रिपोर्ट : नासिफ खान
भोपाल : देश की राजनीति इन दिनों वोट चोरी के मामले को लेकर गर्म है। चारों तरफ जैसे मानो विरोध का शोर सुनाई दे रहा है। हर कोई अपने अधिकार से जुड़े सवाल पूछ रहा है। जिसका असर सभी पार्टियों पर देखने को मिल रहा है। इधर, पार्टी खुलेआम एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही है। जिसका नमुना आए दिन मीडिया के माध्यम से देखने और सुनने को मिल ही जाता है।
मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस संगठन के भीतर भाजपा से लौट रहे नेताओं की घर वापसी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। पार्टी के भीतर से ही आवाज उठ रही है कि ऐसे कदम कांग्रेस के वोट चोरी के खिलाफ चल रहे संघर्ष को कमजोर करेंगे। साथ ही जनता में गलत संदेश जाएगा।
दिया इंदौर का हवाला
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि नवनियुक्त जिला और शहर अध्यक्ष उत्साह में भाजपा में जा चुके पूर्व कांग्रेसी नेताओं के घर जाकर उनसे वापस लौटने की अपील कर रहे हैं। इसे लेकर कार्यकर्ताओं ने हाईकमान से स्पष्ट गाइडलाइन बनाने की मांग की है। उनका सवाल है कि क्या पार्टी इतनी कमजोर हो चुकी है कि अब भाजपा में गए नेताओं के घर-घर जाकर चरणवंदना करनी पड़े। सभी ने इंदौर की घटनाओं का हवाला दिया है, जहां भाजपा नेताओं संजय शुक्ला, विशाल पटेल, टंटू शर्मा और अनुप शुक्ला से संपर्क कर उन्हें कांग्रेस में लौटने का न्योता दिया गया।
मिल रहा उल्टा संदेश
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कदम तब उठाया जा रहा है जब बिहार में कांग्रेस वोट चोरी के खिलाफ बड़े अभियान की शुरुआत कर चुकी है। ऐसे में मध्यप्रदेश में इसका उल्टा संदेश जा रहा है और कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इधर, पार्टी के भीतर से उठी आवाजें यह भी कह रही हैं कि यह अपरिपक्वता और अदूरदर्शिता का प्रमाण है। उनका आरोप है कि कुछ नेता कांग्रेस को भाजपामय करने की साजिश में जुटे हैं।
की मांग
इन सभी ने कांग्रेस हाईकमान को तुरंत हस्तक्षेप कर इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही यह भी सुझाव दिया है कि अगर भाजपा छोड़कर कांग्रेस में लौटने वालों को स्वीकार करना है, तो इसके लिए स्पष्ट शर्तें तय की जाएं। इन शर्तों में कम से कम 5 साल तक चुनाव न लड़ने, पार्टी संगठन में कोई प्रमुख पद न दिए जाने और सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर काम करने जैसी बातें शामिल हों। इसके साथ ही, प्रवेश की प्रक्रिया एआईसीसी स्तर पर कमेटी बनाकर तय की जाए।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि फिलहाल पार्टी में ईमानदारी से भाजपा की विचारधारा के खिलाफ खड़े होने वाले नेताओं की कमी है। ऐसे में अगर भाजपा से आए नेताओं को बिना किसी शर्त और प्रक्रिया के पुनः शामिल किया जाता है तो कांग्रेस की लड़ाई कमजोर होगी और जनता में यह संदेश जाएगा कि पार्टी भाजपा की नीतियों का वास्तविक विरोध करने के बजाय अवसरवादियों को गले लगा रही है।