Chaitra Navratri 2026 Kalash Sthapana: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज से शुरू हो गया है। इस बार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से आरंभ हुई, जो हिंदू नववर्ष का भी प्रतीक है। बोकारो थर्मल के केंद्रीय मार्केट में स्थित प्राचीन संकट मोचन मंदिर में विधि-विधान से कलश स्थापना की गई और नौ दिवसीय पूजा-अर्चना का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की गई, जिसमें भक्तों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और सुख-समृद्धि की कामना की।
सुबह से मंदिर में लगी भक्तों की लंबी कतार
सुबह से ही संकट मोचन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग दूर-दूर से मां के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचे। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच पुजारियों ने कलश स्थापना की रस्म पूरी की। कलश में जौ, पानी, सुपारी, सिक्के और अन्य सामग्री डालकर उसे मां दुर्गा के सामने स्थापित किया गया। इसके बाद पूरे मंदिर में एक आध्यात्मिक और भक्तिमय माहौल छा गया। भजन-कीर्तन और आरती की धुनों से पूरा इलाका गूंज उठा।

मां शैलपुत्री की पूजा से शुरू हुआ नवरात्रि उत्सव
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को पर्वतों की पुत्री माना जाता है और वे शक्ति का प्रतीक हैं। भक्तों ने लाल-पीले रंग के फूल, फल, मिठाई और अन्य प्रसाद चढ़ाकर मां की आराधना की। कई लोगों ने नवरात्रि के नौ दिनों का व्रत रखा और मां से मनोकामनाएं मांगीं। मंदिर में भोग भी लगाया गया, जिसके बाद से ही मंदिर में भक्तों में बांटा गया।
27 साल से लगातार चल रही है यह परंपरा
संकट मोचन मंदिर बोकारो थर्मल का एक प्रमुख आस्था केंद्र है। यहां पिछले 27 वर्षों से हर साल चैत्र नवरात्रि की पूजा बड़े उत्साह से की जाती है। मंदिर समिति और स्थानीय पुजारी बताते हैं कि यह परंपरा लगातार चल रही है और हर साल भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके अलावा, लगभग 45 वर्षों से इस मंदिर से अखाड़ा जुलूस निकाला जाता है, जो बोकारो थर्मल की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। नवरात्रि के दौरान यह जुलूस शहर में निकलता है और लोगों को भक्ति का संदेश देता है।
नौ दिनों तक चलेगी पूजा-अर्चना और भोग वितरण
नवरात्रि के इन नौ दिनों में मंदिर में रोजाना विशेष पूजा होगी। हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाएगी – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। साथ ही रोज भोग लगाया जाएगा और भक्तों में प्रसाद बांटा जाएगा। बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर पूजा में शामिल होते हैं। मंदिर दूर-दराज के इलाकों से आने वाले अखाड़ा दलों के लिए भी जाना जाता है, जो नवरात्रि में यहां डेरा डालते हैं और पूजा-अर्चना में हिस्सा लेते हैं।
मंदिर की खासियत और महत्व
संकट मोचन मंदिर संकटों को दूर करने वाले भगवान हनुमान को समर्पित है, लेकिन नवरात्रि के दौरान यहां मां दुर्गा की पूजा भी खास तौर पर होती है। यह मंदिर क्षेत्र के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। लोग मानते हैं कि यहां की पूजा से संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवरात्रि के समय मंदिर को फूलों, लाइटों और रंग-बिरंगे सजावट से सजाया जाता है, जो भक्तों को और आकर्षित करता है।
भक्तों का उत्साह और आस्था
इस साल भी भक्तों में जबरदस्त उत्साह दिखा। कई परिवार अपने बच्चों के साथ आए और उन्हें धार्मिक परंपराओं से जोड़ा। महिलाएं खासकर मां की पूजा में ज्यादा सक्रिय रहीं। व्रत रखने वाले भक्तों ने कहा कि नवरात्रि उनके लिए नई ऊर्जा और शांति का स्रोत है। मंदिर समिति ने सुरक्षा और व्यवस्था का पूरा इंतजाम किया ताकि भक्त बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें।
निष्कर्ष
चैत्र नवरात्रि शक्ति, भक्ति और आत्म-शुद्धि का अवसर है। यह पर्व हमें सिखाता है कि बुराई पर अच्छाई की जीत होती है। संकट मोचन मंदिर जैसे जगहों पर यह उत्सव स्थानीय संस्कृति और आस्था को मजबूत करता है। उम्मीद है कि आने वाले नौ दिन भक्तों के लिए सुख, शांति और समृद्धि लाएंगे।










