Holika Dahan 2026 Shubh Muhurat: होलिका दहन 2026 शुभ मुहूर्त,भद्रा का है साया, सिर्फ 3 घंटे 11 मिनट का उत्तम समय!

Holika Dahan 2026 Shubh Muhurat: होलिका दहन पर भद्रा का साया, कन्फ्यूजन दूर करें – 2 मार्च या 3?

Holika Dahan 2026 Shubh Muhurat: रंगों का त्योहार होली नजदीक है, लेकिन इस बार होलिका दहन (छोटी होली) को लेकर लोगों में खासा कन्फ्यूजन है। भद्रा काल का साया पड़ने से शुभ मुहूर्त काफी छोटा रह गया है – महज 3 घंटे 11 मिनट का! कई जगहों पर लोग पूछ रहे हैं कि होलिका दहन 2 मार्च को होगा या 3 मार्च को? आइए पंचांग, ज्योतिष और शास्त्रों के आधार पर पूरी डिटेल समझते हैं।

फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की डिटेल/Holika Dahan 2026 Shubh Muhurat

फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि इस साल दो दिनों में फैली हुई है:

  • पूर्णिमा शुरू: 2 मार्च 2026 शाम 5:56 बजे (सोमवार)
  • पूर्णिमा खत्म: 3 मार्च 2026 शाम 5:08 बजे (मंगलवार)

होलिका दहन आमतौर पर प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि पर किया जाता है, जब सूर्यास्त के बाद समय हो। लेकिन भद्रा काल और चंद्र ग्रहण के कारण समय सीमित हो गया है।

भद्रा का साया: क्यों सिर्फ 3 घंटे 11 मिनट का मुहूर्त?

भद्रा को शनि की बहन माना जाता है, जो शुभ कार्यों में बाधा डालती है। शास्त्रों में भद्रा काल में कोई मांगलिक कार्य नहीं करने की सलाह दी जाती है, खासकर भद्रामुख भाग में। इस साल भद्रा का प्रभाव इस प्रकार है:

  • भद्रा शुरू: 2 मार्च शाम 5:56 बजे से
  • भद्रा खत्म: 3 मार्च सुबह 5:32 बजे तक

भद्रा में दो भाग होते हैं – भद्रापुच्छ और भद्रामुख। भद्रामुख सबसे अशुभ होता है, इसलिए इसे पूरी तरह टाला जाता है। भद्रा के कारण 2 मार्च की शाम का बड़ा हिस्सा प्रभावित है, लेकिन भद्रारहित प्रदोष काल में एक छोटा सा विंडो मिलता है।

*शुभ मुहूर्त (उत्तम समय): 2 मार्च 2026 शाम *6:22 बजे से रात 9:33 बजे तक (कुल 3 घंटे 11 मिनट)।
यह समय भद्रारहित प्रदोष काल में आता है, जहां होलिका दहन करना सबसे अच्छा माना गया है। ज्योतिषी पं. राकेश झा जैसे एक्सपर्ट्स के अनुसार, धर्मसिंधु ग्रंथ में कहा गया है कि भद्रारहित प्रदोष में दहन करना चाहिए। यदि दोनों दिन पूर्णिमा हो तो पहले दिन (2 मार्च) को प्राथमिकता दी जाती है।

चंद्र ग्रहण का असर और कन्फ्यूजन

3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा है, जो भारत में दिखाई देगा। ग्रहण के दौरान और उसके सूतक काल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इसलिए कई पंचांग 3 मार्च की शाम को होलिका दहन सुझाते हैं, लेकिन भद्रा और ग्रहण के कॉम्बिनेशन से 2 मार्च का छोटा मुहूर्त ज्यादा उत्तम माना जा रहा है। दृक पंचांग और अन्य प्रमुख स्रोतों में 3 मार्च शाम 6:22 से 8:50 बजे तक (2 घंटे 28 मिनट) का मुहूर्त भी दिया गया है, लेकिन भद्रा प्रभाव को देखते हुए 2 मार्च का समय ज्यादा फिट बैठता है।

होलिका दहन का महत्व और कथा

होलिका दहन भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ा है। असुर राजा हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठने की साजिश रची, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत, झूठ पर सत्य की विजय और नफरत पर प्रेम का प्रतीक है।

होलिका दहन से पुरानी रंजिशें, नकारात्मकता और कड़वाहट आग में जल जाती हैं। अगले दिन रंग खेलकर लोग भाईचारा बढ़ाते हैं। इस साल भद्रा के कारण सावधानी बरतने से घर-परिवार में शांति और सुरक्षा बनी रहती है।

पूजा विधि और जरूरी सामग्री

होलिका दहन की पूजा आसान है:

  1. शाम को लकड़ी का ढेर (होलिका) तैयार करें।
  2. गोबर, गंगाजल, हल्दी, कुमकुम, फूल, गुड़, चावल, गेहूं की बालियां चढ़ाएं।
  3. होलिका के चारों ओर परिक्रमा करें (कम से कम तीन बार)।
  4. मंत्र जपें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या होलिका दहन विशेष मंत्र।
  5. आग लगाने से पहले प्रह्लाद-नरसिंह की कथा याद करें।

सामग्री लिस्ट: लकड़ी, गोबर के उपले, हवन सामग्री, गुड़-चने की दाल, फल, फूल, अगरबत्ती, दीपक, रोली, अक्षत (चावल)।

सावधानियां और सलाह

  • भद्रा काल में दहन न करें, खासकर भद्रामुख में।
  • पंडित या स्थानीय पंचांग से कन्फर्म करें, क्योंकि समय लोकेशन के अनुसार थोड़ा बदल सकता है।
  • बच्चे-परिवार के साथ मिलकर मनाएं, भजन-कीर्तन करें।
  • रंग खेलते समय इको-फ्रेंडली कलर इस्तेमाल करें, पानी बचाएं।
  • इस साल ग्रहण और भद्रा के कारण होली का महत्व और बढ़ गया है – यह नई शुरुआत का मौका है।

Disclaimer- यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए लिखा गया है, News Nation Bharat इसकी पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञों से परामर्श लें।

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