Akhilesh Yadav PDA: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर अपने मशहूर ‘पीडीए’ फॉर्मूले में बड़ा बदलाव किया है। पहले 2022 के विधानसभा चुनाव में PDA का मतलब था पिछड़े (Pichhde), दलित (Dalit) और अल्पसंख्यक (Alpasankhyak)। यह फॉर्मूला सपा की चुनावी रणनीति का मुख्य हथियार बना था, जिससे पार्टी ने पिछड़े वर्गों, दलितों और मुस्लिम समुदाय को एकजुट करने की कोशिश की।
अब, 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (मिशन-27) से पहले अखिलेश ने PDA में ‘ए’ (A) का मतलब बदलकर ‘आधी आबादी’ यानी महिलाओं को बता दिया है। उनका कहना है कि PDA अब सिर्फ पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें आधी आबादी यानी हर बच्ची, युवती, नारी और महिला को शामिल किया गया है। यह बदलाव महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी सुरक्षा, सम्मान व आर्थिक मजबूती पर फोकस करता है।

अखिलेश ने क्या कहा और कैसे घोषणा की?
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर अपनी पत्नी डिंपल यादव (जो सांसद हैं) और अन्य अग्रणी महिलाओं के साथ तस्वीरें शेयर कीं। कैप्शन में उन्होंने लिखा कि “आधी आबादी की पूरी आजादी, उनकी हिफाजत के साथ-साथ हक-अधिकार, सशक्तीकरण और सबलीकरण के लिए हम सदैव कटिबद्ध हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “जब परिवार, समाज और देश को मजबूत करने वाली महिलाओं को सम्मान मिलता है, तो उनका मान और मनोबल दोनों बढ़ता है। हम PDA में शामिल ‘ए’ यानी आधी आबादी को सामाजिक-आर्थिक रूप से समान सम्मान देंगे। उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने और समृद्ध करने के लिए ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ लाएंगे।”
अखिलेश ने यह भी जोड़ा कि “फसल बदलनी है तो बीज बदलने होंगे। स्त्री के प्रति मूलभूत मानसिक बीज बदलेंगे तभी उनकी स्थिति में बदलाव आएगा।” उन्होंने समाजवादी पेंशन को फिर से शुरू करने की बात कही, जिससे महिलाओं की ताकत बढ़ेगी और यूपी की संपूर्ण उन्नति का संकल्प पूरा होगा।
नई योजनाएं क्या हैं? महिलाओं को क्या फायदा?
अखिलेश ने साफ कहा कि अगर 2027 में सपा की सरकार बनी तो ‘नारी समृद्धि सम्मान योजना’ शुरू होगी। इसके तहत गरीब परिवार की महिलाओं को हर साल 40,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ सामाजिक सम्मान देने पर जोर देगी।
इसके अलावा, ‘मालती देवी-मूर्ति देवी महिला सम्मान समारोह’ जैसे कार्यक्रमों से उन महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा, जिनकी हिम्मत, प्रतिभा और प्रयासों से नारी शक्ति का नया रूप उभरा है। अखिलेश का मानना है कि महिलाओं को सम्मान देने से पूरा समाज मजबूत होता है।
2027 चुनाव में यह रणनीति क्यों?
2027 का यूपी विधानसभा चुनाव सपा के लिए बहुत अहम है। पिछले चुनावों में PDA फॉर्मूले से सपा को अच्छा फायदा मिला था, लेकिन अब अखिलेश महिलाओं को केंद्र में लाकर अपनी वोट बैंक को और चौड़ा करना चाहते हैं। यूपी में महिलाएं आबादी का आधा हिस्सा हैं, और अगर उन्हें साध लिया जाए तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले PDA को कुछ लोग सिर्फ खास वर्गों तक सीमित मानते थे। अब ‘आधी आबादी’ जोड़कर अखिलेश ने इसे और समावेशी बनाने की कोशिश की है। इससे महिला वोटरों, खासकर युवतियों और गरीब परिवारों की महिलाओं को आकर्षित करने की उम्मीद है।
राजनीतिक मायने और क्या होगा आगे?
यह घोषणा चुनावी साल में आई है, जब सभी पार्टियां 2027 के लिए तैयारी में जुटी हैं। अखिलेश की यह रणनीति भाजपा और अन्य पार्टियों के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि महिलाओं के मुद्दे जैसे सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक मदद हर पार्टी के लिए अहम हैं।
अभी तक इस पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि PDA का यह नया रूप कितना असरदार साबित होगा। अखिलेश लगातार PDA को विस्तार देते जा रहे हैं – कभी आदिवासी, कभी अच्छे अगड़े, अब आधी आबादी – ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें शामिल महसूस करें।










