Fake Doctor Busted In Lalitpur : ललितपुर में फर्जी डॉक्टर का भंडाफोड़, जीजा की डिग्री से करता था मरीजों का इलाज

Fake Doctor Busted In Lalitpur : 57 साल का 'डॉक्टर' निकला इंजीनियर, फर्जी कागजात से दिल का स्पेशलिस्ट बनकर लाखों कमाए, अब जेल में

Fake Doctor Busted In Lalitpur : उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सरकारी मेडिकल कॉलेज में हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) की नौकरी हासिल कर ली थी। वह पिछले तीन साल से मरीजों का इलाज कर रहा था, लेकिन उसकी कोई मेडिकल डिग्री ही नहीं थी। पुलिस ने अब उसे गिरफ्तार कर लिया है और जेल भेज दिया है। यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?

यह पूरा मामला तब सामने आया जब आरोपी की अपनी बहन ने शिकायत की। बहन का नाम डॉ. सोनाली सिंह है, जो अमेरिका में रहती हैं। उनके पति डॉ. राजीव गुप्ता असली कार्डियोलॉजिस्ट हैं और अमेरिका में ही प्रैक्टिस करते हैं। सोनाली ने मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और सीएमओ कार्यालय को पत्र लिखकर बताया कि उनका भाई अभिनव सिंह उनके पति की एमबीबीएस और एमडी की डिग्री का दुरुपयोग कर रहा है।

अभिनव सिंह ने जीजा की डिग्री, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों पर अपना फोटो लगाकर फर्जी पहचान बनाई। खुद को डॉ. राजीव गुप्ता बताकर 2022 में स्वायत्तशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज ललितपुर में कार्डियोलॉजिस्ट के पद पर नौकरी पा ली। वह जिला सीसीयू और कैंसर केयर यूनिट में विशेषज्ञ के तौर पर काम कर रहा था। हर महीने उसे डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा सैलरी मिल रही थी।

शिकायत मिलते ही अभिनव ने मां की मौत का बहाना बनाकर इस्तीफा दे दिया और फरार हो गया। लेकिन पुलिस ने उसे खोज निकाला।

आरोपी अभिनव सिंह कौन है?

अभिनव सिंह की उम्र करीब 57 साल है। वह मूल रूप से ललितपुर के तालाबपुरा का रहने वाला है। गिरफ्तारी के समय उसका पता सागर जिले के खुरई में था। हैरानी की बात यह है कि अभिनव कोई डॉक्टर नहीं, बल्कि इंजीनियर है। उसने आईआईटी रुड़की से बीटेक किया था। फिर 1992 में आईआरएस (इंडियन रेवेन्यू सर्विस) में सिलेक्शन हुआ और वह कस्टम ऑफिसर बना। पहले मद्रास और फिर मुंबई में पोस्टिंग मिली।

लेकिन मुंबई में भ्रष्टाचार के एक मामले में वह पकड़ा गया और 16 महीने जेल भी काट चुका है। जेल से निकलने के बाद उसने यह फर्जीवाड़ा शुरू किया। परिवार में संपत्ति को लेकर बहन-भाई में विवाद भी था, जिसकी वजह से बहन ने शिकायत की।

तीन साल तक मरीजों की जान से खिलवाड़

अभिनव सिंह ने तीन-तीन साल तक मेडिकल कॉलेज में ओपीडी चलाई, ईसीजी, इको और अन्य जांचें कीं और दिल के मरीजों का इलाज किया। उसके पास हृदय रोग की कोई डिग्री नहीं थी और न ही कोई अनुभव। फिर भी वह गंभीर मरीजों को हैंडल कर रहा था। सोचिए, कितने मरीजों की जान खतरे में रही होगी! सौभाग्य से अभी तक किसी मरीज की मौत की खबर नहीं आई, लेकिन यह बड़ा रिस्क था।

इस मामले ने पूरे स्वास्थ्य विभाग को हिला दिया है। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। कैसे बिना सही वेरिफिकेशन के इतने बड़े पद पर नियुक्ति हो गई?

पुलिस की तेज कार्रवाई

शिकायत मिलते ही सीएमओ कार्यालय ने कोतवाली पुलिस में केस दर्ज कराया। ललितपुर के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मुश्ताक के निर्देशन में सदर कोतवाली पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। क्षेत्राधिकारी सदर की अगुवाई में चार टीमें बनाई गईं। सर्विलांस, तकनीकी सबूत और लोकल इनपुट की मदद से अभिनव सिंह को सागर से पकड़ा गया।

पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया और अब वह जेल में है। केस में धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस अब उसके पुराने रिकॉर्ड और अन्य संभावित फर्जीवाड़ों की भी जांच कर रही है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि पूरी सिस्टम की कमजोरी दिखाता है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की नियुक्ति कैसे इतनी आसानी से हो गई? दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं हुई? अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सभी डॉक्टरों के कागजात दोबारा चेक करने का फैसला किया है। स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है।

ऐसे फर्जी डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ करते हैं। अच्छा हुआ कि समय रहते पकड़ा गया, वरना और कितने लोग प्रभावित होते। पुलिस की इस कार्रवाई से लोगों को राहत मिली है। उम्मीद है कि जांच पूरी हो और दोषियों को सख्त सजा मिले।

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