स्टेशन क्लब में गूँजी खुशियाँ,DVC ने सैकड़ों को दिए मुफ्त सुनने के यंत्र

डीवीसी की CSR पहल, बोकारो थर्मल में सैकड़ों बुजुर्गों को मिले निःशुल्क हियरिंग एड

Dvc Bokaro: बोकारो थर्मल (झारखंड) में दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) ने एक बार फिर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) को निभाते हुए दिल छू लेने वाला काम किया है। बुधवार को स्थानीय स्टेशन क्लब के परिसर में एक बड़ा निःशुल्क श्रवण जांच शिविर और हियरिंग एड (श्रवण यंत्र) वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस शिविर में सैकड़ों लोगों की सुनने की जांच की गई और जिन्हें जरूरत थी, उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले सुनने के यंत्र मुफ्त में दिए गए। इस कार्यक्रम से कई बुजुर्गों और युवाओं के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई, क्योंकि अब वे फिर से अपने अपनों की आवाजें साफ सुन पाएंगे।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से

शिविर का शुभारंभ मुख्य अतिथियों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इनमें एम. श्रीवास्तव, ए. ए. कुजुर, मनीष कुमार चौधरी, चंदना मिश्रा, गिरिजा प्रसाद और विश्वनाथ महतो जैसे प्रमुख लोग शामिल थे। इनकी मौजूदगी से कार्यक्रम में और भी उत्साह बढ़ गया। डीवीसी के बोकारो ताप विद्युत केंद्र (BTPS) के तहत यह पूरा आयोजन हुआ, जिसमें अस्पताल और CSR टीम ने मिलकर कमाल का काम किया।

सुबह से ही स्टेशन क्लब में भारी भीड़ जुट गई थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बुजुर्ग, युवा और अन्य लोग लंबी कतारों में जांच करवाने आए। कई लोगों ने बताया कि सुनने की समस्या के कारण वे लंबे समय से परेशान थे। महंगे हियरिंग एड खरीदना उनके बस की बात नहीं थी। लेकिन डीवीसी की इस मुफ्त पहल ने उन्हें नई जिंदगी दी है।

विशेषज्ञों ने की गहन जांच

शिविर में आए विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीशियनों की टीम ने अत्याधुनिक मशीनों की मदद से हर व्यक्ति की सुनने की क्षमता की पूरी जांच की। जांच के दौरान पता चला कि कई लोगों में सुनने की कमी है। जांच के तुरंत बाद ही उन लोगों को मौके पर ही अच्छी क्वालिटी के श्रवण यंत्र फिट कर दिए गए। यंत्र देने के साथ-साथ विशेषज्ञों ने मरीजों को बताया कि इन यंत्रों का रखरखाव कैसे करें, बैटरी कब बदलें, कानों की सफाई कैसे रखें और रोजमर्रा की सुरक्षा के टिप्स भी दिए।

यह सिर्फ यंत्र बांटने तक सीमित नहीं था। डीवीसी प्रबंधन ने कहा कि उनका मकसद समाज के हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है। खासकर वे लोग जो सुनने की समस्या से अलग-थलग महसूस करते थे, उनके लिए यह शिविर एक नई शुरुआत है। अब वे परिवार के साथ बातचीत कर पाएंगे, टीवी सुन पाएंगे और समाज में घुल-मिल पाएंगे।

लोगों की भावुक प्रतिक्रियाएं

शिविर में आए कई बुजुर्ग भावुक हो गए। एक बुजुर्ग ने कहा, “मैं सालों से लोगों की बातें ठीक से नहीं सुन पाता था। बच्चे-बहू बोलते थे तो समझ नहीं आता। अब यह यंत्र मिल गया है तो लगता है जिंदगी में नई रोशनी आ गई।” एक महिला ने बताया कि उनके पति को सुनने में दिक्कत थी, जिससे घर में बातचीत कम हो गई थी। अब वे फिर से खुशी-खुशी बातें कर पाएंगे।

ऐसे कई किस्से थे जहां लोग डीवीसी की इस पहल की तारीफ करते नहीं थक रहे थे। कई लोगों ने कहा कि सरकारी या निजी अस्पतालों में ऐसी जांच और यंत्र लाखों में मिलते हैं, लेकिन यहां सब मुफ्त में मिला।

डीवीसी CSR टीम की सराहनीय भूमिका

इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में डीवीसी की CSR टीम, बोकारो थर्मल अस्पताल और स्टाफ की बहुत बड़ी भूमिका रही। मंच संचालन डी. एन. शर्मा ने बहुत ही अच्छे तरीके से किया। सब कुछ व्यवस्थित था – जांच, यंत्र फिटिंग, सलाह और लोगों को घर भेजना। डीवीसी ने इस तरह की कई स्वास्थ्य शिविर पहले भी आयोजित किए हैं, लेकिन यह शिविर खास था क्योंकि सुनने की समस्या अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, जबकि यह जीवन की गुणवत्ता को बहुत प्रभावित करती है।

क्यों जरूरी हैं ऐसी पहलें?

झारखंड जैसे इलाकों में बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है और सुनने की समस्या आम हो गई है। उम्र के साथ कान कमजोर हो जाते हैं, लेकिन इलाज महंगा होने से लोग चुप रह जाते हैं। इससे वे डिप्रेशन, अकेलापन और परिवार से दूरी महसूस करते हैं। डीवीसी जैसी संस्थाएं जब CSR के तहत ऐसे शिविर करती हैं तो समाज के कमजोर वर्ग को सीधा फायदा मिलता है। यह न सिर्फ स्वास्थ्य सुविधा देता है बल्कि सामाजिक एकता भी बढ़ाता है।

डीवीसी बोकारो थर्मल पावर स्टेशन बिजली उत्पादन के साथ-साथ आसपास के लोगों की भलाई के लिए भी काम करता है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में उनके कई प्रोजेक्ट चलते हैं। यह शिविर इसी का एक हिस्सा था।

निष्कर्ष

शिविर खत्म होने तक स्टेशन क्लब में खुशियों की गूंज सुनाई दे रही थी। लोग नए यंत्र लगाकर मुस्कुराते हुए घर लौट रहे थे। कई लोग एक-दूसरे से बात कर रहे थे कि अब वे कितनी आसानी से सुन पा रहे हैं। डीवीसी की इस पहल ने साबित कर दिया कि अगर इरादा नेक हो तो छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

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