Bokaro Thermal : सकारात्मक ‘तनाव प्रबंधन’ शिक्षक के गुणात्मक विकास में सहायक है : सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी

तीन स्तरीय सत्रों में शिक्षकों को मिले व्यावहारिक टिप्स, सकारात्मक सोच और मानसिक स्वास्थ्य पर दिया गया जोर

Bokaro Thermal : डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल कथारा में चल रही तीन दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का दूसरा दिन शिक्षकों के लिए नए दृष्टिकोण और व्यवहारिक ज्ञान से भरपूर रहा। रविवार को आयोजित सत्रों में बाल-वाटिका से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर तक के शिक्षकों को अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षित किया गया। पूरे दिन का माहौल सीखने और आत्ममंथन से भरा नजर आया।

अभिभावकों को शिक्षित करने पर जोर

कार्यशाला की शुरुआत बाल-वाटिका और प्राथमिक स्तर के सत्र से हुई, जिसमें विद्यालय के प्राचार्य सह सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी डॉ. जी.एन. खान ने ‘अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक बनाने’ पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए स्कूल और अभिभावकों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है।

तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक उपाय

माध्यमिक स्तर के सत्र में डीएवी खलारी के प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार ने ‘तनाव प्रबंधन’ विषय पर शिक्षकों को सरल और प्रभावी उपाय बताए। उन्होंने कहा कि शिक्षक अगर मानसिक रूप से संतुलित रहेंगे तो कक्षा का वातावरण भी सकारात्मक बनेगा।

उच्चतर माध्यमिक स्तर: मानसिक स्वास्थ्य और स्वच्छता

उच्चतर माध्यमिक स्तर के शिक्षकों के लिए एस.टी.एन.सी. नागेंद्र प्रसाद ने ‘मानसिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता’ विषय पर सत्र लिया। उन्होंने मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए नियमित दिनचर्या, सकारात्मक सोच और आत्म-देखभाल को जरूरी बताया।

प्राचार्य का संदेश: सकारात्मक तनाव अपनाएं

कार्यशाला के मेजबान डॉ. जी.एन. खान ने दिन के अंत में कहा कि तनाव हर व्यक्ति के जीवन का हिस्सा है, लेकिन इसका सकारात्मक उपयोग ही सफलता की कुंजी है।
उन्होंने कहा कि—

  • सकारात्मक तनाव (Positive Stress) हमें बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है
  • नकारात्मक तनाव से बचने के लिए संतुलन जरूरी है
  • शिक्षक यदि तनाव पर नियंत्रण पा लें, तो वे आदर्श गुरु की भूमिका निभा सकते हैं

सहयोग और सहभागिता की सराहना

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों और विषय समन्वयकों की भूमिका को भी सराहा गया।
विशेष रूप से इनका योगदान उल्लेखनीय रहा:

  • डीएवी स्वांग की प्राचार्या डोलन चंपा बनर्जी
  • डीएवी खलारी के प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार
  • डीएवी ललपनिया के प्राचार्य तन्मय बनर्जी
  • डीएवी दुग्धा के प्राचार्य प्रसेनजीत पॉल

निष्कर्ष

कार्यशाला का दूसरा दिन यह साबित कर गया कि सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण से शिक्षक न केवल खुद को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को भी नई दिशा दे सकते हैं। सकारात्मक सोच और मानसिक संतुलन ही शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करने का मूल आधार है।

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