Balrampur Police Molestation Case: महिला सिपाही से छेड़खानी मामले में 3 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज, CM योगी ने लिया एक्शन

Balrampur Police Molestation Case: 8 महीने तक दबता रहा केस, CM डेस्क पहुँचा तो खुली पोल,बलरामपुर में 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड

Balrampur Police Molestation Case: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में इस साल होली (15 मार्च 2025) के दिन एक महिला आरक्षी के साथ जो हुआ, उसने पूरे पुलिस महकमे को शर्मसार कर दिया। कोतवाली देहात परिसर में ही होली का आधिकारिक कार्यक्रम चल रहा था। सभी पुलिसवाले रंग-गुलाल लगा रहे थे, नाच-गाना हो रहा था। इसी बीच तीन नशे में धुत पुलिसकर्मियों ने महिला कांस्टेबल को अकेला पाकर घेर लिया और जबरदस्ती रंग लगाने के बहाने छेड़खानी शुरू कर दी।

क्या हुई थी घटना?/Balrampur Police Molestation Case

महिला कांस्टेबल मिशन शक्ति के तहत बलरामपुर में तैनात थीं और महिला हेल्प डेस्क पर ड्यूटी करती थीं। होली खेलने के बाद वो घर गईं, फिर चाबी लेने थाने लौटीं। तभी हेड कांस्टेबल अमित कुमार, हेड कांस्टेबल शैलेंद्र कुमार और कांस्टेबल पन्नेलाल (तीनों शराब के नशे में) ने उन्हें देखा और घेर लिया।

  • जबरन गले लगाने की कोशिश
  • शरीर पर गलत जगह हाथ फेरना
  • महिला ने विरोध किया तो धक्का देकर पास आने की कोशिश
  • डर के मारे महिला थाने के परिसर में खड़े एक ट्रैक्टर पर चढ़ गईं
  • आरोपी ट्रैक्टर पर चढ़े और उन्हें नीचे खींच लिया
  • फिर दुबारा छेड़खानी की

महिला ने चीखें मारीं, किसी तरह खुद को छुड़ाकर भागीं। वहाँ मौजूद दूसरे पुलिसवाले और स्टाफ इसे “होली का मजाक” समझकर चुप रहे, किसी ने मदद नहीं की।

शिकायत की, पर 8 महीने तक कोई सुनवाई नहीं

उसी शाम महिला सिपाही ने थाने में लिखित तहरीर दी। तत्कालीन थाना प्रभारी गिरीश कुमार तिवारी को सौंपी। मांग की कि तीनों के खिलाफ तुरंत FIR हो। लेकिन…

  • रोज़नामचा में कोई एंट्री नहीं हुई
  • कोई प्रारंभिक जाँच नहीं हुई
  • उल्टा आरोपियों ने रात में महिला के घर जाकर धमकियाँ देनी शुरू कर दीं
  • कहा – “झूठा केस कर देंगे, नौकरी से निकलवा देंगे”

महिला ने महिला आयोग में शिकायत की, विशाखा कमिटी बनी, लेकिन वो भी सिर्फ कागजी घोड़ा साबित हुई। स्थानीय अधिकारी पूरा केस दबाने में लगे रहे। किसी तरह ये फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँच गई।

CM योगी ने लिया संज्ञान, पुलिस महकमे में हड़कंप

जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले की जानकारी मिली, पूरे जिले की पुलिस लाइन में हड़कंप मच गया। CM के निर्देश पर तुरंत एक्शन हुआ:

  • एडीजी गोरखपुर जोन मुथा अशोक जैन ने तीनों आरोपी पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड कर दिया
  • बलरामपुर SP विकास कुमार ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई
  • निलंबन के साथ-साथ बर्खास्तगी की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई

एडीजी ने मीडिया से कहा, “मामला बहुत गंभीर है। आरोप साबित हुए तो जल्द ही तीनों को नौकरी से बाहर कर दिया जाएगा।”

पुलिस थाने में महिला पुलिसकर्मी भी सुरक्षित नहीं?

ये पूरा मामला पुलिस विभाग में महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जिस थाने में आम महिलाएँ अपनी शिकायत लेकर जाती हैं, उसी थाने के परिसर में एक महिला सिपाही के साथ छेड़खानी हो जाए और कोई साथ न दे – ये बहुत शर्मनाक है। ऊपर से आरोपी खुद पुलिसवाले थे और नशे में थे।

पीड़िता आज भी डर के साये में जी रही है। अनुशासनात्मक कारणों से वो खुलकर बोल नहीं पा रही, लेकिन न्याय की लड़ाई लड़ रही है।

आखिर में न्याय मिला, पर बहुत देर से

8 महीने तक केस दबाने की कोशिश हुई, धमकियाँ दी गईं, लेकिन जब बात सीएम तक पहुँची तो रातों-रात सब बदल गया। ये दिखाता है कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराध और बदसलूकी पर कितनी सख्त है – चाहे आरोपी कोई भी हो, पुलिसवाला ही क्यों न हो।

अब उम्मीद है कि जल्द ही तीनों आरोपियों को सजा मिलेगी और पुलिस महकमें में महिलाओं के लिए और सुरक्षित माहौल बनेगा।

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