Ancient Mystery Unearthed in Pakistan: तक्षशिला के पास मिले दुर्लभ सिक्के और कीमती पत्थर, बदलेगा इतिहास का नजरिया

Ancient Mystery Unearthed in Pakistan: पाकिस्तान में कुषाण काल के सिक्के और लापीस लाजुली ने खोले प्राचीन सभ्यता के नए राज

Ancient Mystery Unearthed in Pakistan: पाकिस्तान (Pakistan) के ऐतिहासिक शहर तक्षशिला (Taxila) के पास हुई एक पुरातात्विक खुदाई ने इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं को रोमांचित कर दिया है। यूनेस्को (UNESCO) द्वारा सूचीबद्ध इस प्राचीन क्षेत्र से ऐसे दुर्लभ सिक्के और सजावटी पत्थर मिले हैं, जिन्हें विशेषज्ञ एक दशक की सबसे अहम खोज बता रहे हैं। इन अवशेषों ने न सिर्फ प्राचीन शहरी सभ्यता की मौजूदगी की पुष्टि की है, बल्कि कुषाण काल (Kushan Period) की राजनीतिक, धार्मिक और व्यापारिक ताकत को भी उजागर किया है। खास बात यह है कि मिले सिक्कों पर सम्राट वासुदेव (Emperor Vasudeva) की स्पष्ट छवि दिखाई देती है, जो इस खोज को और भी ऐतिहासिक बना देती है। तो चलिए जानते हैं इस खबर के बारे में विस्तार से…

प्राचीन तक्षशिला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि/Ancient Mystery Unearthed in Pakistan

तक्षशिला (Taxila) प्राचीन काल में एशिया का एक प्रमुख बौद्धिक, प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र रहा है। यह शहर गांधार सभ्यता (Gandhara Civilization) का अभिन्न हिस्सा था और शिक्षा, धर्म व संस्कृति का बड़ा केंद्र माना जाता है। वर्तमान खुदाई प्राचीन भीर टीले (Bhir Mound) पर की गई है, जिसे तक्षशिला की सबसे पुरानी शहरी बस्ती माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, यह क्षेत्र छठी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर तीसरी शताब्दी ईस्वी तक लगातार आबाद रहा। यहां से पहले भी कई महत्वपूर्ण अवशेष मिल चुके हैं, लेकिन हालिया खोज ने तक्षशिला की ऐतिहासिक भूमिका को एक नई गहराई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इलाका न केवल राजनीतिक रूप से अहम था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों से भी जुड़ा हुआ था।

खुदाई में हुआ बड़ा खुलासा

इस खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों को कीमती Lapis Lazuli पत्थर के सजावटी टुकड़े और कुषाण वंश (Kushan Dynasty) के दुर्लभ कांस्य सिक्के मिले हैं। पंजाब पुरातत्व विभाग (Punjab Archaeology Department) के उप निदेशक आसिम डोगर (Asim Dogar) के अनुसार, ये अवशेष दूसरी शताब्दी ईस्वी के हैं। खास बात यह है कि Lapis Lazuli पत्थर आमतौर पर आज के अफगानिस्तान (Afghanistan) के बदख्शां (Badakhshan) क्षेत्र से आता था, जो लंबी दूरी के व्यापारिक संबंधों का संकेत देता है। वहीं, सिक्कों की बनावट और धातु गुणवत्ता उस दौर की विकसित मुद्रा प्रणाली को दर्शाती है। यह खोज इस बात की पुष्टि करती है कि तक्षशिला केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद समृद्ध नगर था।

सिक्कों पर सम्राट वासुदेव की छवि

खुदाई टीम ने सिक्कों की पुष्टि के लिए फोरेंसिक और वैज्ञानिक जांच करवाई। पेशावर विश्वविद्यालय (University of Peshawar) के विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि सिक्कों पर कुषाण शासक सम्राट वासुदेव (Emperor Vasudeva) की छवि अंकित है। एक तरफ राजा की आकृति है, जबकि दूसरी ओर एक देवी की छवि दिखाई देती है, जिसे धार्मिक बहुलवाद का प्रतीक माना जा रहा है। सिक्का विशेषज्ञ मलिक ताहिर सुलेमान (Malik Tahir Suleman) ने कहा कि कुषाण सिक्के दक्षिण और मध्य एशिया के इतिहास को समझने के लिए सबसे भरोसेमंद स्रोत हैं। इन पर मौजूद बहुभाषी शिलालेख उस समय की सांस्कृतिक विविधता और प्रशासनिक परिपक्वता को दर्शाते हैं।

शोध संस्थानों को जोड़े जाने की तैयारी

फिलहाल खुदाई कार्य तक्षशिला (Taxila) के B-2 खाई क्षेत्र में जारी है, जो 16 सक्रिय खुदाई खाइयों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इलाका कभी एक आवासीय क्षेत्र रहा होगा। पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) और पुरातत्व विभाग अब इन कलाकृतियों के संरक्षण और विस्तृत अध्ययन की योजना बना रहे हैं। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों को भी इस खोज से जोड़े जाने की तैयारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यह खोज तक्षशिला के इतिहास को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है और दक्षिण एशिया की प्राचीन सभ्यताओं पर वैश्विक शोध को नई दिशा देगी।

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