Guru Tegh Bahadur Shaheedi Diwas Agra 2025: जब आगरा में ठहरे थे गुरु तेग बहादुर, आज उसी गुरु का ताल पर लाइटों का मेला

Guru Tegh Bahadur Shaheedi Diwas Agra 2025: लाइटों से जगमगाया गुरु का ताल, गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस धूमधाम से मना

Guru Tegh Bahadur Shaheedi Diwas Agra 2025: हर साल 24 नवंबर को सिख समुदाय के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस पूरे देश-दुनिया में श्रद्धा और गौरव के साथ मनाया जाता है। इस बार भी आगरा में यह पवित्र दिन बड़े उत्साह के साथ मना रहा है। शहर के प्रसिद्ध गुरुद्वारा गुरु का ताल को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है और शाम को भव्य कीर्तन का आयोजन हो रहा है।

गुरु तेग बहादुर जी और आगरा का गहरा नाता/Guru Tegh Bahadur Shaheedi Diwas Agra 2025

आगरा का गुरुद्वारा गुरु का ताल सिख इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहीं पर सन् 1666 में गुरु तेग बहादुर जी ने कुछ समय विश्राम किया था। उस समय वे पूरे उत्तर भारत की यात्रा पर थे और धर्म की रक्षा के लिए लोगों को जागृत कर रहे थे।

बाद में जब मुगल बादशाह औरंगजेब ने कश्मीरी पंडितों पर जबरन इस्लाम कबूल करने का दबाव डाला, तो गुरु तेग बहादुर जी ने उनकी रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा था – “सिर जाए पर धर्म न जाए”। इसी के चलते औरंगजेब ने गुरु जी को दिल्ली बुलाया और अंत में 24 नवंबर 1675 को चांदनी चौक में उनका सर कलम कर दिया गया। इस बलिदान ने पूरी दुनिया को धार्मिक स्वतंत्रता का संदेश दिया।

आगरा में ही गुरु जी को मुगल सैनिकों ने गिरफ्तार किया था। जिस जगह पर उन्हें पकड़ा गया था, वहां आज गुरुद्वारा मंजी साहिब बना हुआ है। इस तरह आगरा सिखों के लिए दो बड़े तीर्थस्थल रखता है – गुरु का ताल और मंजी साहिब।

इस बार का विशेष आयोजन

इस बार शहीदी दिवस के मौके पर गुरुद्वारा गुरु का ताल को हजारों रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। दूर से देखने पर पूरा गुरुद्वारा चमक रहा है, मानो स्वयं गुरु जी का आशीर्वाद बरस रहा हो। शाम को यहां अखंड पाठ का भोग होगा और रात भर कीर्तन-दरबार सजेगा। देश-विदेश से संगत पहुंच रही है। लंगर की सेवा भी दिन-रात चल रही है।

क्या बोले सेवादार और संत

गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी बाबा प्रीतम दास जी ने बताया, “गुरु तेग बहादुर जी ने हिंद की चादर बनकर पूरे हिंदुस्तान की आबरू बचाई। कश्मीरी पंडितों को बचाने के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आज का दिन हमें याद दिलाता है कि धर्म और इंसानियत की रक्षा के लिए कितनी भी बड़ी कुर्बानी देनी पड़े, पीछे नहीं हटना चाहिए।”

वहीं संत अमरीश सिंह जी ने कहा, “आज का युवा गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को भूल रहा है। हमें अपने बच्चों को यह इतिहास बताना चाहिए कि कैसे एक महान संत ने दूसरों की रक्षा के लिए अपना सिर कटवा लिया। यह दिन सिर्फ सिखों का नहीं, पूरे देश का गौरव है।”

लाइटों से जगमग हुआ गुरुद्वारा

शाम ढलते ही गुरु का ताल की लाइटें जल उठीं। नीले, पीले, हरे, लाल रंग की रोशनी चारों तरफ फैल गई। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई फोटो खींचने में लगा है। दूर-दूर से लोग सिर्फ यह नजारा देखने आ रहे हैं। गुरुद्वारे के बाहर लंगर की लाइन लगी है, जहां गर्म-गर्म खिचड़ी-कढ़ी और चाय परोसी जा रही है।

संदेश आज भी प्रासंगिक

आज के समय में जब धर्म के नाम पर लोग एक-दूसरे से लड़ रहे हैं, गुरु तेग बहादुर जी का संदेश और भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने सिखाया कि किसी का जबरन धर्म परिवर्तन नहीं होना चाहिए। हर इंसान को अपनी आस्था पर जीने का पूरा हक है। यही वजह है कि उन्हें “हिंद दी चादर” कहा जाता है।

आगरा की संगत ने ठान लिया है कि गुरु जी के दिखाए रास्ते पर चलते हुए वे हर साल इस दिन को और भी धूमधाम से मनाएंगे। आने वाले दिनों में भी गुरुद्वारा गुरु का ताल में कई धार्मिक कार्यक्रम होते रहेंगे।

इस शहीदी दिवस पर पूरा आगरा गुरु तेग बहादुर जी को नमन कर रहा है। उनकी शहादत को सलाम करते हुए संगत प्रार्थना कर रही है कि गुरु जी का आशीर्वाद हमेशा बना रहे और हम सब मिल-जुल कर रहें।

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