Jharkhand ‘Abua Disom’ Budget 2026-27 : बोकारो जिला उपाध्यक्ष अनिल झा का तीखा हमला, ‘अबुआ दिशोम’ बजट जुमलों का पुलिंदा, बेरोजगारी पर एक शब्द नहीं

Jharkhand ‘Abua Disom’ Budget : अनिल झा का बयान, हजारों पद खाली, बेरोजगारी पर खामोशी, बजट सिर्फ कागजी घोषणाएं

Jharkhand ‘Abua Disom’ Budget : झारखंड में 2026-27 का ‘अबुआ दिशोम’ बजट पेश किया गया है। यह बजट राज्य की जनता के लिए समावेशी विकास का दावा करता है, लेकिन विपक्ष इसे महज घोषणाओं का पुलिंदा बता रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं।

बजट में क्या है और उसका आकार

झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,58,560 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है, जिसे ‘अबुआ दिशोम’ (हमारा झारखंड) नाम दिया गया है। यह पिछले साल के बजट (लगभग 1.45 लाख करोड़) से करीब 9% अधिक है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इसे सदन में पेश करते हुए कहा कि यह बजट गरीबों, किसानों, आदिवासियों और महिलाओं की आकांक्षाओं को पूरा करेगा। सरकार का दावा है कि यह हर वर्ग के चेहरे पर मुस्कान लाएगा और गरीबों के आंसू पोंछेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे 2050 तक समृद्ध झारखंड बनाने का रोडमैप बताया है।

महिलाओं और बच्चों पर विशेष फोकस

बजट में महिलाओं के लिए सबसे बड़ी घोषणा मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना है, जिसमें पात्र महिलाओं (18-50 वर्ष) को हर महीने 2,500 रुपये दिए जाएंगे। इसके लिए 14,065.57 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कुल मिलाकर महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए 45,004 करोड़ रुपये (बजट का लगभग 28%) अलग से रखे गए हैं।
इसके अलावा महिला किसान खुशहाली योजना के लिए 25 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने और आर्थिक स्वावलंबन पर जोर दे रही है।

शिक्षा और स्वास्थ्य एवं ग्रामीण विकास की क्या हैं घोषणाएं

सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर मजबूत फोकस दिखाया है। प्रमुख घोषणाएं इस प्रकार हैं:

  • 100 नए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस खोलना।
  • चतरा जिले में बाबासाहेब अंबेडकर के नाम पर नई राज्य विश्वविद्यालय स्थापित करना।
  • 750 अबुआ मेडिकल शॉप्स खोलना, जहां सस्ती दवाएं उपलब्ध होंगी।
  • कैंसर डिटेक्शन के लिए 5 मेडिकल कॉलेजों और 24 सदर अस्पतालों में टेस्ट सुविधाएं बढ़ाना।
  • 6 आईटीआई में एआई ट्रेनिंग शुरू करना।
  • अबुआ आवास योजना के लिए 4,100 करोड़ रुपये का प्रावधान।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अन्य योजनाएं।

बजट पर बोकारो उपाध्यक्ष अनिल झा का बयान

बोकारो जिला उपाध्यक्ष अनिल झा ने बजट की जमकर आलोचना की है। उनका कहना है कि यह बजट दिशाहीन और निराशाजनक है। प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:

  • बेरोजगारी पर बजट में एक भी शब्द नहीं। हजारों सरकारी पद खाली हैं, लेकिन नई भर्ती या रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं।।
  • किसानों के लिए कोई बड़ी राहत नहीं। झारखंड कृषि प्रधान राज्य है, जहां सिंचाई, बीज, खाद और बाजार की समस्याएं हैं, लेकिन इन पर कोई ध्यान नहीं।
  • महिलाओं के नाम पर 14 हजार करोड़ दिखाए जा रहे हैं, लेकिन यह पुरानी योजनाओं का पुनर्चक्रण लगता है। महिला किसान योजना के लिए सिर्फ 25 करोड़ नगण्य है।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, बिजली, पानी और उद्योग पर कोई बड़ा निवेश नहीं। पिछले बजटों के खर्च का हिसाब नहीं दिया गया, और नई घोषणाओं का क्रियान्वयन कैसे होगा, इस पर स्पष्टता नहीं।

अनिल झा ने इसे “जुमलों का बजट” कहा और आरोप लगाया कि सरकार पॉपुलिस्ट घोषणाओं से ध्यान भटका रही है, जबकि असली समस्याएं—बेरोजगारी, किसान संकट और विकास की कमी—को नजरअंदाज किया जा रहा है।

निष्कर्ष

सरकार इसे ऐतिहासिक और जनकल्याणकारी बता रही है, जो सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और 2050 के विजन पर केंद्रित है। लेकिन विपक्ष और कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बिना बेरोजगारी, किसान कल्याण और ठोस विकास के प्रावधान के यह बजट जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरेगा। असली तरक्की क्रियान्वयन से आएगी, न कि कागजी योजनाओं से।

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