Cyber Scam In The Name Of Chandrachud: डिजिटल युग में साइबर अपराध किस हद तक खतरनाक और चौंकाने वाले रूप ले चुके हैं, इसका ताजा उदाहरण महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजधानी मुंबई (Mumbai) से सामने आया है। यहां साइबर ठगों ने देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ (Justice D.Y. Chandrachud) के नाम का इस्तेमाल कर एक महिला से करीब 3.75 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। वर्चुअल सुनवाई, मनी लॉन्ड्रिंग का डर और जमानत का झांसा- इन सबके जरिए ठगों ने महिला को मानसिक रूप से तोड़ा और आर्थिक रूप से लूट लिया। यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर कैसे रची गई यह साजिश, कौन हैं आरोपी और पुलिस क्या चेतावनी दे रही है तो चलिए जानते हैं…
वर्चुअल कोर्ट और मनी लॉन्ड्रिंग का डर/Cyber Scam In The Name Of Chandrachud
मुंबई (Mumbai) की रहने वाली एक महिला को साइबर ठगों ने खुद को उच्च न्यायिक अधिकारी बताकर संपर्क किया। आरोपियों ने दावा किया कि महिला का नाम मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में सामने आया है और उसके खिलाफ कार्रवाई होने वाली है। खुद को ‘जस्टिस चंद्रचूड़’ बताने वाले व्यक्ति ने वर्चुअल सुनवाई का नाटक रचा, जिससे महिला को यह पूरा मामला असली लगा। महिला के निर्दोष होने की बात कहने पर ठगों ने जमानत दिलाने और जांच से राहत देने का भरोसा दिया। इसके बदले महिला से उसकी संपत्ति, निवेश और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज मांगे गए। इस पूरी प्रक्रिया में डर और दबाव का इस्तेमाल कर महिला को लगातार मानसिक तनाव में रखा गया, जिससे वह ठगों के जाल में फंसती चली गई।

₹3.75 करोड़ ट्रांसफर, ऑडिट का झांसा
जांच में सामने आया कि अगस्त से अक्टूबर के बीच महिला ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 3.75 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। ठगों ने दावा किया था कि यह रकम केवल “ऑडिट प्रक्रिया” के लिए है और जांच पूरी होते ही वापस कर दी जाएगी। लेकिन समय बीतने के बावजूद जब पैसा वापस नहीं मिला, तब महिला को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उसने मुंबई पुलिस (Mumbai Police) से संपर्क किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी ज्वाइंट सीपी लखमी गौतम (Joint CP Lakhmi Gautam) और डीसीपी साइबर पुलिस पुरुषोत्तम कराड (DCP Cyber Police Purushottam Karad) को सौंपी गई। तकनीकी जांच और डिजिटल ट्रेल के आधार पर पुलिस ने सूरत (Surat) से 46 वर्षीय आरोपी जितेंद्र बियानी (Jitendra Biyani) को गिरफ्तार किया।
‘डिजिटल अरेस्ट’ का जाल
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने ठगी से मिली रकम का इस्तेमाल अन्य साइबर अपराधों में किया। एक अन्य मामले में 86 वर्षीय महिला को सात दिनों तक तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर उससे 1.1 करोड़ रुपये वसूले गए। ठगों ने खुद को पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED – Enforcement Directorate) का अधिकारी बताकर फर्जी दस्तावेज और नकली गिरफ्तारी वारंट भेजे। पुलिस ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई प्रक्रिया मौजूद नहीं है। साइबर अपराधी सिर्फ डर और भ्रम फैलाकर लोगों को ठगने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे बुजुर्ग और आम नागरिक आसानी से उनके शिकार बन रहे हैं।
पुलिस की चेतावनी और कार्रवाई
मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने इस मामले के बाद आम लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या संदेश पर तुरंत भरोसा न करें, चाहे सामने वाला खुद को जज, पुलिस अधिकारी या किसी एजेंसी का प्रतिनिधि ही क्यों न बताए। बिना सत्यापन के कभी भी बैंक, यूपीआई या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। केंद्र सरकार (Central Government) ने साइबर ठगी से निपटने के लिए I4C डेटाबेस और ‘सस्पेक्ट सर्च’ जैसी सुविधाएं शुरू की हैं, जिनसे संदिग्ध नंबरों और ईमेल की जांच की जा सकती है। किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें या 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें।










