State Foundation Day: भारत के इतिहास में 1 नवंबर की तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। यह दिन देश के छह राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक और केरल के लिए स्थापना दिवस के रूप में खास पहचान रखता है। इन राज्यों का गठन अलग-अलग ऐतिहासिक और प्रशासनिक परिस्थितियों में हुआ, लेकिन एक नवंबर से इन सभी का विशेष संबंध जुड़ा हुआ है। इस दिन संबंधित राज्यों में सरकारी समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कई विशेष आयोजन किए जाते हैं।
आजादी के बाद क्यों उठी नए राज्यों की मांग?

1947 में देश की आजादी के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करना था। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और क्षेत्रीय पहचान वाले इलाकों को बेहतर प्रशासन देने के लिए राज्यों की सीमाओं के पुनर्गठन की मांग उठने लगी। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया। आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 लागू किया गया। 1 नवंबर 1956 को भारत के राजनीतिक नक्शे में बड़ा बदलाव हुआ और कई राज्यों को नया स्वरूप मिला।
मध्य प्रदेश: 1956 में मिला नया स्वरूप
मध्य प्रदेश का इतिहास भी एक नवंबर से जुड़ा हुआ है। 1 नवंबर 1956 को राज्य का पुनर्गठन किया गया और इसे वर्तमान स्वरूप के करीब लाया गया। भोपाल को इसकी राजधानी बनाया गया। विभिन्न क्षेत्रों को मिलाकर बने इस राज्य ने अपनी अलग सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान विकसित की। इसके बाद वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश के एक हिस्से को अलग कर छत्तीसगढ़ राज्य बनाया गया।
कर्नाटक: मैसूर से कर्नाटक तक का सफर
दक्षिण भारत में 1 नवंबर 1956 को मैसूर राज्य का गठन हुआ। राज्य पुनर्गठन के दौरान कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को एक साथ लाया गया। बाद में 1 नवंबर 1973 को मैसूर राज्य का नाम बदलकर कर्नाटक कर दिया गया। आज इस अवसर को कर्नाटक में कन्नड़ राज्योत्सव के रूप में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यहां भाषा, साहित्य और कन्नड़ संस्कृति से जुड़े विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
केरल: मलयालम भाषी क्षेत्रों से बना राज्य
केरल का गठन भी 1 नवंबर 1956 को हुआ था। राज्य पुनर्गठन के दौरान मलयालम भाषी क्षेत्रों को एकजुट कर केरल राज्य बनाया गया। त्रावणकोर-कोचीन और मालाबार क्षेत्र के पुनर्गठन से इस राज्य को नया स्वरूप मिला। तिरुवनंतपुरम को इसकी राजधानी बनाया गया। केरल का स्थापना दिवस आज केरल पिरवी के नाम से मनाया जाता है, जिसका अर्थ है केरल का जन्म।
पंजाब: भाषाई पहचान के आधार पर हुआ पुनर्गठन
पंजाब का भी एक नवंबर से ऐतिहासिक संबंध है। 1 नवंबर 1956 को पंजाब का पुनर्गठन हुआ था। इसके बाद भाषाई आधार पर अलग पंजाबी सूबा बनाने की मांग लगातार उठती रही। आखिरकार पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत एक नवंबर 1966 को पंजाब को नया स्वरूप मिला। इस पुनर्गठन के दौरान हरियाणा अलग राज्य बना और चंडीगढ़ को पंजाब तथा हरियाणा की संयुक्त राजधानी बनाया गया।
हरियाणा: 1966 में बना देश का नया राज्य
पंजाब से अलग होकर 1 नवंबर 1966 को हरियाणा एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। पंजाबी और हिंदी भाषी क्षेत्रों के बीच लंबे समय से चली आ रही मांगों के बाद यह फैसला लिया गया था। चंडीगढ़ को दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी बनाया गया, जबकि हरियाणा का अपना प्रशासनिक ढांचा विकसित हुआ। आज हरियाणा में इस दिन को स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।
छत्तीसगढ़: मध्य प्रदेश से अलग होकर बना नया राज्य
वर्ष 2000 में देश के नक्शे पर एक और महत्वपूर्ण बदलाव हुआ। लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय पहचान और अलग राज्य की मांग के बाद मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से को अलग कर छत्तीसगढ़ बनाया गया। 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ भारत के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। रायपुर को इसकी राजधानी बनाया गया। प्राकृतिक संसाधनों, आदिवासी संस्कृति और समृद्ध लोक परंपराओं के लिए पहचाने जाने वाले इस राज्य का स्थापना दिवस हर साल धूमधाम से मनाया जाता है।
बिहार और झारखंड का भी नवंबर से है खास रिश्ता
नवंबर का महीना बिहार के लिए भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। बिहार से अलग होकर 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ था। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर अस्तित्व में आए झारखंड का स्थापना दिवस हर साल 15 नवंबर को मनाया जाता है। अलग राज्य की मांग के पीछे क्षेत्रीय पहचान, आदिवासी अस्मिता, प्राकृतिक संसाधनों और विकास से जुड़ी आकांक्षाएं प्रमुख थीं।
विविधता में एकता की कहानी कहता है 1 नवंबर
कुल मिलाकर 1 नवंबर सिर्फ छह राज्यों का स्थापना दिवस नहीं है, बल्कि यह भारत के संघीय ढांचे, भाषाई विविधता और क्षेत्रीय पहचान के सम्मान की भी कहानी है। वर्ष 1956 से लेकर 2000 तक हुए अलग-अलग पुनर्गठन ने देश के वर्तमान राजनीतिक नक्शे को आकार दिया। अलग-अलग भाषा, संस्कृति और परंपराओं के बावजूद इन सभी राज्यों की पहचान भारतीय एकता से जुड़ी है। यही विविधता भारत की सबसे बड़ी ताकत है।










