Dalmau Teacher Training: डलमऊ (रायबरेली) शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और स्कूलों को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रायबरेली जिले के विकास खंड डलमऊ में विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) के सचिवों यानी प्रधानाध्यापकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा और इसमें शामिल सभी लोगों ने काफी कुछ नया सीखा।
यह प्रशिक्षण शिविर खंड शिक्षा अधिकारी श्री नंदलाल की अध्यक्षता में हुआ। इसका मुख्य मकसद सरकारी स्कूलों यानी परिषदीय विद्यालयों के प्रबंधन को मजबूत करना और बच्चों को मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाना था। आज के समय में स्कूल सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वे गांव-समाज के विकास का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसी सोच को ध्यान में रखकर यह प्रशिक्षण रखा गया था।

कार्यक्रम का शुभारंभ किसने किया/Dalmau Teacher Training
कार्यक्रम की शुरुआत खंड शिक्षा अधिकारी श्री नंदलाल ने की। उन्होंने सभी प्रधानाध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यालय प्रबंध समिति के सचिव यानी प्रधानाध्यापक स्कूल के सबसे बड़े जिम्मेदार व्यक्ति होते हैं। स्कूल का हर छोटा-बड़ा विकास इन्हीं के हाथ में होता है। इसलिए इनकी भूमिका बहुत अहम है।
श्री नंदलाल ने जोर देकर कहा, “स्कूल में होने वाले हर काम में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। पैसा आए, चाहे सरकारी अनुदान हो या कोई अन्य स्रोत से, उसका सही इस्तेमाल होना जरूरी है। विकास के कामों को तेजी से पूरा करना हम सबका पहला कर्तव्य है। अगर हम मिलकर काम करेंगे तो हमारे स्कूल बेहतर होंगे, बच्चे अच्छी शिक्षा पाएंगे और समाज भी आगे बढ़ेगा।”
उनके इस संबोधन से सभी सचिवों में नई ऊर्जा और जिम्मेदारी का भाव जागा। उन्होंने समझा कि सिर्फ पढ़ाना ही उनका काम नहीं है, बल्कि स्कूल को समग्र रूप से संभालना और उसका विकास करना भी उतना ही जरूरी है।
विशेषज्ञों की टीम ने दी उपयोगी जानकारी
इस प्रशिक्षण में चार मुख्य विशेषज्ञों ने संदर्भ दाता (रिसोर्स पर्सन) के रूप में हिस्सा लिया। इन लोगों ने बहुत ही सरल और व्यावहारिक तरीके से विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। ये विशेषज्ञ थे –
- श्री शिव प्रकाश
- श्री कपिल गुप्ता
- श्री शिवकुमार दीक्षित
- श्री शैलेंद्र कुमार
इन विशेषज्ञों ने मुख्य रूप से तीन बड़े विषयों पर फोकस किया:
- विद्यालय विकास योजना (SDP) – स्कूल के लिए एक साल की स्पष्ट योजना कैसे बनाई जाए, उसमें क्या-क्या शामिल होना चाहिए, और उसे कैसे लागू किया जाए।
- बजट का सही और पूरा इस्तेमाल – स्कूल को मिलने वाला पैसा कहां-कहां खर्च करना है, बिल कैसे रखें, और कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए क्या सावधानियां बरतें।
- सामुदायिक सहभागिता – गांव के लोग, अभिभावक और समाज को स्कूल के कामों में कैसे जोड़ा जाए ताकि सब मिलकर स्कूल को बेहतर बनाएं।
इन विषयों पर चर्चा इतनी आसान भाषा में हुई कि सभी प्रधानाध्यापकों को अच्छी तरह समझ आ गया। कई सवाल-जवाब भी हुए, जिससे लोगों के मन में जो भी शंकाएं थीं, वे दूर हो गईं।
निपुण भारत मिशन पर खास जोर
प्रशिक्षण में अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) श्री वीरेंद्र सिंह और श्री राजेश कुमार भी मौजूद थे। इन्होंने “निपुण भारत मिशन” के बारे में विस्तार से बताया। यह मिशन केंद्र सरकार का बहुत बड़ा अभियान है, जिसका लक्ष्य है कि कक्षा 3 तक के हर बच्चे को पढ़ना, लिखना और बुनियादी गणित अच्छे से आना चाहिए।
दोनों ARP ने कहा कि कक्षा में पढ़ाने का तरीका बदलना होगा। बच्चों को रट्टा मारने की बजाय समझाकर पढ़ाना चाहिए। खेल-खेल में सीखना, कहानियों के जरिए पढ़ाना और रोजाना अभ्यास करवाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कई आसान तरीके और गतिविधियां बताईं, जिन्हें शिक्षक क्लास में तुरंत इस्तेमाल कर सकते हैं।
क्षेत्र के शिक्षकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति
इस एक दिवसीय शिविर में डलमऊ क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापक और शिक्षक बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने कार्यक्रम को बहुत उपयोगी बताया। कई शिक्षकों ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण से पहले उन्हें कई बातों की पूरी जानकारी नहीं थी, लेकिन अब वे स्कूल में नए तरीके से काम शुरू कर सकेंगे।
निष्कर्ष
यह प्रशिक्षण सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास था। जब प्रधानाध्यापक और शिक्षक जागरूक और प्रशिक्षित होंगे, तो बच्चे बेहतर शिक्षा पाएंगे।










