BJP MLA Sanjay Pathak Mining Case: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। भाजपा (BJP) विधायक और पूर्व मंत्री संजय पाठक (Sanjay Pathak) से जुड़ी कंपनियों पर 443 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की कार्रवाई ने सत्ता से लेकर प्रशासन तक हलचल मचा दी है। जबलपुर (Jabalpur) कलेक्टर राघवेंद्र सिंह (Raghvendra Singh) द्वारा 10 नवंबर 2025 को जारी किया गया नोटिस अब विधानसभा में भी गूंज चुका है। खनिज उत्खनन में भारी गड़बड़ी, स्वीकृत क्षमता से अधिक उत्पादन और जीएसटी (GST) चोरी जैसे गंभीर आरोपों के बीच अब सरकार की भूमिका भी सवालों में है। मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने इस पूरे मामले पर सदन में लिखित जवाब दिया है। आखिर यह 443 करोड़ का मामला क्या है, जांच में क्या निकला और आगे क्या कार्रवाई होगी…
क्या है पूरा मामला/BJP MLA Sanjay Pathak Mining Case
मामला मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर जिला (Jabalpur District) स्थित सिहोरा तहसील (Sihora Tehsil) से जुड़ा है, जहां पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक संजय पाठक (Sanjay Pathak) से जुड़े लोगों के नाम पर संचालित तीन प्रमुख कंपनियां- आनंद माइनिंग कार्पोरेशन (Anand Mining Corporation), निर्मला मिनरल्स (Nirmala Minerals) और मेसर्स पेसिफिक एक्सपोर्ट (M/s Pacific Export) खनिज उत्खनन का कार्य कर रही थीं। आरोप है कि इन कंपनियों ने स्वीकृत क्षमता से कहीं अधिक खनिज का उत्खनन किया और सरकार को देय रॉयल्टी व जीएसटी का भुगतान नहीं किया। इस पूरे मामले की शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल (Economic Offences Wing, Bhopal) में आशुतोष मनु दीक्षित (Ashutosh Manu Dixit) द्वारा की गई थी। इसके बाद खनिज साधन विभाग (Mineral Resources Department) ने जांच दल गठित कर पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू की।

443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890 रुपये की देनदारी
खनिज विभाग की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा सामने आया, जिसमें इन तीनों कंपनियों पर कुल 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890 रुपये की देनदारी तय की गई। इसमें अवैध उत्खनन से हुई कमाई के साथ जीएसटी (GST) की राशि भी शामिल है। इस रिपोर्ट के आधार पर जबलपुर (Jabalpur) कलेक्टर राघवेंद्र सिंह (Raghvendra Singh) ने 10 नवंबर 2025 को संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और चेतावनी दी कि यदि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो वसूली की सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि यह नोटिस खनिज विभाग के माध्यम से विधायक संजय पाठक (Sanjay Pathak) तक भी पहुंचा, जिसके जवाब में उन्होंने विभाग से 15 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा है। फिलहाल विभाग उन्हें और समय देने की तैयारी कर रहा है, जिससे मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग पकड़ता जा रहा है।
443 करोड़ रुपये की वसूली
इस पूरे मामले को विधानसभा में कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा (Dr. Hiralal Alawa) ने दमदार तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इतनी बड़ी राशि की वसूली अब तक क्यों नहीं की गई, जबकि जांच रिपोर्ट स्पष्ट रूप से अवैध उत्खनन और टैक्स चोरी की पुष्टि करती है। इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने सदन में लिखित जवाब देते हुए बताया कि जांच दल का प्रतिवेदन मिल चुका है और संबंधितों से राशि जमा कराने एवं अपना पक्ष रखने के लिए कलेक्टर द्वारा नोटिस जारी किया गया है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक, जबलपुर हाई कोर्ट (Jabalpur High Court) के एक जज पहले ही इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं। जज ने आरोप लगाया था कि विधायक संजय पाठक ने मामले को लेकर उनसे फोन पर संपर्क साधने की कोशिश की थी, जिसके बाद न्यायिक हलकों में भी हड़कंप मच गया था।
443 करोड़ रुपये की वसूली
फिलहाल 443 करोड़ रुपये की वसूली का मामला पूरी तरह प्रशासनिक और राजनीतिक निगरानी में है। जबलपुर (Jabalpur) कलेक्टर की ओर से जारी नोटिस के बाद अब अगला कदम कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले जवाब पर निर्भर करेगा। यदि तय समयसीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो राजस्व वसूली अधिनियम के तहत संपत्ति कुर्की और बैंक खातों की जब्ती तक की कार्रवाई हो सकती है। दूसरी ओर, इस पूरे प्रकरण ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की सियासत को भी गरमा दिया है। विपक्ष इसे सरकार की कथित संरक्षण नीति से जोड़ रहा है, जबकि सरकार जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की बात कह रही है। आने वाले दिनों में यह मामला ईओडब्ल्यू (EOW), हाई कोर्ट (High Court) और विधानसभा तीनों स्तरों पर बड़ा राजनीतिक और कानूनी संघर्ष बन सकता है।










