Surya Kant NCERT Suo Motu: देश की सर्वोच्च अदालत ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 की नई सोशल साइंस किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ के जिक्र पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को खुले अदालत में कहा कि वे किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सु मोटो संज्ञान लिया है और जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया है। यह विवाद तब भड़का जब सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मुद्दे को कोर्ट के सामने उठाया।
किताब में क्या लिखा है? ‘भ्रष्टाचार’ पर पहली बार चर्चा/Surya Kant NCERT Suo Motu
एनसीईआरटी की नई क्लास 8 सोशल साइंस टेक्स्टबुक में चैप्टर “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” (The Role of the Judiciary in Our Society) शामिल है। इसमें पहली बार कक्षा 8 के स्तर पर न्यायपालिका की चुनौतियों पर विस्तार से बात की गई है। किताब में लिखा है कि भ्रष्टाचार, लंबित मामलों की भारी संख्या और जजों की कमी न्यायिक प्रणाली के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।

- लंबित मामलों के आंकड़े: सुप्रीम कोर्ट में 81,000, हाई कोर्ट्स में 62.40 लाख और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स में 4.70 करोड़ से ज्यादा मामले लंबित हैं।
- भ्रष्टाचार का जिक्र: किताब में कहा गया है कि न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं, जो गरीबों और वंचितों के लिए न्याय तक पहुंच को और मुश्किल बनाते हैं। हालांकि, किताब यह भी बताती है कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल और भ्रष्टाचार के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
- पूर्व CJI बीआर गवई का उद्धरण: किताब में पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई के जुलाई 2025 के बयान का जिक्र है। उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और कदाचार के मामले जनता के विश्वास को प्रभावित करते हैं। विश्वास बहाल करने के लिए त्वरित, निर्णायक और पारदर्शी कार्रवाई जरूरी है। “पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्वपूर्ण गुण हैं।”
किताब में यह भी बताया गया है कि जजों को आचार संहिता का पालन करना पड़ता है और CPGRAMS पोर्टल के जरिए 2017-2021 में 1,600 से ज्यादा शिकायतें आईं।
CJI सूर्यकांत का गुस्सा: यह कैलकुलेटेड मूव लगता है
सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा, “क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार सिखाया जा रहा है। यह गंभीर चिंता की बात है।” अभिषेक मनु सिंघवी और अन्य वकीलों ने भी समर्थन किया।
CJI सूर्यकांत ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैंने मामले पर संज्ञान लिया है। किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे। कानून अपना रास्ता अपनाएगा।” उन्होंने आगे कहा, “यह एक कैलकुलेटेड और गहरी साजिश लगती है। मैं ज्यादा नहीं कहूंगा, लेकिन मैं जानता हूं इसे कैसे हैंडल करना है।” CJI ने वकीलों को आश्वासन दिया कि सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई करेगा।
जस्टिस जोयमाला बागची ने इसे संविधान की बेसिक स्ट्रक्चर पर हमला बताया।
क्यों उठा विवाद? पुरानी किताब vs नई किताब
पुरानी किताबों में न्यायपालिका की संरचना, कोर्ट की हायरार्की और न्याय तक पहुंच पर फोकस था। नई किताब में चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा जोड़ी गई है। कई लोग इसे पारदर्शिता का कदम मानते हैं, लेकिन लीगल कम्युनिटी इसे संस्था की छवि खराब करने वाला मान रही है। वकीलों का कहना है कि इतनी छोटी उम्र में बच्चों को ऐसी बातें सिखाना गलत है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख: संस्था की गरिमा सर्वोपरि
CJI ने कहा कि पूरे देश के वकील और जज इस मुद्दे से चिंतित हैं। “संस्था के प्रमुख के रूप में मैं अपनी ड्यूटी निभाऊंगा।” सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की आलोचना हो सकती है, लेकिन बदनामी नहीं। यह मामला जल्द सुनवाई के लिए लिस्ट होगा।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
कुछ एजुकेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि किताब में वास्तविक चुनौतियों का जिक्र छात्रों को जागरूक बनाएगा। लेकिन लीगल सर्कल में इसे संवेदनशील मुद्दा माना जा रहा है। आपको बता दें कि NCERT की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।










