Karam Mahotsav: करम महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब, जयराम महतो के पहुंचते ही उत्साहित हुए लोग; झूमर नृत्य ने बांधा समां

दुलमी के बाजारटांड में पारंपरिक रंग में रंगा करम महोत्सव, विधायक जयराम महतो ने नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने पर दिया जोर

Karam Mahotsav: रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड स्थित बाजारटांड में आयोजित करम महोत्सव में शुक्रवार को लोगों की भारी भीड़ जुटी। कार्यक्रम में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय अध्यक्ष सह डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उनके पहुंचते ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के बीच पूरा माहौल झारखंडी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।

पारंपरिक वेशभूषा में बच्चियों ने पेश किया झूमर

करम महोत्सव के दौरान दुलमी क्षेत्र की बच्चियों ने पारंपरिक वेशभूषा में झारखंडी झूमर नृत्य प्रस्तुत किया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी बच्चियों ने गीत और नृत्य के माध्यम से स्थानीय संस्कृति की खूबसूरती को सामने रखा। नृत्य प्रस्तुति के दौरान कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। ग्रामीण परिवेश में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने लोगों को अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश भी दिया।

करम पर्व सिर्फ त्योहार नहीं, संस्कृति की पहचान: जयराम महतो

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने कहा कि करम पर्व झारखंड के ग्रामीण समाज की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। पहले यह पर्व मुख्य रूप से गांवों और ग्रामीण इलाकों तक सीमित रहता था, लेकिन अब शहरों में भी इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में अपनी परंपराओं को बचाए रखना समाज की जिम्मेदारी है।

नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ना जरूरी

जयराम महतो ने कहा कि आधुनिकता के दौर में कई पारंपरिक रीति-रिवाज धीरे-धीरे लोगों के जीवन से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में करम जैसे पर्व आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति और विरासत से परिचित कराने का माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, नृत्य और रीति-रिवाजों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

बाहरी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव पर भी जताई चिंता

विधायक ने अपने संबोधन में झारखंडी समाज की संस्कृति और परंपरा पर पड़ रहे बाहरी प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बीच अपनी स्थानीय पहचान को बनाए रखना जरूरी है। उनका कहना था कि यदि नई पीढ़ी को अपनी भाषा, पर्व, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी दी जाए तो झारखंड की पहचान को मजबूती से आगे बढ़ाया जा सकता है।

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करम पर्व के महत्व की दी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान जयराम महतो ने लोगों को करम पर्व के धार्मिक और सामाजिक महत्व के बारे में भी बताया। उन्होंने समझाया कि करम पर्व कब और क्यों मनाया जाता है तथा इसके पीछे की लोक परंपराओं का समाज में क्या महत्व है। उन्होंने लोगों से अपील की कि पर्व को केवल उत्सव तक सीमित न रखें, बल्कि इसके माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करें।

JLKM कार्यकर्ताओं की रही अहम भूमिका

करम महोत्सव के सफल आयोजन में दुलमी प्रखंड के झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक कार्यक्रमों के बीच करम महोत्सव ने क्षेत्र में सामुदायिक एकजुटता और झारखंडी संस्कृति के प्रति जुड़ाव का माहौल बनाया।

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