Champi Labour Cooperative Society CCL Kathara: मजदूरों की न्याय की पुकार,चांपी लेबर सोसाइटी ने CCL महाप्रबंधक को सौंपा मांग पत्र, मांगा तुरंत नियोजन

Champi Labour Cooperative Society CCL Kathara: सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद इंतजार,चांपी मजदूरों ने CCL कथारा को घेरा, मांग पत्र सौंपा

Champi Labour Cooperative Society CCL Kathara: बोकारो जिले के कथारा क्षेत्र में आज एक महत्वपूर्ण घटना घटी। चांपी लेबर कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के पदाधिकारियों और सदस्यों ने सीसीएल (Central Coalfields Limited) के कथारा क्षेत्र के महाप्रबंधक से मुलाकात की। उन्होंने एक औपचारिक मांग पत्र सौंपा, जिसमें मुख्य मांग है – अवाडी मजदूरों (जिन्हें कोर्ट ने पुरस्कार दिया है) को तुरंत स्थायी नौकरी दी जाए। यह मजदूर सालों से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब उनकी धैर्य की सीमा पार हो गई है।

यह मुद्दा सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि न्याय और हक की लड़ाई है। मजदूर कह रहे हैं कि सर्वोच्च न्यायालय तक का फैसला उनके पक्ष में है, फिर भी CCL प्रबंधन कार्रवाई नहीं कर रहा।

पुरानी लड़ाई, 1983 से चली आ रही है न्याय की मांग/Champi Labour Cooperative Society CCL Kathara

सोसाइटी के अनुसार, यह मामला बहुत पुराना है। साल 1983 से 1992 तक इन मजदूरों ने कथारा क्षेत्र के वर्कऑर्डर पर पोडा (Coal loading/unloading) का काम किया था। उस समय वे कॉन्ट्रैक्ट या अवाडी (awardee) मजदूर के रूप में काम करते थे। बाद में, जब स्थायी नौकरी की मांग हुई, तो ट्रिब्यूनल-1, धनबाद में केस दायर किया गया (केस नंबर 58/92)।

ट्रिब्यूनल ने मजदूरों के पक्ष में फैसला दिया। इस फैसले को चुनौती दी गई, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसे सही ठहराया और यथावत रखा। यानी कानूनी रूप से मजदूरों को स्थायी नियोजन का हक मिल चुका है। लेकिन सालों बीत गए, नियुक्ति पत्र नहीं आया।

सोसाइटी के सचिव चंदन सिंह गौतम ने बताया कि पहले भी कई बार पत्र लिखे गए, मीटिंग के लिए समय मांगा गया, लेकिन प्रबंधन की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं मिला। अब मजदूर थक चुके हैं और सीधे महाप्रबंधक से मिलकर मांग पत्र सौंपा है।

मांग पत्र में क्या-क्या लिखा है?

मांग पत्र साफ-साफ कहता है:

  • न्यायालय के आदेश का तुरंत पालन हो।
  • अवार्ड प्राप्त मजदूरों को जल्द से जल्द स्थायी नियोजन दिया जाए।
  • लंबित मामलों में कोई और देरी न हो।

मजदूरों का कहना है कि वे सालों से इंतजार में हैं। परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है, बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं, स्वास्थ्य खराब हो रहा है। वे कहते हैं, “हमें हमारा हक चाहिए, अब और इंतजार नहीं सहेंगे।”

बैठक में कौन-कौन शामिल थे?

इस महत्वपूर्ण मुलाकात में सोसाइटी के कई बड़े पदाधिकारी और मजदूर मौजूद थे। इनमें शामिल थे:

  • दिलीप कुमार मुर्मू (अध्यक्ष, चांपी लेबर कोऑपरेटिव सोसाइटी)
  • चंदन कुमार उर्फ चंदन सिंह गौतम (सचिव)
  • छोटेलाल रजक (महासचिव)
  • महेश कुमार
  • शिवशंकर राम
  • वासुदेव सोरेन
  • भुवनेश्वर यादव
  • उमाशंकर सोरेन
  • रामचंद्र पासवान
  • हीरालाल मांझी
  • वासुदेव राम

ये सभी मजदूर सदस्य हैं, जो सालों से इस लड़ाई में साथ हैं। उनकी एकजुटता दिखाती है कि यह सिर्फ कुछ लोगों की नहीं, बल्कि पूरी सोसाइटी की लड़ाई है।

सोशल मीडिया पर भी खबर फैल रही है

सोसाइटी ने सोशल मीडिया पर अपडेट शेयर किया है। एक पोस्ट में लिखा है:

न्याय की मांग: चांपी लेबर कोऑपरेटिव सोसाइटी ने CCL कथारा महाप्रबंधक को घेरा। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद अवाडी मजदूरों का नियोजन न होने पर नाराजगी जताई। मजदूरों ने साफ कहा— ‘हमें हमारा हक चाहिए!'”

यह पोस्ट लोगों के बीच तेजी से फैल रही है। कई लोग मजदूरों का साथ दे रहे हैं और CCL प्रबंधन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

मजदूरों की स्थिति और चुनौतियां

CCL जैसे बड़े कोल कंपनी में काम करने वाले मजदूरों की जिंदगी पहले से ही मुश्किल होती है। खदान का काम खतरनाक है, कमाई कम, लेकिन स्थायी नौकरी मिलने पर पेंशन, मेडिकल, बच्चों की पढ़ाई जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इन मजदूरों को यह सब नहीं मिल रहा, जबकि कानून उनके पक्ष में है।

यह मामला झारखंड के कोल क्षेत्रों में आम है, जहां कई पुराने मजदूर अवाडी या कॉन्ट्रैक्ट से स्थायी होने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार और कंपनी को ऐसे मामलों में तेजी से फैसला लेना चाहिए, ताकि मजदूरों का भरोसा बना रहे।

निष्कर्ष

अभी महाप्रबंधक ने मांग पत्र लिया है। उम्मीद है कि जल्द वार्ता होगी और मजदूरों को न्याय मिलेगा। अगर नहीं हुआ, तो मजदूर आगे आंदोलन की तैयारी में हैं। चांपी लेबर कोऑपरेटिव सोसाइटी जैसे संगठन मजदूरों के हक के लिए मजबूत आवाज बन रहे हैं।

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