Adhir Ranjan Chowdhury Meets PM Modi: बंगाल चुनाव से पहले कांग्रेस नेता अधीर रंजीत चौधरी ने पीएम मोदी से की मुलाकात! बांग्ला भाषियों पर हमलों का मुद्दा उठाया

Adhir Ranjan Chowdhury Meets PM Modi: पीएम मोदी से मिले कांग्रेस के अध्यक्ष नेता अधीर रंजन चौधरी ! प्रधानमंत्री से की यह मांग

Adhir Ranjan Chowdhury Meets PM Modi: पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इस मुलाकात को सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीएम मोदी से मिलने के साथ ही अधीर रंजन चौधरी ने एक पत्र भी सौंपा, जिसमें उन्होंने कई संवेदनशील मुद्दों को उठाया। खास तौर पर भाजपा (BJP) शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों के कथित उत्पीड़न का मामला चर्चा के केंद्र में रहा। आखिर इस मुलाकात के पीछे क्या वजह है और किन मुद्दों पर चिंता जताई गई है, चलिए जानते हैं पूरा मामला विस्तार से…

बंगाल चुनाव और बढ़ती राजनीतिक हलचल/Adhir Ranjan Chowdhury Meets PM Modi

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्य की राजनीति लगातार गरमाती जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से मुलाकात को अहम माना जा रहा है। अधीर रंजन लंबे समय से बंगाल में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के सामने यह सवाल उठाया कि देश के विभिन्न हिस्सों, खासकर भाजपा शासित राज्यों में, बांग्ला भाषी लोगों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। उनका कहना है कि भाषा के आधार पर लोगों को निशाना बनाया जाना न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि इससे सामाजिक सौहार्द भी प्रभावित होता है। यही पृष्ठभूमि इस मुलाकात की अहम वजह बनी।

पीएम मोदी को सौंपा पत्र, मांगा सीधा हस्तक्षेप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से मुलाकात के दौरान अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) ने एक लिखित पत्र भी सौंपा। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्ला भाषा बोलने वाले लोगों को अक्सर पड़ोसी देश बांग्लादेश (Bangladesh) से आया घुसपैठिया मान लिया जाता है। उन्होंने लिखा कि इन लोगों का “एकमात्र अपराध” उनकी भाषा है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करती हैं। चौधरी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे इस गंभीर मुद्दे में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करें और सभी राज्य सरकारों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें, ताकि निर्दोष नागरिकों को परेशान न किया जाए।

सांप्रदायिक तनाव की आशंका

अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की घटनाओं पर समय रहते रोक नहीं लगी, तो पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है और बंगाल की सीमा बांग्लादेश (Bangladesh) से लगती है। ऐसे में देश के अन्य हिस्सों में बांग्ला भाषियों पर हो रहे हमले यहां समुदायों के बीच अविश्वास को बढ़ा सकते हैं। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि प्रवासी मजदूरों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

हालिया घटनाएं और बढ़ती चिंता

हाल के महीनों में बांग्ला भाषी प्रवासी मजदूरों से जुड़ी कई हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुर्शिदाबाद (Murshidabad) जिले के प्रवासी मजदूर ज्वेल राणा (Jewel Rana) की ओडिशा (Odisha) के संबलपुर (Sambalpur) में हत्या और मुंबई (Mumbai) में दो मजदूरों की गिरफ्तारी ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड के अनुसार, बीते 10 महीनों में भाजपा शासित राज्यों से उत्पीड़न की 1143 शिकायतें मिली हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या राज्यों को कोई ठोस दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।

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