बोकारो थर्मल में बसंती दुर्गा पूजा का समापन इस बार भावनाओं के गहरे रंगों के साथ हुआ। दशमी के दिन सेंट्रल मार्केट के पास बने पूजा पंडाल में ऐसा दृश्य देखने को मिला, जहां श्रद्धा, आस्था और विदाई का दर्द एक साथ उमड़ पड़ा। मां दुर्गा की आराधना के नौ दिनों के बाद जब विदाई का समय आया, तो हर चेहरा भावुक नजर आया।
सिंदूर खेला में झलकी परंपरा और उत्साह
दशमी के खास अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाई। मां के चरणों में अर्पित सिंदूर को उठाकर महिलाओं ने एक-दूसरे के माथे पर लगाया और शुभकामनाएं दीं। पूरे पंडाल में हंसी-खुशी और भक्ति का अनोखा माहौल बना रहा, जहां हर महिला मां दुर्गा से अपने परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती दिखी।

पान और सिंदूर से मां का श्रृंगार
पूजा की परंपराओं के अनुसार महिलाओं ने पान के पत्तों से मां दुर्गा के गालों को स्पर्श किया और उनके मांग व माथे पर सिंदूर अर्पित किया। यह पल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि हर महिला के लिए अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का भाव भी इसमें शामिल था।
भोग और श्रद्धा का समर्पण
इस खास मौके पर मां दुर्गा को पान, मिठाई और अन्य प्रसाद का भोग अर्पित किया गया। भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और हर कोई मां के दर्शन कर आशीर्वाद लेने को उत्सुक दिखा। वातावरण में शंख, घंटी और मंत्रों की ध्वनि गूंजती रही, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
“आबार एशो माँ…” के साथ मां दुर्गा को विदाई
जब विदाई की घड़ी आई, तो माहौल अचानक गमगीन हो गया। श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां दुर्गा को विदा किया और “आबार एशो माँ…” की पुकार के साथ अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना की। यह दृश्य इतना भावुक था कि कई लोगों की आंखें छलक उठीं।










