Azam Khan Allahabad High Court: जेल में बंद आजम खान को बड़ी सौगात! इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल पर लगाई रोक, अगली सुनवाई 24 मार्च को

Azam Khan Allahabad High Court: आजम खान को हाईकोर्ट से राहत! यतीमखाना मामले में अंतिम फैसले पर रोक, 24 मार्च तक बढ़ी अंतरिम राहत

Azam Khan Allahabad High Court: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जेल में बंद पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान से जुड़े एक चर्चित मामले में हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत को बढ़ाते हुए ट्रायल कोर्ट को अंतिम फैसला सुनाने से रोक लगाई है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को निर्धारित की है। यह फैसला समाजवादी पार्टी के समर्थकों के लिए बड़ी खुशखबरी है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा जोरों पर है।

यतीमखाना बेदखली मामले में अंतरिम राहत का विस्तार/Azam Khan Allahabad High Court

इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच ने आजम खान, उनके सह-आरोपी वीरेंद्र गोयल और अन्य याचिकाकर्ताओं को मिली अंतरिम राहत को 24 मार्च तक बढ़ा दिया है। कोर्ट पहले से ही ट्रायल कोर्ट को इस मुकदमे में अंतिम आदेश पारित करने से रोक चुका था। अब इस अंतरिम राहत के विस्तार से निचली अदालत फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं सुना सकेगी। यह राहत आजम खान के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे मामले में उनकी स्थिति मजबूत हुई है और ट्रायल प्रक्रिया में देरी हुई है।

यह मामला रामपुर के यतीमखाना (वक्फ संपत्ति संख्या 157) से जुड़ा है। 15 अक्टूबर 2016 को इस वक्फ संपत्ति पर अनधिकृत ढांचों को ध्वस्त करने की कार्रवाई हुई थी। इस घटना के बाद 2019 में रामपुर कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप है कि बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई में नियमों का उल्लंघन हुआ। आजम खान और उनके सहयोगी इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत पहुंचे हैं।

याचिका में मुख्य मांगें और आधार

आजम खान और सह-आरोपी वीरेंद्र गोयल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रायल कोर्ट के 30 मई 2025 के आदेश को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि मुख्य गवाहों की दोबारा गवाही नहीं कराई गई है और मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण वीडियो फुटेज को रिकॉर्ड में नहीं लाया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि बिना इन सबूतों के निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त करने और अंतिम फैसले पर रोक लगाने की मांग की है।

हाईकोर्ट इस याचिका के साथ ही सह-आरोपी मोहम्मद इस्लाम उर्फ इस्लाम ठेकेदार, शाहिद प्रधान और आले हसन खान की याचिकाओं को भी जोड़कर संयुक्त सुनवाई कर रहा है। सभी याचिकाओं को कनेक्ट करने का आदेश दिया गया है, ताकि एक ही बेंच पर सभी पहलुओं पर विचार हो सके।

आजम खान का राजनीतिक सफर और कानूनी चुनौतियां

आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति के कद्दावर चेहरों में शुमार हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और कई बार कैबिनेट मंत्री रह चुके आजम खान रामपुर से कई बार विधायक और सांसद चुने गए हैं। उनकी राजनीतिक छवि तेज-तर्रार और बेबाक बयानों के लिए जानी जाती है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में उन पर दर्जनों मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें ज्यादातर जमीन, वक्फ संपत्ति और अन्य विवादों से जुड़े हैं।

कई मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है, लेकिन कुछ केस अभी भी चल रहे हैं। यतीमखाना मामला भी इन्हीं में से एक है, जो 2016 से लंबित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मामलों में अंतरिम राहत मिलना आरोपी के लिए राहत की सांस लेने जैसा होता है। समाजवादी पार्टी के समर्थक इसे न्यायिक प्रक्रिया की जीत बता रहे हैं, जबकि सत्ताधारी दल इसे कानूनी प्रक्रिया में देरी का तरीका करार दे रहे हैं।

कोर्ट का फैसला और आगे की राह

हाईकोर्ट का यह आदेश आजम खान के लिए अस्थायी राहत है। 24 मार्च को होने वाली सुनवाई में कोर्ट मुख्य याचिका पर गहन विचार कर सकता है। यदि याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला आता है, तो ट्रायल कोर्ट के कई आदेश प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, यदि राहत निरस्त होती है, तो निचली अदालत अंतिम फैसला सुना सकती है।

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