China Invention Guns First Use: आज दुनिया में बंदूकें हर जगह दिखती हैं – पुलिस, सेना, फिल्मों में। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बंदूक का आविष्कार सबसे पहले किस देश ने किया? यह क्रेडिट जाता है चीन को। लगभग 1000 साल पहले, 9वीं सदी में चीन के कुछ ताओवादी रसायनज्ञ अमरत्व की दवा (एलिक्सिर ऑफ लाइफ) बनाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कोयला, नमक (साल्टपीटर या पोटैशियम नाइट्रेट) और गंधक को मिलाया। नतीजा हुआ बारूद (गनपाउडर), जिसे चीन में ‘हुओ याओ’ (आग की दवा) कहा जाता है। उन्हें नहीं पता था कि यह मिश्रण न सिर्फ दवा बनेगा, बल्कि दुनिया की सबसे घातक हथियारों की शुरुआत करेगा।
बारूद से पहली हथियार, फायर लांस की शुरुआत/China Invention Guns First Use
बारूद की खोज के बाद सॉन्ग राजवंश (960-1279 ई.) ने इसे युद्ध में इस्तेमाल करना शुरू किया। सबसे पहले इसे ‘फायर लांस’ (हुओ कियांग) के रूप में इस्तेमाल किया गया। यह एक बांस या धातु की नली होती थी, जिसे भाले या लंबे हथियार के सिरे पर बांधा जाता था। नली में बारूद भरकर आग लगा दी जाती थी, तो यह आग, धुआं और छोटे-छोटे टुकड़े (श्रैपनेल जैसे पोर्सिलेन के टुकड़े या लोहे के गोले) दुश्मन पर फेंकती थी। यह एक तरह का छोटा फ्लेमथ्रोअर था, जो दुश्मन को जलाता और डराता था।

फायर लांस की पहली पुष्टि वाली तस्वीर 950 ई. के आसपास की है, लेकिन युद्ध में इसका इस्तेमाल सबसे पहले 1132 ई. में दर्ज हुआ। यह था डेआन की घेराबंदी (Siege of De’an), जो आज के हुबेई प्रांत में अनलू शहर के पास हुआ। सॉन्ग राजवंश की सेना ने जिन राजवंश (जुर्चेन लोग, जिन्हें जीन भी कहते हैं) के हमले का मुकाबला किया। सॉन्ग सैनिकों ने फायर लांस से दुश्मन की सीढ़ियां और घेराबंदी के सामान को जलाया, और हमलावरों को पीछे धकेला। इतिहासकार इसे बंदूक जैसी हथियारों का पहला युद्ध इस्तेमाल मानते हैं।
मंगोलों के खिलाफ बड़े पैमाने पर इस्तेमाल
फायर लांस और बारूद आधारित हथियारों का असली बड़ा इस्तेमाल मंगोल आक्रमणों के खिलाफ हुआ। मंगोल, चंगेज खान और उसके बाद वालों के नेतृत्व में, उत्तर से चीन पर बार-बार हमला कर रहे थे। वे तेज घुड़सवार थे और बड़े शहरों को तबाह करते थे। सॉन्ग सेना ने फायर लांस, ‘फ्लाइंग फायर’ तीर (बारूद से भरे तीर जो उड़ते हुए आग बरसाते थे) और शुरुआती हैंड कैनन का इस्तेमाल किया।
1232 में मंगोलों ने जिन राजधानी काइफेंग पर हमला किया, जहां बारूद हथियारों का इस्तेमाल हुआ। 1233 में जिन सैनिकों ने मंगोल कैंप पर फायर लांस से हमला किया और उन्हें भगा दिया। लेकिन बाद में मंगोलों ने ही चीन पर कब्जा कर लिया और बारूद की तकनीक सीखी। 1280 के आसपास चीन में मिली सबसे पुरानी हैंड कैनन (हाथ से पकड़ने वाली छोटी तोप) हेilongjiang प्रांत में मिली, जो 1288 से पहले की है।
चीन से दुनिया में फैली तकनीक
चीन ने बारूद से बम, रॉकेट, ग्रेनेड और शुरुआती तोपें भी बनाईं। मंगोलों के हमलों और विजयों के कारण यह तकनीक मध्य एशिया, भारत, मध्य पूर्व और यूरोप तक पहुंची। यूरोप में 14वीं सदी में बंदूकें आईं, लेकिन चीन ने सदियों पहले ही इनका इस्तेमाल शुरू कर दिया था। शुरुआती बंदूकें छोटी, भारी और कम सटीक होती थीं, लेकिन इन्होंने जंग की तस्वीर बदल दी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आविष्कार?
बारूद और बंदूक ने न सिर्फ युद्ध बदले, बल्कि समाज, साम्राज्य और इतिहास को भी प्रभावित किया। यूरोप में यह तकनीक पहुंचने के बाद उपनिवेशवाद फैला, बड़े साम्राज्य बने। लेकिन मूल शुरुआत चीन से हुई, जहां अमरत्व की तलाश में बारूद बना और सबसे पहले जिन (जुर्चेन) और मंगोल आक्रमणकारियों के खिलाफ इस्तेमाल हुआ।










