Breast Cancer 2050 Projection: लॉजी’ जर्नल में प्रकाशित ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी के अनुसार, 2050 तक दुनिया भर में हर साल ब्रेस्ट कैंसर के नए केस 3.5 मिलियन (35 लाख) से ज्यादा हो जाएंगे। वर्तमान में 2023 में यह संख्या करीब 2.3 मिलियन थी, यानी अगले 25 सालों में केस में एक तिहाई (33%) की बढ़ोतरी होगी। साथ ही, मौतों की संख्या भी 44% बढ़कर लगभग 14 लाख (1.4 मिलियन) तक पहुंच सकती है। यह रिपोर्ट 204 देशों के डेटा पर आधारित है और यह बताती है कि अगर रोकथाम, स्क्रीनिंग और इलाज की व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो स्थिति और भी खराब हो सकती है।
स्टडी के मुख्य आंकड़े क्या बताते हैं?/Breast Cancer 2050 Projection
रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर से करीब 7.64 लाख महिलाओं की मौत हुई थी। 2050 तक यह संख्या 13.7 लाख (रेंज 8.41 लाख से 20.2 लाख) तक पहुंच सकती है। केस की संख्या 2023 के 23 लाख से बढ़कर 2050 में 35.6 लाख (रेंज 22.9 लाख से 48.3 लाख) हो जाएगी। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से दुनिया की बढ़ती आबादी और उम्रदराज होने की वजह से है, हालांकि कई जगहों पर कैंसर की दर स्थिर है।

हाई-इनकम देशों में नए केस की दर स्थिर है और मौतें कम हो रही हैं, क्योंकि वहां बेहतर स्क्रीनिंग, समय पर जांच और आधुनिक इलाज उपलब्ध हैं। लेकिन लो- और मिडिल-इनकम देशों में स्थिति उल्टी है – नए केस और मौतें दोनों तेजी से बढ़ रही हैं। ये देश दुनिया के 27% नए केस देखते हैं, लेकिन 45% से ज्यादा मौतें और समय से पहले मौतें इन्हीं में होती हैं।
भारत में स्थिति और भी चिंताजनक
भारत में ब्रेस्ट कैंसर का बोझ पिछले 30 सालों में 5 गुना बढ़ गया है। 1990 के बाद से यह महिलाओं में सबसे आम कैंसर बन गया है, खासकर शहरों में। बदलती लाइफस्टाइल, शहरीकरण, कम उम्र में बच्चे पैदा न करना, ब्रेस्टफीडिंग कम होना, मोटापा और समय पर जांच न करवाना मुख्य कारण हैं। भारत में ज्यादातर महिलाएं आखिरी स्टेज में डायग्नोज होती हैं, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है और मौत की दर बढ़ जाती है।
आखिर क्यों बढ़ रहा है खतरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल साइंस में प्रगति के बावजूद कई देश बढ़ते मामलों के लिए तैयार नहीं हैं। गरीब देशों में रेडियोथेरेपी मशीनों की कमी, कीमोथेरेपी दवाओं की पहुंच कम होना और इलाज का महंगा होना बड़ी समस्या है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर प्रिवेंशन, स्क्रीनिंग और ट्रीटमेंट सिस्टम मजबूत नहीं किए गए तो मौतें 14 लाख तक पहुंच सकती हैं।
रोकथाम और जल्दी पता लगाना क्यों जरूरी?
डॉक्टरों का मानना है कि ब्रेस्ट कैंसर को जल्दी पकड़ना सबसे बड़ा हथियार है। हाई-इनकम देशों में नियमित मैमोग्राम और समय पर जांच से मौतें घटी हैं। भारत जैसे देशों में जागरूकता बढ़ानी होगी – खुद ब्रेस्ट की जांच (सेल्फ-एग्जामिनेशन), 40 साल से ऊपर महिलाओं को नियमित स्क्रीनिंग और लाइफस्टाइल में बदलाव जैसे वजन कंट्रोल, शराब-धूम्रपान कम करना, हेल्दी डाइट और व्यायाम।
विशेषज्ञों की राय
स्टडी के लेखकों और एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि बिना प्रभावी हस्तक्षेप के कई देश WHO के ग्लोबल ब्रेस्ट कैंसर इनिशिएटिव के टारगेट (2040 तक मौतों में 2.5% सालाना कमी) को हासिल नहीं कर पाएंगे। यह बोझ असमान रूप से गरीब देशों पर ज्यादा पड़ेगा।
निष्कर्ष
- 20 साल से ऊपर हर महिला महीने में एक बार ब्रेस्ट की खुद जांच करें।
- 40-50 साल की उम्र से नियमित मैमोग्राम करवाएं।
- फैमिली हिस्ट्री हो तो डॉक्टर से जल्दी बात करें।
- हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं – मोटापा कम करें, बच्चे पैदा करने और ब्रेस्टफीडिंग पर फोकस करें।










