Farrukhabad में भक्ति की गूंज: श्री महा मंगलेश्वर नाथ धाम में त्रिदिवसीय सुंदरकांड, भोग और महाआरती में उमड़ा जनसैलाब

फर्रुखाबाद (Farrukhabad) नगर के पुराना कोटा पार्चा स्थित श्री महा मंगलेश्वर नाथ द्वादश ज्योतिर्लिंग धाम में वार्षिक उत्सव के अवसर पर भक्ति की अविरल धारा बहती नजर आई। मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट से सुसज्जित किया गया था। सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा और पूरे वातावरण में राम नाम की गूंज सुनाई देती रही। आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया बल्कि सामाजिक एकता का भी संदेश दिया।

मानव कल्याण की भावना से हुआ सुंदरकांड पाठ

श्री सुंदरकांड पाठ समिति, चिंतामणि के तत्वावधान में त्रिदिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान भक्तों ने भगवान हनुमान की उपासना कर विश्व कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना की। समिति के व्यवस्थापक घनश्याम वाजपेई ने कहा कि कलयुग में हनुमान जी की आराधना सबसे प्रभावशाली मानी जाती है। उन्होंने चौपाई — “कवन सो काज कठिन जग माही, जो नहीं होई तात तुम पाही” — का उल्लेख करते हुए बताया कि सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना अवश्य फलदायी होती है।

भक्ति संगीत के बीच गूंजा रामचरितमानस

सुंदरकांड पाठ संगीतबद्ध शैली में किया गया, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम में योगेश मिश्रा, मनोज मिश्रा, निर्मल दीक्षित, प्रशांत सिंह, घनश्याम वाजपेई, अशोक वर्मा, कमलेश दीक्षित, अनूप मिश्रा, नागेश अग्निहोत्री, पवन गुप्ता, रविंद्र भदौरिया और अनुराग पांडे ने सुमधुर स्वर में पाठ प्रस्तुत किया। ढोलक, हारमोनियम और झांझ की ताल पर वातावरण भक्तिमय बना रहा। उपस्थित श्रद्धालु भी रामधुन में लीन होकर पाठ में सहभागिता करते दिखे।

श्रृंगार, भोग और महाआरती

कार्यक्रम के अंतिम दिन भगवान हनुमान का विशेष श्रृंगार किया गया। फूलों और आभूषणों से सजे विग्रह के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। इसके बाद छप्पन भोग अर्पित कर भव्य महाआरती संपन्न हुई। आरती के समय पूरा परिसर “बजरंगबली की जय” के जयघोष से गूंज उठा। आयोजन के समापन पर महाप्रसाद और भंडारे की व्यवस्था की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

भक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश

त्रिदिवसीय इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि धार्मिक उत्सव केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं। मंदिर परिसर में उमड़ी भीड़ ने यह संकेत दिया कि आस्था आज भी लोगों के जीवन का केंद्र है। श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान से परिवार की खुशहाली, समाज में शांति और राष्ट्र के मंगल की कामना की।

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