Delhi Water Crisis Solution: यमुना पर तीन बड़े बांधों को हरी झंडी! दिल्ली का जल संकट अब खत्म, 25 साल तक पानी की कोई कमी नहीं

Delhi Water Crisis Solution: केंद्र का बड़ा फैसला: लखवार, रेणुकाजी और किशाऊ बांधों से दिल्ली का पानी संकट हमेशा के लिए खत्म

Delhi Water Crisis Solution: दिल्ली की बढ़ती आबादी और जल संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और लंबे समय से अटका फैसला लिया है। यमुना नदी और उसकी सहायक नदियों पर तीन प्रमुख बांध परियोजनाओं—लखवार, रेणुकाजी और किशाऊ—को नई गति मिल गई है। ये प्रोजेक्ट दशकों से लंबित थे, लेकिन हाल ही में केंद्र सरकार ने इन्हें फिर से मंजूरी दी और आगे बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन बांधों के बनने से दिल्ली का दीर्घकालिक जल संकट दूर हो सकता है और यमुना में साल भर पर्याप्त पर्यावरणीय बहाव (ई-फ्लो) सुनिश्चित होगा।

यह कदम दिल्ली के लिए राहत की खबर है, जहां गर्मियों में पानी की कमी हर साल एक बड़ी समस्या बन जाती है। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) और अन्य एजेंसियां पहले से ही यमुना की सफाई और पानी प्रबंधन पर काम कर रही हैं, लेकिन ऊपरी इलाकों में पानी का भंडारण न होने से समस्या बनी रहती है। अब केंद्र के इस फैसले से उम्मीद है कि अगले 5-7 सालों में पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी और अगले 25 सालों तक दिल्ली की पेयजल जरूरतें पूरी हो सकेंगी।

तीनों बांधों की मुख्य विशेषताएं/Delhi Water Crisis Solution

पहला प्रोजेक्ट है लखवार बांध।

यह उत्तराखंड के देहरादून जिले में यमुना नदी पर लोहारी गांव के पास बनाया जाएगा। यह 204 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध होगा, जिसमें 40 किलोमीटर लंबा जलाशय बनेगा। इसकी क्षमता 330 मिलियन क्यूबिक मीटर से ज्यादा है। यह प्रोजेक्ट पहले से आंशिक रूप से बन चुका है—करीब 12.61% काम पूरा हो चुका है। इसमें 300 मेगावाट बिजली उत्पादन की भी क्षमता होगी, जबकि दिल्ली को लगभग 135 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) पानी मिल सकता है। पानी का बंटवारा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच होगा।

दूसरा है रेणुकाजी बांध।

यह हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना की सहायक नदी गिरी पर बनेगा। यह 148 मीटर ऊंचा रॉक-फिल्ड बांध होगा। इस प्रोजेक्ट से दिल्ली को 23 क्यूमेक (क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड) पानी मिलेगा, जो लगभग 275 एमजीडी के बराबर है। यह टेंडरिंग स्टेज में पहुंच चुका है और जल्द निर्माण शुरू हो सकता है।

तीसरा प्रोजेक्ट किशाऊ बांध है।

किशाऊ बांध जो टोंस नदी (यमुना की सहायक) पर उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बनेगा। यह 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट बांध होगा और दिल्ली को अतिरिक्त 372 एमजीडी पानी उपलब्ध करा सकता है। यह अभी इंटर-स्टेट समझौते और मंजूरी के चरण में है।

इन तीनों बांधों के मिलकर दिल्ली की पेयजल जरूरतों को अगले कई दशकों तक संभालने की क्षमता है। कुल मिलाकर ये प्रोजेक्ट यमुना बेसिन में पानी की उपलब्धता बढ़ाएंगे, गैर-मानसून सीजन में बहाव बनाए रखेंगे और बाढ़ नियंत्रण में भी मदद करेंगे।

दिल्ली का जल संकट, पुरानी समस्या, नया समाधान

दिल्ली की आबादी 2 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है और पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। यमुना नदी दिल्ली में सिर्फ 2% हिस्सा बहती है, लेकिन यहां प्रदूषण दिल्ली से 76-98% आता है। बात करें अगर ऊपरी इलाकों की तो नेहरू और बैराज से पानी डाइवर्ट होता है जिससे दिल्ली तक पहुंचते पहुंचते बहन काफी कम हो जाता है। गर्मियों के मौसम में यह कभी-कभी पानी 10% से भी कम रह जाता है।

1994 के यमुना जल बंटवारे समझौते में दिल्ली को कम हिस्सा मिला था, जो इन बांधों के बनने पर निर्भर था। लेकिन दशकों तक प्रोजेक्ट अटके रहे। अब केंद्र सरकार ने इन परियोजनाओं को रिवाइव करके दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच पानी बंटवारे को मजबूत किया है। हाल ही में अमित शाह, रेखा गुप्ता और अन्य मंत्रियों की बैठक में इन पर चर्चा हुई और तेजी से काम शुरू करने के निर्देश दिए गए।

पर्यावरण और अन्य फायदे

ये बांध सिर्फ पानी नहीं, बल्कि पर्यावरणीय बहाव भी सुनिश्चित करेंगे। यमुना में ई-फ्लो बढ़ने से प्रदूषण कम होगा, क्योंकि ज्यादा पानी से गंदगी पतला हो जाएगी। साथ ही, हाइड्रोपावर से बिजली बनेगी और सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्ध होगा। केंद्र ने हाल में हथनीकुंड और ओखला बैराज पर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग स्टेशन लगाने का फैसला भी लिया है, ताकि बहाव और गुणवत्ता पर नजर रखी जा सके।

चुनौतियां और उम्मीदें

हालांकि इन प्रोजेक्ट्स में पर्यावरणीय प्रभाव, विस्थापन और इंटर-स्टेट सहमति जैसी चुनौतियां हैं, लेकिन केंद्र के मजबूत कदम से उम्मीद है कि काम तेजी से चलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बांधों के साथ-साथ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का अपग्रेड और ड्रेनेज सिस्टम सुधार भी जरूरी है। दिल्ली सरकार पहले से ही ओखला, यमुना विहार जैसे एसटीपी को अपग्रेड कर रही है।

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