Biochemical Threat in Temples : गुजरात (Gujarat) पुलिस की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की कार्रवाई में पकड़े गए तीन आरोपियों के कथित खुलासे ने देश भर में शोर मचा दिया है। पूछताछ में आरोपियों — डॉक्टर मोहिउद्दीन (Dr. Mohiuddin), सोहेल (Sohel) और आजाद सैफी (Azad Saifi) — ने बताया कि उनका लक्ष्य धार्मिक स्थलों पर भक्तों को ‘प्रसाद’ के माध्यम से जहरीला पदार्थ देकर बड़ी तबाही मचाना था। आरोपियों के मोबाइल से मिले फोटो-वीडियो, मंदिरों की रेकी रिपोर्ट और कथित केमिकल स्टॉक ने इस प्लान की गंभीरता बढ़ा दी है। आरोप यह भी हैं कि इन्हें विदेश में बैठे हैंडलर अबू खदीजा (Abu Khadija) से निर्देश मिलते थे और ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई थी। मामले की संवेदनशीलता और व्यापकता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियाँ उच्च सतर्कता पर हैं। तो चलिए जानते हैं पूरा मामला क्या है, विस्तार से…
घटना की पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी का सिलसिला

गुजरात (Gujarat) की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने अहमदाबाद (Ahmedabad) में चलाए गए एक अभियान के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने खुद खुलासा किया कि वे खुरासान मॉड्यूल से जुड़े हैं और उनके नेटवर्क का दायरा उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) तक फैला हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक सोहेल (Sohel) और आजाद सैफी (Azad Saifi) ने पिछले कुछ महीनों में लखनऊ (Lucknow), नई दिल्ली (New Delhi) और अहमदाबाद (Ahmedabad) के प्रमुख मंदिरों की रेकी की थी—मंदिरों के भीतर-बाहर के कैमरा एंगल, प्रसाद वितरण के समय, भीड़ का प्रवाह और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीरें आरोपियों के फोन से बरामद हुईं। साथ ही आरोपियों के कब्जे से कुछ केमिकल स्टॉक मिलने की सूचनाएँ हैं, जिन्हें फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा गया है। एटीएस का कहना है कि गिरफ्तारी से पहले आरोपियों की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर थी और स्थानीय नेटवर्क का भी पता लगाया जा रहा है।
मंदिरों में ‘प्रसाद’ के माध्यम से हमला करने की साजिश
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उनका इरादा धार्मिक स्थलों पर भक्तों को वितरित होने वाले प्रसाद में जहरीला तत्व मिलाकर बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचाने का था। प्राथमिक बयानों के अनुसार आरोपी डॉक्टर मोहिउद्दीन (Dr. Mohiuddin) को जैविक/केमिकल जानकारी होने के कारण प्रक्रिया और तैयारियों की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि हैंडलर अबू खदीजा (Abu Khadija) ने उन्हें निर्देशित किया और ऑनलाइन माध्यम से ट्रेनिंग दी गई। सूत्रों ने बताया कि प्लान त्योहारों या मेलों के समय लागू करने का था ताकि अधिकतम संख्या में लोग प्रभावित हो सकें। बंदिशों और संवेदनशीलता के मद्देनजर एजेंसियाँ इस खुलासे को गंभीरता से ले रही हैं और मौके पर संग्रहित साक्ष्यों की फॉरेनसिक्स जांच तेज कर दी गई है। इस खुलासे ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर बहस और भी तेज कर दी है।
जांच, प्रतिक्रिया और अफवाह-नियंत्रण प्रयास
एटीएस (ATS) और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ फिलहाल आरोपियों के फोन, मैसेज और सोशल मीडिया कनेक्शनों की गहन जांच कर रही हैं। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri), शामली (Shamli), मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) और सहारनपुर (Saharanpur) में आरोपियों के संभावित कनेक्शन पर छापेमारी की जानकारी सामने आई है। स्थानीय प्रशासन ने मंदिरों और सार्वजनिक सभाओं में सुरक्षा बढ़ा दी है और फ़ास्ट-ट्रैक फॉरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए आगे की कार्रवाई जारी है। धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधि और नागरिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है; वहीं सोशल मीडिया पर अफवाह फैलने की आशंका के कारण अधिकारियों ने सुस्पष्ट सूचनाएँ जारी करने की आवश्यकता जताई है। केंद्र और राज्य स्तर की एजेंसियाँ इस मामले को आतंक-विरोधी मानकर राष्ट्रीय सुरक्षा अंकुरित कर रही हैं।
वर्तमान स्थिति, संभावित नेटवर्क और आगे की कार्रवाई
गिरफ्तार आरोपियों के बयान और बरामद साक्ष्यों के आधार पर एटीएस को शक है कि यह सिर्फ स्थानीय स्तर का षड्यंत्र नहीं बल्कि विस्तारित मॉड्यूल की कड़ी हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद आरोपों की सत्यता और संभावित क्षमता को और स्पष्ट किया जाएगा। यदि बरामद केमिकल की प्रमाणिकता पुष्टि होती है तो आरोपों के आधार पर गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा धाराओं के तहत मामलों का निर्माण होगा और अंतर-राज्यीय जांच जारी रहेगी। साथ ही प्रशासन ने धार्मिक स्थलों के आसपास निगरानी बढ़ाने, प्रसाद वितरण-प्रक्रिया की समीक्षा और सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने को प्राथमिकता दे दी है। वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने कहा है कि जांच में जिन अन्य लोगों और फंडिंग-रूट्स का खुलासा होगा, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि किसी भी तरह की दोबारा साजिश को रोका जा सके।










