Raebareli: स्नातक एवं शिक्षक एमएलसी चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी क्रम में हरचंदपुर विधानसभा के विधायक राहुल लोधी ने भाजपा सरकार और निर्वाचित प्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए स्नातक युवाओं तथा शिक्षकों की लंबित समस्याओं का हिसाब मांगा है। उन्होंने रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, लंबित भर्तियों, पुरानी पेंशन, वेतन विसंगतियों और शिक्षामित्रों के मानदेय जैसे मुद्दों पर सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग उठाई।
राहुल लोधी ने सवाल किया कि जब प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आईं, भर्तियां लंबे समय तक लंबित रहीं और युवा रोजगार के लिए संघर्ष करते रहे, तब इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सरकार ने कौन से ठोस कदम उठाए? उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इन गंभीर सवालों पर केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सरकार को अपनी कार्ययोजना और उसके परिणाम भी जनता के सामने रखने चाहिए।

उन्होंने स्नातक युवाओं के रोजगार के अवसरों को लेकर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि युवाओं के लिए कितने नए रोजगार के अवसर सृजित किए गए, लंबित भर्तियों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए गए और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई है।
पुरानी पेंशन और शिक्षकों की समस्याओं पर मांगा जवाब
शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए राहुल लोधी ने पुरानी पेंशन की बहाली, वेतन विसंगतियों, सेवा सुरक्षा और शिक्षामित्रों के मानदेय जैसे विषयों पर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल किया कि इन समस्याओं के समाधान के लिए अब तक क्या निर्णय लिए गए हैं और संबंधित मांगों को पूरा करने के लिए सरकार की आगे की योजना क्या है।
उन्होंने कहा कि स्नातक और शिक्षक वर्ग की समस्याएं केवल चुनावी मुद्दे नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध युवाओं के भविष्य, शिक्षकों के सम्मान और उनकी आर्थिक एवं सेवा संबंधी सुरक्षा से है। ऐसे में इन विषयों पर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
चुनाव के समय नहीं, पूरे कार्यकाल में निभानी चाहिए जिम्मेदारी
राहुल लोधी ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता के प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल चुनाव के दौरान मतदाताओं के बीच पहुंचने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें पूरे कार्यकाल में स्नातकों और शिक्षकों की समस्याओं को सदन में उठाना चाहिए तथा उनके अधिकारों के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उन सवालों का तथ्यात्मक एवं स्पष्ट जवाब दे। जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके हितों से जुड़े मुद्दों पर कितनी प्रगति हुई और लंबित समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए।
घोषणाओं के बजाय धरातल पर काम का हिसाब दे सरकार
राहुल लोधी ने कहा कि स्नातक युवाओं और शिक्षकों को रोजगार, सम्मान, सेवा सुरक्षा तथा अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब और समयबद्ध कार्रवाई की जरूरत है। सरकार को घोषणाओं और आश्वासनों से आगे बढ़कर धरातल पर किए गए कार्यों का पूरा हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए।
स्नातक एवं शिक्षक एमएलसी चुनाव के मद्देनजर उठाए गए इन सवालों के जरिए उन्होंने रोजगार, भर्ती प्रक्रिया और शिक्षकों की समस्याओं को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि इन मुद्दों पर भाजपा सरकार और संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से क्या जवाब दिया जाता है तथा लंबित समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।










