Heavy Vehicles On Private Road Protest: रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड के अंतर्गत बड़गांव पंचायत में स्थित भुईयांडीह गांव के गोप टोला में हाल ही में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। यहां टाटा स्टील के घाटोतंड (वेस्ट बोकारो डिवीजन) प्रोजेक्ट के लिए काम कर रही आउटसोर्सिंग कंपनियों के भारी वाहनों के चलने से ग्रामीण काफी परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये भारी ट्रक और अन्य बड़े वाहन उनकी निजी सड़क का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो केवल गांव वालों की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बनी है। इस वजह से सड़क टूट रही है, दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है और खासकर बच्चों तथा बुजुर्गों की जान को जोखिम हो रहा है।
शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं, फिर भड़का गुस्सा/Heavy Vehicles On Private Road Protest
यह मामला कुछ दिनों पहले ही गर्म हुआ था। ग्रामीणों ने पहले ही कंपनी के वेस्ट बोकारो डिवीजन के जनरल मैनेजर, रामगढ़ के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और घाटोतंड ओपी प्रभारी को लिखित शिकायत दी थी। उन्होंने अपनी आपत्ति साफ-साफ दर्ज कराई थी कि निजी सड़क पर भारी वाहनों का आवागमन बंद किया जाए। लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने फैसला किया कि अब सीधे सड़क जाम करके विरोध जताया जाएगा।

सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़क पर बैठकर जाम लगाया
आज सुबह सैकड़ों ग्रामीण, जिसमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे, सड़क पर इकट्ठा हो गए। उन्होंने भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोक दिया। सड़क पर बैठकर नारे लगाए गए और कंपनी के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की गई। ग्रामीणों का कहना था कि कंपनी प्रोजेक्ट के काम के लिए उनकी निजी सड़क का गलत इस्तेमाल कर रही है। यह सड़क गांव के लोगों के लिए बहुत जरूरी है – बच्चे स्कूल जाते हैं, बुजुर्ग डॉक्टर के पास जाते हैं, रोज का सामान लाने-ले जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग होता है। लेकिन भारी वाहनों के आने-जाने से सड़क में गड्ढे पड़ गए हैं, धूल उड़ रही है और कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर कंपनी अपनी सड़क नहीं बनाती या कोई दूसरा रास्ता नहीं निकालती, तो वे आगे भी ऐसा विरोध जारी रखेंगे।
लोकल रोजगार की मांग, बाहरियों को काम देकर ठेकेदारों ने भड़काया आक्रोश
ग्रामीणों के नेता अशोक यादव और अजय यादव ने खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि कंपनी के ठेकेदार लोकल लोगों को काम नहीं दे रहे। बाहर के राज्यों से बिचौलियों के जरिए मजदूर लाए जा रहे हैं। इससे गांव के युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, जबकि कंपनी उनके इलाके में काम कर रही है। अजीत गुप्ता जैसे अन्य ग्रामीणों ने भी यही आरोप लगाया कि ठेकेदार लोकल रोजगार की बजाय बाहरियों को तरजीह दे रहे हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि पहले उनके इलाके के लोगों को काम मिले, ताकि परिवार चल सके और इलाके का विकास हो।
वार्ता के दौरान बिचौलियों ने की गाली-गलौज और मारपीट की कोशिश
विरोध के दौरान स्थिति थोड़ी तनावपूर्ण हो गई। कंपनी के प्रबंधन ने वार्ता के लिए बैठक बुलाई। इसमें घाटोतंड ओपी की पुलिस टीम, कंपनी के प्रबंधक और ग्रामीण प्रतिनिधि शामिल हुए। बातचीत चल रही थी कि अचानक ठेकेदार के कुछ बिचौलिए वहां पहुंच गए। उन्होंने वार्ता में बाधा डाली, गाली-गलौज शुरू कर दी और मारपीट की कोशिश की। इससे माहौल और बिगड़ गया। ग्रामीणों और बिचौलियों के बीच झड़प की नौबत आ गई।
पुलिस के हस्तक्षेप से शांत हुआ माहौल, लेकिन गुस्सा अभी बाकी
मामला हाथ से निकलता देख पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। घाटोतंड ओपी से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया और स्थिति को काबू में किया। किसी बड़े हादसे से बच गया। पुलिस की मौजूदगी से विरोध शांतिपूर्ण तरीके से चला, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा अभी भी बरकरार है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं – जैसे निजी सड़क पर भारी वाहनों पर रोक, लोकल रोजगार की गारंटी और सड़क की मरम्मत – तो वे और बड़े आंदोलन करेंगे।
विकास और सुरक्षा में संतुलन की जरूरत, क्या होगा आगे?
यह घटना दिखाती है कि औद्योगिक इलाकों में विकास और ग्रामीणों की सुरक्षा के बीच संतुलन कितना जरूरी है। टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनी के प्रोजेक्ट से रोजगार तो मिलता है, लेकिन अगर लोकल लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जाए, तो ऐसे विरोध बढ़ते जाते हैं। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि कंपनी अपनी अलग सड़क बनाए या कोई वैकल्पिक रास्ता निकाले, ताकि उनकी निजी सड़क सुरक्षित रहे। साथ ही, ठेकेदारों को निर्देश दिया जाए कि लोकल युवाओं को प्राथमिकता से काम मिले।










