहाल, इस संबंध में पुलिस का विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
श्रद्धा और रश्मि की तलाश में दबिश
शिवा शर्मा की मौत के मामले में उसकी मां की शिकायत पर श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे, आदिल और तारिक उर्फ दानिश के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। अब आरोपियों की तलाश में पुलिस की कार्रवाई जारी है। सूत्रों के अनुसार, श्रद्धा, रश्मि और चालक से जुड़े ठिकानों पर दबिश देकर उनकी तलाश की जा रही है। हालांकि, किसी आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रायबरेली के रमजीपुरम से जुड़ा मामला
बताया जा रहा है कि श्रद्धा दुबे का संबंध रायबरेली के शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित रमजीपुरम से है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उसने रायबरेली के एक निजी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की थी। उसके पारिवारिक परिवेश को लेकर भी विभिन्न जानकारियां सामने आ रही हैं, लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
जांच के बाद खुलेगा राज
गौरतलब है कि लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद चिकन कारोबारी शिवा शर्मा की मौत हो गई थी। मृतक की मां ने इसे हत्या बताते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अब इस प्रकरण में कथित धमकी, ऋषभ राय का नाम और आरोपियों की तलाश जैसे पहलुओं पर सबकी निगाहें टिकी हैं। हालांकि, श्रद्धा दुबे को दोषी ठहराना अभी उचित नहीं होगा। मामले की वास्तविकता पुलिस जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।










