Raebareli: गड्ढों में गुम हुई सड़क, रायबरेली-डलमऊ-फतेहपुर मार्ग बना मौत का रास्ता!

टैक्स वसूली पर ट्रक चालकों का फूटा गुस्सा, ऑटो-ई-रिक्शा चालकों और स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल; हजारों राहगीरों की सुरक्षा दांव पर

Raebareli: सरकार के गड्ढामुक्त सड़क अभियान के दावे रायबरेली-डलमऊ-फतेहपुर मार्ग पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। यहां सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढों के बीच कहीं सड़क बची है, यह पहचानना भी मुश्किल हो गया है। मार्ग पर जगह-जगह 4 से 5 फीट तक गहरे और बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए काल बनकर खड़े हैं। जिम्मेदार विभागों की अनदेखी का आलम यह है कि हजारों लोग प्रतिदिन अपनी जान हथेली पर रखकर इस बदहाल रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।

डलमऊ गंगा घाट से फतेहपुर की ओर जाने वाले मार्ग की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। भारी वाहनों के लगातार आवागमन से सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। कई स्थानों पर गड्ढों ने सड़क को कुएं और तालाब जैसी शक्ल दे दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आए दिन वाहन इन गड्ढों में फंसते हैं और दुर्घटनाएं होती रहती हैं। रात के अंधेरे में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। इसके बावजूद सड़क की मरम्मत कराने के लिए जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है।

टैक्स पूरा, सुविधा शून्य; आखिर जनता किस बात का दे रही कीमत?

मार्ग से गुजरने वाले ट्रक चालकों का आक्रोश भी अब सामने आने लगा है। एक ट्रक चालक ने कहा कि सरकार हमसे हर तरह का टैक्स वसूलती है, लेकिन बदले में ऐसी सड़क मिलती है, जहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। दूसरे ट्रक चालक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि रोड टैक्स, टोल टैक्स, फिटनेस टैक्स, चुंगी और अन्य खर्च देने के बाद भी सड़क की हालत बद से बदतर है। वाहन चालक सवाल कर रहे हैं कि जब टैक्स वसूली में कोई कमी नहीं छोड़ी जाती तो फिर सुरक्षित सड़क उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

ऑटो-ई-रिक्शा चालकों से लेकर स्थानीय नागरिकों तक में आक्रोश

इस मार्ग पर ऑटो और ई-रिक्शा चलाने वाले चालकों का कहना है कि रोजाना इसी रास्ते से सवारियां लेकर गुजरना पड़ता है। गड्ढों के कारण वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और यात्रियों की जान पर भी खतरा बना रहता है। स्थानीय नागरिकों ने नगर पंचायत डलमऊ और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर सड़क की बदहाली पर जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे?

सरकार के गड्ढामुक्त सड़क अभियान को यह बदहाल मार्ग खुली चुनौती दे रहा है। सड़क की दुर्दशा को बयां करते वीडियो भी सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई उजागर कर रहे हैं।

अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेंगे? जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से मांग है कि तत्काल मौके का निरीक्षण कराकर सड़क की स्थायी मरम्मत कराई जाए, ताकि राहगीरों को इस जानलेवा सफर से निजात मिल सके।

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