First Jaygurudev Mandir : मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी इंदौर में एक ऐतिहासिक और भावुक पल देखने को मिला, जब विश्व विख्यात परम संत बाबा उमाकांत जी महाराज ने नावदा पंथ स्थित जयगुरुदेव आश्रम में बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के मंदिर का भव्य शिलान्यास और भूमि पूजन किया। यह मध्य प्रदेश का पहला ऐसा मंदिर है, जो बाबा जयगुरुदेव जी महाराज की शिक्षाओं और नामदान परंपरा को समर्पित है। कार्यक्रम में देशभर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने महाराज जी के सान्निध्य में सत्संग सुना और आशीर्वाद प्राप्त किया।
यह कार्यक्रम 21 फरवरी 2026 को प्रातः 11:30 बजे से शुरू हुआ, जिसमें भूमि पूजन के बाद शिलान्यास किया गया। बाबा उमाकांत जी महाराज ने अपने कर-कमलों से पूजन और शिलान्यास संपन्न किया। इसके पश्चात महाराज जी ने सत्संग में भक्तों को गहन आध्यात्मिक वचन सुनाए। उन्होंने सभी से शाकाहार अपनाने, नशा मुक्त जीवन जीने और जीते जी ईश्वर के दर्शन कराने वाले नामदान का महत्व बताया। महाराज जी ने कहा कि नामदान ही वह मार्ग है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है और जीवन को सार्थक बनाता है।

कार्यक्रम की पूरी व्यवस्था इंदौर संगत के सेवादारों ने की। हजारों भक्तों के लिए भोजन, आवास, चिकित्सा और अन्य सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। सत्संग समाप्त होने के बाद महाराज जी ने सभी भक्तों को व्यक्तिगत दर्शन दिए, जिससे श्रद्धालुओं में अपार उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली।
प्रमुख हस्तियों ने भी लिया भाग

इस ऐतिहासिक आयोजन में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव जी और सांसद शंकर लालवानी जी ने विशेष रूप से शिरकत की। दोनों नेताओं ने बाबा उमाकांत जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया और कार्यक्रम की सफलता पर खुशी जताई। महापौर भार्गव जी ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन शहर की शांति और सद्भावना को मजबूत करते हैं, जबकि सांसद लालवानी जी ने महाराज जी की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
विश्व शांति और एकता पर महाराज जी का गहन संदेश
सत्संग के दौरान बाबा उमाकांत जी महाराज ने विश्व स्तर पर शांति और एकता की अपील की, जो आज के वैश्विक परिदृश्य में बेहद प्रासंगिक है। महाराज जी ने कहा, “बड़े-बड़े देशों के लोग, जिनसे दुनिया डरती है, सब एक जगह बैठकर ऐसी नीति बनाएं कि जनता का कोई नुकसान न हो।” उन्होंने आगे कहा कि जाति, समाज और धर्म के चक्कर में जनता को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं। देश का बगीचा जो लगा है, उसे बर्बाद न करें।
महाराज जी ने चेतावनी दी कि यदि वैज्ञानिक ऐसे हथियार बनाएंगे जिससे जनता मर जाएगी, तो फिर हथियार बनाने बंद कर देंगे, लेकिन तब क्या होगा? उन्होंने प्रार्थना की कि विश्व के प्रभावशाली लोग एक मेज पर बैठें और ऐसी नीतियां बनाएं जिनसे कोई नुकसान न पहुंचे। महाराज जी ने कहा, जिसके पास जमीन-जायदाद है, वह ठीक से करेगा तो देने वाले का लंबा हाथ है, उसी में बरकत दे देगा। दूसरे के चीन झपटने में क्या होता है? उनके ऊपर वही मिसाइल गिर जाती है जो दूसरे देश की है, तो बर्बाद हो जाता है। आबाद की जगह बर्बादी मत करो। यह प्रार्थना हम बराबर करते रहते हैं।
यह संदेश न केवल आध्यात्मिक बल्कि सामाजिक और वैश्विक स्तर पर शांति की मांग करता है। महाराज जी की यह अपील युद्ध, हिंसा और विनाश के दौर में एक नई उम्मीद जगाती है।
बाबा जयगुरुदेव परंपरा का महत्व
बाबा जयगुरुदेव जी महाराज की परंपरा शाकाहार, सदाचार, नशामुक्ति और नामदान पर आधारित है। बाबा उमाकांत जी महाराज उनके आध्यात्मिक उत्तराधिकारी हैं, जो उज्जैन और अन्य स्थानों पर आश्रम चला रहे हैं। इंदौर में यह मंदिर उनकी शिक्षाओं को और मजबूत करेगा। भक्तों का मानना है कि यह मंदिर न केवल धार्मिक केंद्र बनेगा, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाएगा।










