Ethiopian Volcanic Ash Reaches India: इथियोपिया (Ethiopia) में हुए एक बड़े ज्वालामुखी विस्फोट का असर अब भारत (India) तक देखने को मिल रहा है। अफार (Afar) क्षेत्र में फटा Hayli Gubbi ज्वालामुखी रविवार को जब सक्रिय हुआ, तो उससे उठी राख की मोटी परत पूर्व की तरफ फैलती हुई अरब सागर के रास्ते भारत तक पहुंच गई। इसके चलते देश की कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बाधित हो गईं और कुछ को रद्द भी करना पड़ा। एयर इंडिया (Air India) और इंडिगो (IndiGo) सहित कई एयरलाइंस अलर्ट पर हैं और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की कोशिशें जारी हैं। उधर DGCA ने भी एयरलाइंस और एयरपोर्ट्स को एडवाइजरी जारी करते हुए सतर्क रहने को कहा है। आखिर कैसे एक दूर देश का ज्वालामुखी भारत की उड़ानों को प्रभावित कर रहा है? चलिए जानते हैं…
इथियोपिया में फटा ज्वालामुखी/Ethiopian Volcanic Ash Reaches India
इथियोपिया (Ethiopia) के अफार (Afar) क्षेत्र में स्थित Hayli Gubbi ज्वालामुखी रविवार, 23 नवंबर को अचानक सक्रिय हो गया। विस्फोट के बाद इसमें से बड़ी मात्रा में राख और गैसें निकलकर वातावरण में फैल गईं। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार राख का यह गुबार तेज हवाओं के कारण पूर्व दिशा में बहता हुआ अरब सागर को पार करते हुए भारत तक पहुंच गया। यह घटना सामान्य नहीं है, क्योंकि किसी दूसरे महाद्वीप में हुए ज्वालामुखी विस्फोट के प्रभाव का सीधे भारत के मौसम और उड्डयन पर पड़ना दुर्लभ है। लेकिन इस बार राख की परत इतनी घनी थी कि उसने हवाई मार्गों को प्रभावित करना शुरू कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्वालामुखी से निकली राख इंजन को नुकसान पहुंचा सकती है और दृश्यता को कम कर सकती है। इसी खतरे को देखते हुए भारतीय उड्डयन क्षेत्र में तुरंत एहतियाती कदम उठाए गए।

भारत में फ्लाइट्स क्यों हुईं प्रभावित?
ज्वालामुखी से निकली राख जब भारत के हवाई क्षेत्र के करीब पहुंची, तो इसके प्रभाव सबसे पहले पश्चिमी भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों पर दिखे। कई फ्लाइट्स को रास्ता बदलना पड़ा और कुछ उड़ानों को रद्द करना पड़ा। एयर इंडिया (Air India) ने बताया कि वे अपने ऑपरेटिंग क्रू के साथ लगातार संपर्क में हैं और स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। वहीं इंडिगो (IndiGo) ने यात्रियों को आश्वासन दिया कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी जोखिम से बचने के लिए उड़ानों को अस्थायी रूप से रोका गया है। आकासा एयर (Akasa Air) ने जेद्दा (Jeddah), कुवैत (Kuwait) और अबू धाबी (Abu Dhabi) के लिए 24 और 25 नवंबर की उड़ानें रद्द कीं। इसके अलावा डच एयरलाइन KLM ने अपनी एम्स्टर्डम–दिल्ली और दिल्ली–एम्स्टर्डम उड़ानों को रद्द कर दिया। राख के चलते आसमान में दृश्यता और इंजन सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा हुआ, जिससे यह निर्णय लेना अनिवार्य हो गया।
DGCA की एडवाइजरी और एयरलाइंस की प्रतिक्रियाएं
स्थिति बिगड़ने के बाद भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सभी एयरलाइंस और एयरपोर्ट्स को एडवाइजरी जारी की। DGCA ने साफ चेतावनी दी कि राख के गुबार के चलते विमानों के इंजन, नेविगेशन और विज़िबिलिटी पर असर पड़ सकता है, इसलिए सभी ऑपरेशनल स्टाफ आवश्यक सावधानियां बरतें। एयर इंडिया (Air India) ने एक्स (X) पर पोस्ट कर कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था पर काम कर रहे हैं। इंडिगो (IndiGo) ने भी कहा कि यह स्थिति चिंता पैदा कर सकती है, लेकिन वे अंतरराष्ट्रीय एविएशन एजेंसियों के साथ साझेदारी में लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। आकासा एयर, इंडिगो और KLM ने DGCA की एडवाइजरी का पालन करते हुए समय से पहले फ्लाइट्स कैंसिल कर दीं। उधर ग्राउंड टीमें प्रभावित यात्रियों को लगातार अपडेट दे रही हैं ताकि असुविधा न्यूनतम रहे।
अब हालात कैसे हैं?
फिलहाल भारत (Bharat) में पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हवाई मार्गों पर फ्लाइट ऑपरेशन (Flight Operation) आंशिक रूप से प्रभावित हैं। एयरलाइंस ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे यात्रा से पहले अपनी उड़ानों की स्थिति की जांच अवश्य कर लें। DGCA ने मॉनिटरिंग टीमों को सक्रिय कर दिया है और मौसम विभाग के साथ मिलकर राख की मूवमेंट पर वास्तविक समय में नज़र रखी जा रही है। जैसे ही राख का घनत्व कम होगा और मार्ग सुरक्षित माने जाएंगे, उड़ानों को बहाल किया जाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों तक स्थिति अस्थिर रह सकती है। एयरलाइंस ने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रूट या शेड्यूल अपनाया जा सकता है। फिलहाल सभी एजेंसियां मिलकर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उड़ानों को जल्द सामान्य करने के लिए काम कर रही हैं।










