उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh ) के हापुड़ ( Hapur ) जिले के गढ़मुक्तेश्वर स्थित बृजघाट श्मशान घाट पर गुरुवार को एक ऐसी घटना घटी, जिसने न सिर्फ स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी। गंगा के पावन तट पर बसे इस प्राचीन श्मशान घाट की अपनी एक पौराणिक मान्यता है। मान्यता है कि यहां दाह संस्कार करने से आत्मा को मोक्ष प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। लेकिन इस बार यहां पहुंचे चार युवकों ने इस पवित्र स्थान का अपमान करने की कोशिश की। वे एक प्लास्टिक के पुतले को असली शव बताकर उसका अंतिम संस्कार कराने की साजिश रच रहे थे। साजिश का मकसद था 50 लाख रुपये का बीमा क्लेम हड़पना। श्मशान कर्मचारियों की सतर्कता से यह योजना धरी रह गई। पुलिस ने दो मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य फरार हैं।
घटना का पूरा विवरण: कार से ‘शव’ लाए, लेकिन कफन हटते ही खुला राज

बृहस्पतिवार दोपहर करीब 2 बजे, हरियाणा नंबर प्लेट (HR26DN6168) वाली एक ह्युंडई i-20 कार बृजघाट श्मशान घाट पर पहुंची। कार से उतरे चार युवक – कमल सोमानी, आशीष खुराना और उनके दो साथी – चादर में लिपटा एक ‘शव’ लेकर घाट पर उतरे। उन्होंने श्मशान के पंडित और कर्मचारियों को बताया कि यह शव दिल्ली के करोल बाग निवासी अंशुल कुमार (उम्र 25 वर्ष) का है, जो अस्पताल में बीमारी से मृत्यु को प्राप्त हुआ है। पोस्टमॉर्टम हो चुका है और अब दाह संस्कार की तैयारी हो।
श्मशान घाट की परंपरा के अनुसार, मुर्दे को घाट पर लाने के बाद उसे गंगा जल से स्नान कराया जाता है और कफन उतारकर चेहरा देखा जाता है। लेकिन आरोपी युवक चादर या कफन हटाने से बार-बार बचने लगे। वे बहाने बनाते रहे – “जल्दी चिता सजाइए, परिवार वाले इंतजार कर रहे हैं” या “पोस्टमॉर्टम के बाद संक्रमण का डर है”। श्मशान कर्मचारी नितिन और अन्य पंडितों को बातों में संदेह हुआ। उन्होंने जिद की और जबरन चादर हटाई। अंदर जो निकला, वह कोई मानव शव नहीं, बल्कि एक सस्ता प्लास्टिक का पुतला था – चेहरे पर नकली मूंछें चिपकाई गईं, जो अंशुल कुमार से मिलता-जुलता लगे।
यह देखते ही घाट पर हड़कंप मच गया। लोग चिल्लाने लगे, “ये क्या धोखा है? श्मशान का अपमान!” आरोपी भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन भीड़ ने उन्हें घेर लिया। सूचना मिलते ही गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली की पुलिस फोर्स तत्काल मौके पर पहुंची। इंस्पेक्टर मनोज कुमार बालियान के नेतृत्व में कमल सोमानी (कॉलोनी कैलाशपुरी, थाना पालम, दिल्ली) और आशीष खुराना (जैन कॉलोनी, थाना उत्तम नगर, दिल्ली) को हिरासत में ले लिया गया। उनके दो साथी मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए।
पुलिस ने कार की तलाशी ली तो डिक्की से दो और प्लास्टिक डमी पुतले बरामद हुए। कुल तीन पुतले थे, जो साजिश का हिस्सा थे। साथ ही, फर्जी अस्पताल के कागजात, बीमा पॉलिसी की कॉपी और नकली मौत का सर्टिफिकेट भी जब्त किया गया।
साजिश का काला चेहरा: कर्ज चुकाने के लिए दोस्त को ‘मरा’ दिखाया
पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह सब 50 लाख रुपये के बीमा घोटाले का हिस्सा था। मुख्य आरोपी कमल सोमानी एक कपड़ा व्यापारी है, जिस पर भारी कर्ज था। उसने अपने करीबी दोस्त अंशुल कुमार के नाम पर बीमा पॉलिसी कराई, जिसमें खुद को नॉमिनी बनाया। योजना थी – अंशुल को ‘मृत’ घोषित कर फर्जी दस्तावेज बनवाना, श्मशान से दाह संस्कार की रसीद लेना और फिर बीमा कंपनी से क्लेम वसूलना।
अंशुल ने पुलिस को दिए बयान में कहा, “मैं जिंदा हूं! कमल ने कर्ज चुकाने के लालच में मुझे फंसाया। उन्होंने मुझे बताया कि सिर्फ कागजों पर मेरा नाम इस्तेमाल होगा, लेकिन पुतले का इस्तेमाल करके सब फर्जी कर दिया।” अंशुल ने खुलासा किया कि कमल ने दिल्ली के एक बाजार से सस्ते प्लास्टिक के पुतले खरीदे थे, जिनकी कीमत महज 500-1000 रुपये प्रति टुकड़ा थी। इन्हें चेहरे पर मिट्टी लगाकर और कफन में लपेटकर असली शव जैसा दिखाया गया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी पहले भी छोटे-मोटे बीमा फ्रॉड में लिप्त रहे हैं। इस साजिश में आशीष खुराना उनका मुख्य सहयोगी था, जो कार और पुतले लाने का इंतजाम कर रहा था। फरार दोनों साथियों की तलाश में टीमें लगाई गई हैं। एसपी हापुड़ ने कहा, “यह धोखाधड़ी का गंभीर मामला है। बीमा कंपनी को सूचित कर दिया गया है। आरोपी पर धोखाधड़ी, जालसाजी और श्मशान अपमान के आरोप लगाए जाएंगे।”
बृजघाट श्मशान की मान्यता: पवित्रता पर सवाल
बृजघाट श्मशान घाट गंगा के किनारे बसा एक प्राचीन स्थल है, जहां भगवान ब्रह्मा द्वारा स्थापित मंदिर भी मौजूद है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार से आत्मा को सीधे मोक्ष मिलता है। हर साल कुम्भ मेले के दौरान हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं। इस घटना ने स्थानीय पंडितों और भक्तों को रोषित कर दिया। पंडित नितिन ने कहा, “यह हमारी आस्था पर प्रहार है। ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।”
प्रशासन की सख्ती: अब चेहरा और आईडी चेक अनिवार्य
घटना के बाद गढ़मुक्तेश्वर नगर पालिका ने तुरंत कदम उठाया। चेयरमैन राकेश कुमार बजरंगी और ईओ पवित्रा त्रिपाठी के निर्देश पर श्मशान घाट पर नई व्यवस्था लागू कर दी गई। अब हर शव की एंट्री से पहले चेहरा जांचा जाएगा, आईडी प्रूफ (आधार कार्ड या अन्य दस्तावेज) अनिवार्य होगा। पंडितों को सतर्क रहने और संदिग्ध मामलों में तुरंत पुलिस को सूचित करने के आदेश दिए गए हैं। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी।
यह मामला बीमा धोखाधड़ी के बढ़ते चलन को उजागर करता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें और तुरंत रिपोर्ट करें। जांच जारी है, और जल्द ही फरार आरोपियों को भी पकड़ लिया जाएगा। बृजघाट की पवित्रता एक बार फिर बच गई, लेकिन यह घटना समाज को सतर्क रहने की सीख देती है।










