Australia Mass Shooting Exposed: ऑस्ट्रेलिया (Australia) के सिडनी (Sydney) स्थित बॉन्डी बीच (Bondi Beach) पर 14 दिसंबर को हुई सामूहिक गोलीबारी ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। यहूदी समुदाय के उत्सव के दौरान हुए इस हमले में बाप–बेटे ने अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें 10 साल की बच्ची से लेकर 82 साल के बुजुर्ग तक को निशाना बनाया गया। अब इस हमले को लेकर तेलंगाना पुलिस (Telangana Police) ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, इस हमले का संदिग्ध साजिद अकरम (Sajid Akram) मूल रूप से हैदराबाद (Hyderabad) का रहने वाला है, जो 27 साल पहले ऑस्ट्रेलिया चला गया था। इस खुलासे के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं—क्या भारत से इसका कोई कनेक्शन है या कट्टरता की जड़ें कहीं और हैं? तो चलिए जानते हैं पूरा मामला क्या है, जानते हैं विस्तार से…
साजिद अकरम का हैदराबाद संबंध/Australia Mass Shooting Exposed
तेलंगाना पुलिस के डीजीपी कार्यालय (DGP Office) की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि साजिद अकरम (Sajid Akram) मूल रूप से हैदराबाद (Hyderabad) का निवासी था। उसने हैदराबाद से बी.कॉम (B.Com) की पढ़ाई पूरी की थी और रोजगार की तलाश में नवंबर 1998 में ऑस्ट्रेलिया (Australia) चला गया। पुलिस के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद साजिद का भारत में रह रहे अपने परिवार से संपर्क बेहद सीमित रहा। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि उसके जीवन और गतिविधियों पर भारत या तेलंगाना में किसी स्थानीय संगठन या व्यक्ति का प्रभाव नहीं था। इस पृष्ठभूमि से साफ है कि साजिद का भारत से संबंध केवल जन्म और शुरुआती शिक्षा तक सीमित था, जबकि उसका बाद का जीवन पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया में ही बीता।

भारत से कोई लिंक नहीं
तेलंगाना पुलिस (Telangana Police) ने साफ शब्दों में कहा है कि साजिद अकरम और उसके बेटे नवीद अकरम (Naveed Akram) के कट्टरपंथी बनने के पीछे भारत या तेलंगाना से जुड़ा कोई कारण सामने नहीं आया है। पुलिस के मुताबिक, उपलब्ध तथ्यों से यह प्रतीत होता है कि कट्टरता के कारक स्थानीय या अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन उनका संबंध भारत से नहीं है। यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि किसी भी आतंकी घटना के बाद अक्सर उसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन तलाशे जाते हैं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में रह रहे साजिद के परिवार पर किसी तरह की जांच या कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ी है। यह रुख भारत की एजेंसियों की तथ्यात्मक और संतुलित जांच को भी दर्शाता है।
बॉन्डी बीच पर खौफ का मंजर
14 दिसंबर को सिडनी (Sydney) के बॉन्डी बीच (Bondi Beach) पर हुए इस एंटी-सेमेटिक (Anti-Semitic) मास शूटिंग ने ऑस्ट्रेलिया को 1996 के पोर्ट आर्थर नरसंहार (Port Arthur Massacre) की याद दिला दी। यहूदी समुदाय के एक कार्यक्रम के दौरान साजिद अकरम और उसके बेटे ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। इस हमले में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को नहीं बख्शा गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश फैल गया। ऑस्ट्रेलिया में इसे हाल के वर्षों की सबसे भयावह हिंसक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। इस घटना के बाद यहूदी-विरोधी हिंसा और कट्टरपंथ को लेकर वैश्विक चिंता और गहरी हो गई है।
ऑस्ट्रेलिया में गन कानून सख्त करने की तैयारी
इस हमले के बाद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज (PM Anthony Albanese) की अगुवाई में नेशनल कैबिनेट (National Cabinet) की बैठक हुई। द सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड (The Sydney Morning Herald) के अनुसार, कैबिनेट ने यहूदी-विरोधी नफरत, हिंसा और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने का संकल्प लिया है। सिडनी (Sydney) की सांसद जॉली स्टेगल (Jolly Steggall) ने नेशनल गन कानूनों को और मजबूत करने की योजना का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि आज ऑस्ट्रेलिया में 40 लाख से अधिक लाइसेंसी बंदूकें हैं, जो 1996 के नरसंहार से पहले की संख्या से भी ज्यादा हैं। फिलहाल, सरकार गन कानूनों में बड़े सुधार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।










